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सरकारी स्कूलों की परीक्षा को लेकर असमंजस, विकास आयुक्त करेंगे अहम बैठक

JAC vs Education Dept

8वीं, 9वीं और 11वीं की परीक्षा अब तक टली, सीएम के निर्देश पर तेज होंगी प्रक्रियाएँ

रांची: झारखंड के सरकारी स्कूलों में कक्षा 8वीं, 9वीं और 11वीं की परीक्षाएं अभी तक आयोजित नहीं हो पाई हैं, जिससे लाखों विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच गहरी चिंता बनी हुई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस गंभीर स्थिति पर तुरंत संज्ञान लेते हुए विकास आयुक्त को जैक और स्कूली शिक्षा विभाग के साथ उच्चस्तरीय बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। इसी बैठक में परीक्षा तिथि, पैटर्न और आयोजन की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी।

नीतिगत भ्रम का कारण—जैक और शिक्षा विभाग के प्रस्तावों में मतभेद
दो बार बदली गई जैक की कार्ययोजना, विभाग असमंजस में | इस वर्ष परीक्षा को लेकर स्थितियां इसलिए भी उलझी हुई हैं क्योंकि जैक (Jharkhand Academic Council) और शिक्षा विभाग आपस में सहमत नहीं हो पाए। 13 नवंबर को जैक ने विभाग को परीक्षा संबंधी एक कार्ययोजना भेजी थी, लेकिन विभाग ने कई सवाल पूछे। जवाब में जैक ने 22 नवंबर को एक नया प्रस्ताव भेज दिया, जिसमें अगले वर्ष परीक्षा को फिर से OMR शीट पर लेने की बात कही गई।

लगातार बदलती योजनाओं ने विभागीय अधिकारियों को असमंजस में डाल दिया है, जिसके कारण परीक्षाओं की तारीख तय नहीं हो पाई है। अब विकास आयुक्त की बैठक में दोनों पक्षों की आपत्तियों और प्रस्तावों पर अंतिम फैसला होगा।

अर्द्धवार्षिक परीक्षा न होने से छात्रों में बढ़ी चिंता
पिछले वर्ष भी नहीं हुई थी कई कक्षाओं की परीक्षा | यह पहली बार नहीं है जब इन कक्षाओं की परीक्षाएं समय पर नहीं हो रही हैं। पिछले वर्ष भी कक्षा 8, 9, 11 की अर्द्धवार्षिक परीक्षा और मैट्रिक–इंटर प्री–बोर्ड आयोजित नहीं किए जा सके थे। इससे विद्यार्थियों की तैयारी अप्रभावित रही और वार्षिक परीक्षा पर दबाव बढ़ गया। इस बार भी स्थिति वैसी ही दिख रही है। स्कूलों के शिक्षक भी स्पष्ट निर्देश और कैलेंडर का इंतजार कर रहे हैं ताकि पढ़ाई को पटरी पर लाया जा सके।

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शिक्षा विभाग का प्रस्ताव—सारा आयोजन विभाग करेगा
जैक ने किया विरोध, कहा– परीक्षा संचालन का अधिकार उसका है | शिक्षा विभाग चाहता था कि कक्षा 8, 9 और 11 की परीक्षा वह स्वयं आयोजित करे। इसके लिए विभाग ने एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया था, जिसमें—

  • अर्द्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षा दोनों
  • मैट्रिक और इंटर के प्री-बोर्ड को शामिल किया गया था।
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लेकिन जैक ने विभाग के प्रस्ताव का विरोध किया, यह कहते हुए कि परंपरागत तौर पर इन परीक्षाओं का आयोजन वही करता रहा है, इसलिए अधिकार उसके पास ही होना चाहिए। दोनों के बीच इसी मतभेद के कारण पिछले 10 दिनों में दो बार प्रस्ताव बदले गए और निर्णय लटक गया।

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16 दिसंबर से 1वीं से 7वीं तक की परीक्षा—लेकिन वरिष्ठ कक्षाओं में अनिश्चितता
अगर निर्णय हुआ तो दिसंबर में ही ली जा सकती है अर्द्धवार्षिक परीक्षा | राज्य में कक्षा 1 से 7 तक की परीक्षा 16 दिसंबर से प्रस्तावित है। लेकिन 8वीं, 9वीं और 11वीं की परीक्षा को लेकर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। शिक्षा विभाग का मानना है कि यदि विकास आयुक्त की बैठक में प्रस्ताव को स्वीकृति मिल जाती है, तो दिसंबर के अंतिम सप्ताह में ही वरिष्ठ कक्षाओं की अर्द्धवार्षिक परीक्षा ली जा सकती है। यह विद्यार्थियों के लिए राहत की बात होगी क्योंकि सत्र समाप्ति का समय नजदीक है।

विकास आयुक्त की बैठक में क्या होगा निर्णय?
परीक्षा पैटर्न, जिम्मेदारी और आयोजन की रूपरेखा तय होने की उम्मीद | आगामी बैठक में मुख्य बिंदु होंगे—

  • परीक्षा का संचालन विभाग करेगा या जैक
  • परीक्षा OMR आधारित होगी या लिखित
  • अर्द्धवार्षिक परीक्षा कब
  • वार्षिक परीक्षा का कैलेंडर
  • प्री-बोर्ड की स्थिति

चूंकि सीएम ने स्वयं हस्तक्षेप किया है, इसलिए माना जा रहा है कि बैठक के बाद राज्य में परीक्षा संबंधी सभी भ्रम खत्म हो जाएंगे और स्पष्ट समय-सारणी जारी की जाएगी।

विद्यार्थियों–अभिभावकों को जल्द मिलेगी राहत
निर्णय के बाद स्कूलों में पढ़ाई और तैयारी को नई दिशा मिलेगी | लगातार अनिश्चितता से परेशान विद्यार्थी अब राहत की उम्मीद कर रहे हैं। शिक्षक भी चाहते हैं कि परीक्षा संबंधी निर्णय तुरंत फाइनल हों ताकि पाठ्यक्रम पूरा कराने और पुनरावृत्ति की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू की जा सके।

विकास आयुक्त की बैठक का निर्णय राज्य के लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित करेगा। इसलिए सभी की निगाहें इसी बैठक पर टिकी हुई हैं।

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