बरियातू सेना जमीन घोटाले की गूंज फिर तेज़ — रांची के पूर्व डीसी महिमापत रे पर एसीबी ने दर्ज की पीई
अमित
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में एक बार फिर बरियातू सेना जमीन घोटाले का भूत लौट आया है। राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने रांची के पूर्व उपायुक्त महिमापत रे पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry – PE) दर्ज की है।
एसीबी ने यह कदम उन गंभीर आरोपों के आधार पर उठाया है, जिनमें कहा गया है कि रांची के डीसी रहते हुए रे ने न केवल अपनी आय से अधिक संपत्ति बनाई, बल्कि उनके कार्यकाल में बरियातू की सेना भूमि से जुड़ा बड़ा फर्जीवाड़ा भी अंजाम दिया गया।
बरियातू सेना जमीन का मामला — भ्रष्टाचार का केंद्र
बरियातू की यह विवादित जमीन लंबे समय से झारखंड की सबसे हाई-प्रोफाइल ज़मीन घोटालों में गिनी जाती है। बताया जाता है कि यह भूमि रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) की अधीन थी, जिसे कथित रूप से निजी हाथों में ट्रांसफर कर दिया गया।
एसीबी और ईडी के रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2019 में रांची के डीसी महिमापत रे के कार्यकाल में फर्जी व्यक्ति जयंत करनाड को भूमि का असली मालिक बताकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 13 लोगों के नाम पर रजिस्ट्री कर दी गई। इन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अनुमोदन की प्रक्रिया भी कथित रूप से तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से हुई, जिससे पूरे घोटाले को सरकारी वैधता मिल गई।
ईडी की फाइलों में दर्ज है सच
इस जमीन घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले ही कर चुकी है। ईडी की चार्जशीट में यह स्पष्ट उल्लेख है कि बरियातू सेना जमीन का वास्तविक फर्जीवाड़ा महिमापत रे के कार्यकाल में हुआ था।
ईडी ने इसी घोटाले से जुड़े एक अन्य अधिकारी छवि रंजन (पूर्व डीसी, रांची) को पहले ही जेल भेजा है। लेकिन अब, एसीबी की जांच से यह साफ होता जा रहा है कि महिमापत रे की भूमिका इस पूरी साज़िश की कड़ी और शुरुआती कड़ी थी।
कैसे रची गई जमीन की साजिश
सूत्रों के अनुसार, 2019 में जयंत करनाड नामक व्यक्ति को एक फर्जी वारिस के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस व्यक्ति के नाम से कई दस्तावेज तैयार कराए गए, जिनमें सरकारी अधिकारियों के प्रमाणपत्र और सत्यापन रिपोर्ट तक शामिल थे।
इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर 13 खरीदारों के नाम पर रजिस्ट्री कर दी गई। रजिस्ट्री के बाद उस जमीन पर कई प्रोजेक्ट और निर्माण कार्यों की योजना भी बनी, जिससे करोड़ों रुपये के लेनदेन का सिलसिला शुरू हुआ।
एसीबी ने दर्ज की Preliminary Enquiry (PE)
राज्य की एंटी करप्शन ब्यूरो ने अब इस पूरे मामले में Preliminary Enquiry (PE) दर्ज करते हुए महिमापत रे की संपत्ति, बैंक खातों, जमीन निवेश और परिजनों के नाम से दर्ज संपत्तियों की जांच शुरू कर दी है।
सूत्रों का कहना है कि रे की कुल आय और संपत्ति के बीच “विसंगति का अनुपात 300% से अधिक” पाया गया है। एसीबी आने वाले दिनों में एफआईआर दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू कर सकती है।
बरियातू जमीन केस: एक नज़र में
वर्ष 2019 में जयंत करनाड के नाम फर्जी कागजात से रजिस्ट्री हुई , उस वक्त महिमापत रे रांची डीसी थे , 2021 में जब छवि रंजन रांची डीसी बने तब जमीन घोटाले में लेनदेन का कारोबार आगे बढ़ा। इस मामले में 2023 में ईडी ने छवि रंजन को गिरफ्तार किया। फिलहाल 2025 में एसीबी ने महिमापत रे के खिलाफ Preliminary Enquiry दर्ज की है जिसकी जांच अब शुरू होगी.
भ्रष्टाचार का सिंडिकेट या सिस्टम की कमजोरी?
बरियातू घोटाला यह साबित करता है कि झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था में अंदरूनी गठजोड़ कितना गहरा है। जमीन घोटाले केवल पैसे का नहीं, बल्कि राजनीति, सत्ता और पद की ताकत का खेल हैं।
महिमापत रे के खिलाफ एसीबी की कार्रवाई संकेत देती है कि अब राज्य सरकार “बड़े अफसरों के खिलाफ भी कठोर रुख” अपनाने के मूड में है।
बरियातू सेना जमीन घोटाला झारखंड के इतिहास का सबसे जटिल मामला है, जहां सत्ता, संपत्ति और सिस्टम तीनों की मिलीभगत ने कानून की नींव हिला दी। अब देखना यह है कि एसीबी की यह जांच केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर रह जाएगी या वाकई राज्य के “बड़े अफसरों की जवाबदेही” तय करेगी।








