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गिरिडीह में स्कूल प्रिंसिपल गिरफ्तार, नाबालिग छात्रा से छेड़छाड़ का आरोप

Giridih school harassment case

6 महीने से उत्पीड़न का आरोप, परिजनों की शिकायत पर पुलिस कार्रवाई

गिरिडीह: पचंबा थाना क्षेत्र में स्थित एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल पर 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ छेड़छाड़ और गलत हरकत करने के प्रयास का गंभीर आरोप सामने आया है। आरोपी की पहचान नाइस पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल मोहम्मद इमामुद्दीन के रूप में हुई है। मामले के सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है, वहीं पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

छह महीनों से परेशान कर रहा था आरोपी
पीड़िता के परिजनों के अनुसार, आरोपी प्रिंसिपल पिछले करीब छह महीनों से छात्रा के साथ लगातार छेड़छाड़ कर रहा था। इतना ही नहीं, 24 मार्च को उसने कथित तौर पर गलत काम करने का प्रयास भी किया। घटना के बाद छात्रा मानसिक रूप से काफी परेशान हो गई थी।

घर पहुंचते ही बताई आपबीती
बताया जा रहा है कि घटना के बाद जब छात्रा घर लौटी तो वह बेहद डरी और सहमी हुई थी। उसने पढ़ाई करने से भी इनकार कर दिया और गुमसुम रहने लगी। परिजनों द्वारा बार-बार पूछने पर छात्रा ने अपनी मां को पूरी घटना की जानकारी दी, जिसके बाद परिवार के होश उड़ गए।

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थाना में दर्ज हुई शिकायत
घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों और स्थानीय लोगों ने मिलकर पचंबा थाना में आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

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स्थानीय लोगों में आक्रोश
इस घटना के बाद इलाके में काफी आक्रोश देखा जा रहा है। वार्ड नंबर 6 के पार्षद संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि प्रिंसिपल लंबे समय से इस तरह की हरकतें कर रहा था और अन्य छात्राएं भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। स्थानीय लोगों ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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पुलिस कर रही आगे की जांच
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि क्या अन्य छात्राएं भी इस तरह की घटनाओं का शिकार हुई हैं। जरूरत पड़ने पर मामले में और धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।

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गिरिडीह की यह घटना एक बार फिर स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब जरूरत है कि ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कार्रवाई हो, ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके और बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जा सके।

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