पूर्व DGP अनुराग गुप्ता–गैंगस्टर सुजीत सिन्हा गठजोड़ की जांच को लेकर लिखा विस्तृत पत्र

Jharkhand Crime Nexus

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने NIA से की बड़ी मांग


कुमार अमित
रांची: झारखंड की राजनीति रविवार को उस समय अचानक गर्म हो गई जब नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) महानिदेशक को एक विस्तृत पत्र लिखकर पूर्व पुलिस महानिदेशक अनुराग गुप्ता और कुख्या गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के बीच कथित गठजोड़ की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र और फोरेंसिक आधारित जांच की मांग की। मरांडी ने इसे “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा” बताया है।

मरांडी का आरोप— पूर्व DGP और आपराधिक गिरोह के बीच गहरी सांठगांठ
पत्र में मरांडी ने कहा कि झारखंड में वर्षों से सक्रिय एक संगठित अपराध नेटवर्क कोयलांचल शांति समिति (KSS) के नाम पर काम करता है, जिसे वे “एक मुखौटा, लेकिन संगठित आपराधिक सिंडिकेट” बताते हैं। उनके अनुसार यह गिरोह हत्या, रंगदारी वसूली, ठेकेदारी दबदबा, स्टोन चिप्स कारोबार नियंत्रण और अवैध हथियार व्यापार में लंबे समय से शामिल है।

मरांडी ने दावा किया कि सुजीत सिन्हा गिरोह और पूर्व DGP अनुराग गुप्ता के बीच संपर्क का दायरा इतना गहरा था कि यह अब राज्य और केंद्र— दोनों के लिए चिंता का विषय है।

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पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार आने का दावा, राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा
मेघालय से लेकर पंजाब तक विभिन्न एजेंसियों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए मरांडी ने लिखा किगैंगस्टर सुजीत सिन्हा का गिरोह पंजाब के मोगा जिले में ड्रोन से गिराए गए हथियार खरीद रहा था, जो कथित रूप से पाकिस्तान से भेजे गए थे।

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उन्होंने कहा कि यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक तंत्र से जुड़ा है, इस मामले में गैंगस्टर प्रिंस खान की भूमिका भी संदिग्ध है।ड्रोन हथियारों की खरीद सीधे भारत की संप्रभुता पर हमला बताते हुए मरांडी ने इस पूरे नेटवर्क को आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया।

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रिया सिन्हा की गिरफ्तारी और डिजिटल साक्ष्यों से खुला पेंच
सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा की हालिया गिरफ्तारी (UAPA के तहत) को मरांडी ने इस मामले का टर्निंग प्वाइंट बताया।
मिली जानकारी के मुताबिक रिया के फोन से कई डिजिटल डेटा और चैट्स बरामद हुए, जिनमें अनुराग गुप्ता से सीधे संपर्क के संकेत मिले हैं। रंगदारी वसूली और लेनदेन से जुड़े चैट के साथ गिरोह संचालन में उच्चस्तरीय संरक्षण के सुबूत मिले है । मरांडी ने कहा कि यह केवल अपराध नहीं, बल्कि सत्ता–अपराध गठजोड़ का खतरनाक नमूना है।

“KSS को DGP ने बनाया और चलाया”— मरांडी का गंभीर आरोप
पत्र में लिखा गया कि KSS कोई सामाजिक संस्था नहीं, बल्कि संगठित वसूली का नेटवर्क था , जिसे कथित तौर पर पूर्व DGP ने खड़ा किया था । वसूली गई राशि का प्रतिशत गुप्ता तक जाता था इसके बदले में गैंग को रणनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण मिलता था।

वे लिखते हैं कि पूरे गिरोह की डोर रांची से खिंचती थी, और इसका संचालन एक उच्चस्तरीय अधिकारी द्वारा निर्देशित था।

अमन साहू एनकाउंटर पर भी संदेह
मरांडी ने आरोप लगाया कि गैंगस्टर अमन साहू की मुठभेड़ एक सुनियोजित “रूट आउट” ऑपरेशन था, जिसका उद्देश्य गिरोह की आंतरिक प्रतिस्पर्धा खत्म करना और सुजीत सिन्हा के एकाधिकार को मजबूत करना था , और यह कथित रूप से अनुराग गुप्ता के इशारे पर हुआ। उन्होंने लिखा कि इस बिंदु की भी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

पुलिस रिकॉर्ड छुपाने के आरोप, कहा— जांच में बाधा डालने की कोशिश
पत्र में दावा किया गया है कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने रिया सिन्हा और अनुराग गुप्ता के बीच चैट रिकॉर्ड हटाने, कुछ डेटा ब्लॉक करने और फाइलों को रोके रखने का प्रयास किया

मरांडी ने इसे “न्याय में बाधा” बताया।
मरांडी ने कहा कि यह राज्य पुलिस के बस की बात नहीं, NIA जांच अनिवार्य पत्र के अंत में नेता प्रतिपक्ष ने लिखा कि अंतरराष्ट्रीय ड्रोन हथियार, पुलिस–गैंगस्टर गठजोड़, और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरे जैसे गंभीर मामलों की जांच केवल NIA कर सकती है। यह झारखंड ही नहीं, देश के हित में जरूरी है।

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