मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत खत्म की — अब एमपी–एमएलए कोर्ट में पेशी लगभग तय
समन की अवहेलना से जुड़े मामले में राहत खत्म
रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जमीन घोटाले मामले में ईडी के समन का पालन नहीं करने को लेकर मिली अंतरिम राहत अब समाप्त हो गई है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें अंतरिम संरक्षण बढ़ाने की मांग की गई थी। जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि अब मुख्यमंत्री को एमपी–एमएलए कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। इस फैसले को राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर मुख्यमंत्री के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
जमीन घोटाले के समन से शुरू हुई पूरी कानूनी लड़ाई
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़गाईं अंचल स्थित जमीन की अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े कथित घोटाले में ईडी ने आरोपी मानते हुए अक्टूबर 2023 से जनवरी 2024 के बीच कुल 10 बार समन भेजा था। पहले सात समन पर उन्होंने जवाब नहीं दिया, जबकि आठवें और नौवें समन के दौरान उन्होंने इसे राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया। नौवें समन पर 20 जनवरी 2024 को वे ईडी के सामने पेश हुए, लेकिन 31 जनवरी को दसवें समन पर ईडी टीम ने मुख्यमंत्री आवास पर उनसे पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
समन की अवहेलना पर ईडी ने दायर किया शिकायतवाद
ईडी ने आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री ने लगातार समन की अवहेलना की, जो कानून के तहत दंडनीय है। इसी आधार पर एजेंसी ने एमपी–एमएलए की स्पेशल कोर्ट में उनके खिलाफ शिकायतवाद दायर कर दिया था। अदालत ने हेमंत सोरेन को व्यक्तिगत पेशी के निर्देश दिए, जिसके खिलाफ मुख्यमंत्री ने राहत की मांग करते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट ने उन्हें अंतरिम राहत देते हुए व्यक्तिगत पेशी से अस्थायी छूट प्रदान की थी। इसी अंतरिम राहत को अब अदालत ने खत्म कर दिया है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को बताया अनुचित
आज हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त अवधि तक अंतरिम राहत बनाए रखने की मांग की गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि इसके लिए कोई ठोस आधार नहीं दिया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि निचली अदालत का व्यक्तिगत पेशी का आदेश वैध है और उसे दरकिनार करने का कोई कारण नहीं दिखता। इसी के साथ अदालत ने अपने पुराने आदेश को समाप्त करते हुए मामले को एमपी–एमएलए कोर्ट के लिए खुला छोड़ दिया है।
अब मुख्यमंत्री को कोर्ट में पेशी की संभावना
हाईकोर्ट की इस सख्त टिप्पणी और राहत समाप्त होने के बाद अब मुख्यमंत्री को एमपी–एमएलए कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत की सख्ती इस ओर संकेत करती है कि अब मामले की सुनवाई तेज होगी और मुख्यमंत्री को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। यह वही मामला है जिसमें 31 जनवरी 2024 को उनकी गिरफ्तारी हुई थी, और गिरफ्तार होने से कुछ देर पहले उन्होंने राजभवन जाकर इस्तीफा भी दे दिया था।
गिरफ्तारी के बाद की राजनीतिक वापसी
गिरफ्तारी के बाद चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया गया था। इसी बीच, हेमंत सोरेन ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 28 जून 2024 को उन्हें ज़मानत मिल गई। ज़मानत मिलने के बाद उन्होंने फिर से मुख्यमंत्री पदभार संभाला और नवंबर 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत के साथ सत्ता में लौट आए। अब जब हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत हटा दी है, विपक्ष ने इसे सरकार पर कानूनी दबाव बढ़ने के रूप में पेश किया है जबकि झामुमो समर्थक इसे ‘कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा’ बता रहे हैं।
मामला फिर राजनीतिक रूप से गरमाएगा
इस फैसले ने झारखंड में राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है। भाजपा ने मुख्यमंत्री को कानून से भागने वाला बताते हुए इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। वहीं झामुमो और महागठबंधन इसे ‘ईडी का राजनीतिक हथियार’ बता रहा है। लेकिन तथ्य यह है कि कानूनी तौर पर मुख्यमंत्री अब व्यक्तिगत पेशी के लिए बाध्य हो सकते हैं, और इस कारण राज्य की राजनीति में एक बार फिर अस्थिरता की स्थिति बन सकती है।








