चाईबासा में 10 नक्सलियों ने किया सरेंडर, सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का असर

Chaibasa Naxalite Surrender Chaibasa Naxalite Surrender

झारखंड सरकार की नीति से प्रभावित होकर माओवादी संगठन के 10 सक्रिय सदस्य हुए आत्मसमर्पण; पश्चिमी सिंहभूम में नक्सल आतंक को लगेगा बड़ा झटका

झारखंड: झारखंड सरकार के नक्सल विरोधी अभियान और आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का असर दिखने लगा है। 25 सितंबर को चाईबासा में भाकपा माओवादी संगठन से जुड़े 10 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें एक महिला नक्सली भी शामिल है।

सरेंडर करने वाले नक्सलियों की सूची
आत्मसमर्पण करने वालों में एरिया कमेटी सदस्य रांदो बोइपाई उर्फ कांति बोइपाई, दस्ता सदस्य गार्दी कोड़ा, जॉन उर्फ जोहन पुरती, नीरसो सिदू, घोनोर देवगम, गोमेया कोड़ा उर्फ टारजन, कैरा कोड़ा, कैरी कायम उर्फ गुलांची, प्रदीप सिंह मुंडा और महिला नक्सली सावित्री गोप उर्फ मुतुरी शामिल हैं।
महिला नक्सली सावित्री गोप की उम्र 18 वर्ष और अन्य की उम्र 20–22 वर्ष बताई जा रही है।

सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का असर
झारखंड सरकार ने नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए एक आकर्षक आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति बनाई है। इसके तहत आत्मसमर्पण करने वालों को पुनर्वास पैकेज, शिक्षा, रोजगार और जीवन-यापन के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है।

Adiwasi Mahotsav

पिछले 3 साल में 26 नक्सली सरेंडर
अधिकारियों के अनुसार नीति के बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार से बीते तीन सालों में अब तक 26 नक्सलियों ने हथियार डालकर मुख्यधारा में शामिल होने का रास्ता चुना है।

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पश्चिमी सिंहभूम में माओवादी गतिविधियों में कमी की उम्मीद
चाईबासा में हुए इस आत्मसमर्पण को राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियां एक बड़े झटके के रूप में देख रही हैं। इससे पश्चिमी सिंहभूम और आसपास के इलाकों में माओवादियों की गतिविधियों में कमी आने की उम्मीद है।

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