मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, ED समन मामले में ट्रायल कोर्ट में सशरीर उपस्थिति से छूट
जस्टिस अनिल चौधरी की अदालत का फैसला—CGL परीक्षा की CBI जांच की मांग खारिज, परिणाम जारी करने का निर्देश
रांची: रांची में बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को झारखंड हाईकोर्ट से एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने ईडी समन की कथित अवहेलना से जुड़े प्रकरण में उन्हें ट्रायल कोर्ट में सशरीर उपस्थित होने की अनिवार्यता से छूट प्रदान कर दी है। यह फैसला जस्टिस अनिल चौधरी की अदालत ने याचिका के गुण-दोष यानी मेरिट पर विस्तृत सुनवाई करने के बाद दिया।
इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री को अब संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट में फिजिकल अपीयरेंस की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उन्हें बड़ी कानूनी राहत मिली है। मुख्यमंत्री की ओर से इस मामले में वरीय अधिवक्ता अरुणव चौधरी और अधिवक्ता दीपांकर राय ने पैरवी की।
ED समन अवहेलना का पूरा मामला क्या था?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में नीरज सिंह की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कई बार पूछताछ के लिए समन जारी किया था। मुख्यमंत्री की ओर से उन दिनों समन का जवाब देने में देरी और राजनीतिक-प्रशासनिक व्यस्तताओं को आधार बनाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
ईडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने एजेंसी की नोटिसों की अवहेलना की, जबकि मुख्यमंत्री पक्ष का कहना था कि समन का जवाब कानून सम्मत प्रक्रिया के तहत दिया गया था। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने मुख्यमंत्री को उपस्थित होने का निर्देश दिया था, जिसे चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट में अर्जी लगाई थी।
हाईकोर्ट ने मामले का परीक्षण करते हुए पाया कि इस चरण में मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना अनिवार्य नहीं है। इसलिए अदालत ने उन्हें राहत देते हुए सशरीर उपस्थिति से छूट प्रदान कर दी।
JSSC CGL परीक्षा मामले में हाईकोर्ट का अहम फैसला
इसी सुनवाई के दौरान अदालत ने एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में भी फैसला दिया। JSSC CGL परीक्षा को CBI जांच सौंपने की मांग से संबंधित याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने CGL परीक्षा परिणाम जारी करने का आदेश दे दिया। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि CGL परीक्षा में धांधली और अनियमितताएं हुई हैं, जिसके कारण इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपा जाए। याचिकाकर्ता पक्ष का दावा था कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं थी।
लेकिन अदालत ने सभी तर्कों को सुनने के बाद पाया कि CBI जांच की आवश्यकता नहीं है और मौजूदा स्तर पर जो जांच हुई है, वह पर्याप्त है। अदालत ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया को रोके रखना लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित करेगा। इसलिए परिणाम जारी किया जाए और भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़े।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
मुख्यमंत्री को मिली राहत के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष लंबे समय से ईडी समन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री को निशाने पर लेता रहा है। वहीं सत्तापक्ष इसे न्याय की जीत बताते हुए कह रहा है कि यह फैसला साबित करता है कि मुख्यमंत्री के खिलाफ दर्ज मामला राजनीतिक द्वेष का परिणाम है।
JSSC CGL मामले में परिणाम जारी होने के आदेश से लगभग 3 लाख अभ्यर्थियों में भी उत्साह बढ़ गया है। पिछले कई महीनों से परीक्षा विवादों में उलझी थी और रिजल्ट को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे उनके खिलाफ ईडी समन अवहेलना की कार्रवाई का दबाव कम हो गया है। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीबीआई जांच कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है और इसे तभी आदेशित किया जाता है जब प्रारंभिक जांच में गंभीर अनियमितता या कमियां पाई जाएं।
अब आगे क्या?
ट्रायल कोर्ट में मुख्यमंत्री की ओर से वकील उपस्थित रहेंगे और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ईडी मामले में आगे की सुनवाई के दौरान अदालत तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की दिशा तय करेगी। JSSC CGL मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग अब जल्द ही परिणाम जारी करेगा, जिसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।








