1 माह पहले सस्पेंड, अब बिरसा मुंडा जेल में मिली सहायक जेलर की कुर्सी

Birsa Munda Jail Assistant

हजारीबाग जेल में लापरवाही पर निलंबित दिनेश वर्मा को मिली नई पोस्टिंग, हालिया वीडियो विवाद के बीच नियुक्ति से उठे सवाल

रांची की बिरसा मुंडा जेल में नई नियुक्ति

रांची: झारखंड की सबसे बड़ी जेल बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा (होटवार) में एक बार फिर प्रशासनिक फेरबदल हुआ है।
राज्य सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने नये सहायक जेलर के रूप में दिनेश वर्मा की नियुक्ति की है। यह वही दिनेश वर्मा हैं जिन्हें महज एक माह पहले हजारीबाग जेपी केंद्रीय कारा से लापरवाही और गोपनीयता भंग करने के आरोप में निलंबित किया गया था।

गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना
गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है —

“कार्यहित में निलंबन मुक्त करते हुए दिनेश कुमार वर्मा, निलंबित सहायक कारापाल को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, रांची में सहायक कारापाल पद पर पदस्थापित किया जाता है।”

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अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि —

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“उनके विरुद्ध चल रही विभागीय जांच की कार्यवाही पर इस आदेश का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।”

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वीडियो वायरल के बाद हड़कंप
बिरसा मुंडा जेल पिछले महीने से सुर्खियों में रही है। यहां का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें शराब घोटाले के आरोपी विधु गुप्ता और जीएसटी घोटाले के आरोपी विक्की भालोटिया जेल के अंदर डांस करते दिखाई दिए थे। इस वीडियो के वायरल होने के बाद सरकार ने सहायक जेलर देवनाथ राम और जमादार विनोद कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।

वायरल वीडियो ने खोली जेल सिस्टम की पोल
झारखंड के सबसे बड़े जेल में इस तरह का वीडियो सामने आने के बाद सिस्टम की पारदर्शिता और निगरानी पर सवाल उठे। वीडियो में दोनों हाई-प्रोफाइल कैदी —

विधु गुप्ता, जो प्रिज्म होलोग्राफी कंपनी के एमडी हैं, उन पर नकली होलोग्राम आपूर्ति और शराब घोटाले में 90 करोड़ रुपये कमीशन घोटाले का आरोप है। विक्की भालोटिया, जो जुगसलाई (जमशेदपुर) के निवासी हैं, उन पर 14,325 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले और फॉरेस्ट लैंड डील में अनियमितता के आरोप हैं। वीडियो में इन दोनों को नाचते और जश्न मनाते देखा गया था, जिसके बाद कारा विभाग में हड़कंप मच गया था।

विवाद के बीच ‘सस्पेंडेड’ अफसर की वापसी
दिनेश वर्मा की बहाली ऐसे समय में की गई है जब जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठे हैं। एक माह पहले ही उन्हें हजारीबाग जेल में सुरक्षा और गोपनीयता की लापरवाही के लिए सस्पेंड किया गया था, लेकिन अब उन्हें राज्य की सबसे चर्चित जेल में सहायक जेलर का दायित्व सौंपा गया है। इस निर्णय को लेकर जेल विभाग और पुलिस प्रशासन के भीतर चर्चा और असंतोष दोनों देखने को मिल रहे हैं।

विभागीय सूत्रों के अनुसार
सूत्रों का कहना है कि दिनेश वर्मा के खिलाफ चल रही विभागीय जांच अभी समाप्त नहीं हुई है, लेकिन गृह विभाग ने यह नियुक्ति “कार्यहित में अस्थायी रूप से” की है। विभाग ने यह भी कहा है कि यदि जांच में दोष सिद्ध होता है तो
“तत्काल निलंबन या कार्रवाई की जाएगी।”

जेल में बढ़ती विवादों की फेहरिस्त
पिछले छह महीनों में बिरसा मुंडा जेल कई विवादों में घिर चुकी है —

  • शराब घोटाले से जुड़े आरोपी की जेल में पार्टी का वीडियो
  • VIP सुविधाओं की कथित आपूर्ति
  • जेल के अंदर मोबाइल और अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं मिलने की घटनाएँ
  • अब विवादास्पद अफसर की पुनर्नियुक्ति

इन घटनाओं के बाद झारखंड कारा प्रणाली पर सरकार के निगरानी तंत्र और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रशासन की सफाई
गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा —

“जेल प्रशासन में पदों की कमी और आवश्यक कार्य सुचारू रूप से चलाने के लिए अस्थायी नियुक्ति की गई है।
जांच के परिणाम के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।”

जनता में सवाल, सिस्टम में सन्नाटा
इस पूरे घटनाक्रम ने जनता के बीच यह सवाल खड़ा कर दिया है कि

“क्या झारखंड की जेल प्रणाली में जवाबदेही अब सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई है?”
राजनीतिक हलकों में भी यह मुद्दा अब उठने लगा है, क्योंकि हाल के महीनों में जेल प्रशासन की कार्यशैली पर लगातार विवाद और जांचें सामने आई हैं। लापरवाही और गोपनीयता भंग के आरोप में सस्पेंड अधिकारी की महज एक महीने में राज्य की सबसे संवेदनशील जेल में पोस्टिंग प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता पर सवाल उठाती है। बिरसा मुंडा जेल में दिनेश वर्मा की नई नियुक्ति अब विभागीय और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गई है।

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