कैबिनेट में फूटा मंत्रियों का गुस्सा! वित्त विभाग पर फाइलें लटकाने का आरोप, कई विकास योजनाएं अटकीं
रांची: झारखंड सरकार की कैबिनेट बैठक में गुरुवार को उस समय तीखी चर्चा देखने को मिली, जब कई मंत्रियों ने वित्त विभाग की कार्यशैली पर खुलकर सवाल उठाए। नगर विकास एवं उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने आरोप लगाया कि वित्त विभाग में महीनों तक फाइलें लंबित रखी जाती हैं, जिससे विभिन्न विभागों की विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
मंत्रियों ने कहा- महीनों तक लटकती हैं फाइलें
कैबिनेट बैठक के दौरान मंत्रियों ने कहा कि वित्त विभाग के अधिकारी अक्सर अनावश्यक जानकारियां मांगते हैं और फाइलों को लंबे समय तक रोककर रखते हैं। उनका कहना था कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन उसके नाम पर विकास कार्यों को बाधित करना उचित नहीं है। समय पर राशि जारी नहीं होने से योजनाओं का क्रियान्वयन लगातार प्रभावित हो रहा है।
नगर विकास विभाग की परियोजनाओं पर असर
नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि उनके विभाग की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं वित्त विभाग में लंबित फाइलों के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। उन्होंने बताया कि आदित्यपुर, मानगो, जमशेदपुर, जुगसलाई और कपाली की सीवरेज एवं वेस्ट मैनेजमेंट परियोजनाएं, चास की सीवरेज योजना, दुमका, लोहरदगा, मधुपुर, मेदिनीनगर और सिमडेगा की लीगेसी वेस्ट मैनेजमेंट परियोजनाएं, 27 नगर निकायों की यूज्ड वाटर मैनेजमेंट योजना तथा सात नगर निकायों में पार्क निर्माण जैसी परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
रिम्स-2 को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने जताई नाराजगी
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कैबिनेट में रिम्स-2 परियोजना का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि कैबिनेट से 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी मिलने के बावजूद वित्त विभाग लगातार अतिरिक्त जानकारियां मांग रहा है, जिससे परियोजना की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। सूत्रों के अनुसार, वित्त विभाग ने स्वास्थ्य विभाग से पूछा है कि प्रस्तावित अस्पताल के संचालन के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य मानव संसाधनों की व्यवस्था कैसे की जाएगी। इसके अलावा परियोजना से जुड़े आठ से नौ अन्य बिंदुओं पर भी विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
ग्रामीण विकास विभाग की योजनाएं भी प्रभावित
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भी बैठक में अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बजट स्वीकृति और राशि जारी होने में देरी के कारण विभाग की कई योजनाएं समय पर लागू नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने बताया कि अबुआ आवास योजना के लंबित आवासों का निर्माण, जल छाजन योजना, सड़क निर्माण परियोजनाएं तथा अंबेडकर आवास योजना जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएं पर्याप्त राशि नहीं मिलने के कारण आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने दी सफाई
पूरे मामले पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि हर फाइल उनके पास नहीं आती और अधिकांश मामलों का निपटारा अधिकारियों के स्तर पर ही किया जाता है। उन्होंने कहा कि जो फाइलें उनके पास आती हैं, उन्हें वे जल्द से जल्द निपटाने का प्रयास करते हैं और विभागीय मंत्रियों के साथ उनका लगातार संवाद बना रहता है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारी वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए अतिरिक्त जानकारी मांगते होंगे, लेकिन किसी भी स्थिति में फाइलों के निस्तारण में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और समय-सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
सरकार के भीतर बढ़ी हलचल
कैबिनेट बैठक में सामने आई मंत्रियों की नाराजगी के बाद सरकार के भीतर विभागों के बीच समन्वय और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। एक ओर मंत्री विकास योजनाओं में तेजी लाने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वित्त विभाग वित्तीय अनुशासन का हवाला दे रहा है। अब देखना होगा कि सरकार लंबित फाइलों और अटकी परियोजनाओं को लेकर क्या ठोस कदम उठाती है और मंत्रियों की शिकायतों का समाधान कैसे करती है।






