आतंक पर बड़ा प्रहार! केंद्र सरकार ने UAPA के तहत 23 आतंकियों को किया घोषित

23 Terrorists Designated

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (UAPA) के तहत 23 संदिग्ध व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, ये सभी पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) सहित अन्य आतंकी नेटवर्क से जुड़े रहे हैं। इन पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करने, हथियारों और आतंकियों की घुसपैठ में मदद करने तथा आतंकी नेटवर्क को संचालित करने के आरोप हैं।

गृह मंत्रालय ने क्यों की यह कार्रवाई?
सरकार का कहना है कि इन व्यक्तियों की गतिविधियां भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के लिए गंभीर खतरा थीं। जांच एजेंसियों के पास उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इन्हें UAPA की संबंधित धाराओं के तहत व्यक्तिगत आतंकवादी (Individual Terrorist) घोषित किया गया है। इस कार्रवाई का उद्देश्य आतंकवादी संगठनों के नेतृत्व, वित्तीय नेटवर्क और भर्ती तंत्र पर प्रभावी कार्रवाई करना है।

जम्मू-कश्मीर में आतंक फैलाने का आरोप
गृह मंत्रालय के अनुसार, सूची में शामिल कई व्यक्ति पाकिस्तान या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से संचालित आतंकी संगठनों के लिए काम कर रहे थे। इन पर आतंकियों की भर्ती, हथियारों की आपूर्ति, घुसपैठ की साजिश, कट्टरपंथी प्रचार और जम्मू-कश्मीर में हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप हैं।

किन लोगों को आतंकवादी घोषित किया गया?
गृह मंत्रालय द्वारा जारी सूची में शामिल नाम इस प्रकार हैं:
मसूद इलियास कश्मीरी, मोहम्मद मुसादिक, मुफ्ती मुहम्मद असगर खान, हाफिज अब्दुल शकूर, अब्दुल्ला जेहादी, फिरदौस अहमद भट्ट, गुलाम फरीद, बिलाल अहमद मीर, आबिद कयूम लोन, नजीर अहमद गुज्जर, अब्दुल रऊफ, अशफाक अहमद, हाफिज खालिद, वलीद, मौलाना सैफुल्लाह खालिद, मोहम्मद याकूब, मौलाना यूसुफ तैबी, ओवैस फरूज, कारी याकूब शेख, राणा इफ्तिखार, वसीम नूर जाट, मोहम्मद शहीद फैसल, मौलाना इमदाद उल्लाह मक्की और हारून रशीद गनई।

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UAPA के तहत आतंकवादी घोषित होने का क्या मतलब है?
किसी व्यक्ति को UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद उसकी गतिविधियों पर कड़ी कानूनी निगरानी रखी जाती है। उसकी संपत्तियों को जब्त या फ्रीज किया जा सकता है, वित्तीय लेनदेन पर रोक लगाई जा सकती है और उसके खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) तथा अन्य सुरक्षा एजेंसियां सख्त कानूनी कार्रवाई कर सकती हैं। इसके अलावा ऐसे व्यक्तियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ट्रैक करने की प्रक्रिया मजबूत होती है।

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आतंकवाद के खिलाफ जारी है कार्रवाई
केंद्र सरकार लगातार आतंकवाद के वित्तीय और संगठनात्मक नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में कार्रवाई कर रही है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आतंकवादियों और उनके समर्थकों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि जम्मू-कश्मीर सहित देश के अन्य हिस्सों में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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