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बिहार चुनाव 2025: 60% से ज्यादा वोटिंग का रिकॉर्ड, NDA या महागठबंधन—किसके हक में

Voting Record

पहले चरण में बंपर वोटिंग से सियासी पारा चढ़ा, 65 लाख मतदाता सूची से हटे, मतदाताओं के उत्साह पर नई बहस शुरू

रिकॉर्ड तोड़ मतदान ने चौंकाया सियासी गलियारा

पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण में मतदान ने सभी पूर्व रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। चुनाव आयोग के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, मतदान प्रतिशत 60% के पार पहुंच गया है, जो पिछले विधानसभा चुनाव 2020 के मुकाबले लगभग 5% अधिक है। यह बढ़ा हुआ वोट प्रतिशत अब राजनीतिक विश्लेषण का केंद्र बन गया है— क्या यह मतदाताओं की परिवर्तन की इच्छा को दर्शाता है या स्थिरता की चाहत को?

पहले चरण की वोटिंग में दिखा उत्साह
राज्य के 18 जिलों की 121 सीटों पर हुए मतदान में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही। ग्रामीण इलाकों में सुबह से लंबी कतारें लगी रहीं, जबकि शहरी इलाकों में दोपहर बाद वोटिंग ने रफ्तार पकड़ी। चुनाव आयोग के मुताबिक, कुल 2.25 करोड़ मतदाताओं में से 1.35 करोड़ से अधिक लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

क्या 60% वोटिंग ‘बदलाव’ का संकेत है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब भी बिहार में मतदान प्रतिशत बढ़ा है, तब सत्ता परिवर्तन की संभावना मजबूत हुई है। 2020 में 55.68% मतदान हुआ था और तब नीतीश कुमार की सरकार बमुश्किल सत्ता में लौटी थी। इस बार 60% से अधिक मतदान को कई लोग “Silent Wave” यानी मौन मतदाता के प्रभाव के रूप में देख रहे हैं।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का असर
इस चुनाव की खास बात यह भी रही कि वोटिंग से पहले हुई SIR प्रक्रिया (Special Intensive Revision) में करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए। चुनाव आयोग के अनुसार, यह प्रक्रिया “डुप्लीकेट या निष्क्रिय मतदाताओं” को हटाने के लिए की गई थी, लेकिन विपक्ष ने इसे “राजनीतिक साजिश” करार दिया।

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RJD प्रवक्ता ने कहा—

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“65 लाख नाम हटाना लोकतांत्रिक अधिकार पर प्रहार है। बढ़ी हुई वोटिंग से ये साफ़ है कि जनता अब जवाब देना चाहती है।”

वहीं, JDU नेता ने जवाब दिया—

“मतदाताओं की सूची को शुद्ध किया गया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। मतदान का उत्साह सरकार पर जनता के भरोसे का प्रतीक है।”

NDA बनाम महागठबंधन: बढ़ी वोटिंग का गणित
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में अधिक वोटिंग आमतौर पर विपक्ष के पक्ष में जाती है, जबकि शहरी और मध्यवर्गीय इलाकों में कम वोटिंग NDA के लिए राहत मानी जाती है। इस बार बढ़े मतदान का फायदा किसे मिलेगा, यह सीट-वार स्थिति पर निर्भर करेगा: उत्तर बिहार (दरभंगा, समस्तीपुर, मधेपुरा) में उच्च मतदान महागठबंधन के लिए फायदेमंद दक्षिण बिहार (पटना, भोजपुर, बक्सर) में मध्यम मतदान NDA के लिए संतुलित मोकामा, लखीसराय, सारण जैसे क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बेहद करीबी रही

महिलाओं ने फिर दिखाया दम
मतदान में महिलाओं की भागीदारी इस बार 62% तक पहुंची, जो पुरुषों के मुकाबले 3% अधिक रही। विशेषज्ञों के अनुसार, यह रुझान नीतीश कुमार के “महिला सशक्तिकरण” और RJD के “महंगाई-महिला मुद्दे” दोनों के असर को दर्शाता है।
यानी, महिला मतदाता अब बिहार की सियासत में निर्णायक भूमिका निभाने जा रही हैं।

मतदान के बाद माहौल: NDA आत्मविश्वास में, RJD दावा कर रही लहर का मतदान के तुरंत बाद दोनों खेमों ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए। तेजस्वी यादव ने कहा—

“बदलाव की लहर चल पड़ी है, जनता ने रोजगार और शिक्षा के मुद्दे पर वोट किया है।”

वहीं, सीएम नीतीश कुमार ने ट्वीट कर कहा—

“जनता ने विकास और स्थिरता पर भरोसा जताया है। पहले मतदान, फिर जलपान का संदेश सफल हुआ।”

विश्लेषकों की राय — “मतदाता का मूड समझना मुश्किल”
राजनीतिक विश्लेषक सुजीत सिन्हा कहते हैं—

“बढ़ी हुई वोटिंग हमेशा विपक्ष के हक में जाती है, लेकिन इस बार मतदाता वर्ग बहुत बंटा हुआ है।
NDA को महिला और बुजुर्ग मतों से राहत मिल सकती है, जबकि महागठबंधन को युवाओं और बेरोजगारी मुद्दे से फायदा।”

लोकतंत्र का पर्व, नतीजों का इंतजार
पहले चरण की वोटिंग के साथ ही बिहार की सियासी तस्वीर और दिलचस्प हो गई है। 60% से अधिक मतदान ने इस बार के चुनाव को पूरी तरह “ओपन कंटेस्ट” बना दिया है। अब सबकी निगाहें 8 दिसंबर को आने वाले नतीजों पर होंगी — क्या जनता “बदलाव” चुनती है या “स्थिरता”?

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