JPSC-JSSC धांधली पर CID का शिकंजा! 2 आरोपियों के घर छापा, वारंट के बाद भी फरार

JPSC JSSC Irregularities

पलामू: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं की जांच अब और तेज होती दिखाई दे रही है। अदालत के सख्त रुख के बाद जांच एजेंसियों ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई बढ़ा दी है। पलामू के दो आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद CID और पलामू पुलिस की संयुक्त टीम ने बुधवार को दो ठिकानों पर छापेमारी की। लेकिन कार्रवाई के दौरान दोनों आरोपी अपने-अपने घर से फरार मिले। इसके बाद पुलिस ने उनके परिजनों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि आरोपियों को जल्द न्यायालय में पेश कराया जाए, अन्यथा आगे कुर्की-जब्ती जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

हनुमान नगर और हमीदगंज में ताबड़तोड़ छापेमारी
संयुक्त जांच टीम ने पलामू शहर के हनुमान नगर और हमीदगंज में कार्रवाई की। पहली टीम हनुमान नगर स्थित कोचिंग संचालक रविशंकर कुमार के आवास पर पहुंची। वहीं दूसरी टीम ने हमीदगंज स्थित सरकारी शिक्षक संतोष कुमार सिंह के घर पर दबिश दी।

लेकिन दोनों ही स्थानों पर मुख्य आरोपी मौजूद नहीं मिले।
रविशंकर कुमार के घर पर उनके माता-पिता मौजूद थे, जबकि संतोष कुमार सिंह के आवास पर उनके ससुर मिले। पुलिस ने परिजनों को अदालत की ओर से जारी गैर-जमानती वारंट की जानकारी दी और दोनों आरोपियों को जल्द से जल्द न्यायालय में उपस्थित कराने का निर्देश दिया।

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पुलिस की दो टूक—अब कुर्की की तैयारी?
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के परिजनों को साफ तौर पर चेतावनी दी कि अगर आरोपी जल्द न्यायालय में पेश नहीं होते हैं तो उनके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। इसमें कुर्की-जब्ती जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। यानी जांच एजेंसियां अब सिर्फ पूछताछ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अदालत से जारी वारंट को लागू कराने के लिए आरोपियों की गिरफ्तारी पर पूरा जोर दे रही हैं।

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3 अगस्त की रेड में मिले थे डिजिटल सबूत
यह पहली बार नहीं है जब दोनों आरोपियों के ठिकानों पर जांच एजेंसियों ने कार्रवाई की है। इससे पहले 3 अगस्त की सुबह CID ने दोनों आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। उस दौरान जांच टीम ने कई संदिग्ध दस्तावेजों के साथ लैपटॉप, मोबाइल फोन और पेन ड्राइव समेत कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त किए थे। अब इन डिजिटल उपकरणों की जांच CID की फॉरेंसिक टीम कर रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि जब्त डिजिटल सामग्री से परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और आरोपियों के संपर्कों से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं।

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डिजिटल डेटा खोलेगा बड़े नेटवर्क का राज?
JPSC-JSSC विवाद में अब डिजिटल एविडेंस जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। मोबाइल, लैपटॉप और पेन ड्राइव से मिलने वाला डेटा जांच एजेंसियों को यह पता लगाने में मदद कर सकता है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में थे, परीक्षा से जुड़े किन लोगों से उनकी बातचीत हुई और कथित तौर पर परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक उनकी पहुंच कैसे बनी। अगर डिजिटल जांच में ठोस साक्ष्य मिलते हैं, तो इस मामले का दायरा और बढ़ सकता है।

रांची में कोचिंग चलाता है रविशंकर
जांच के अनुसार हनुमान नगर निवासी रविशंकर कुमार रांची में एक कोचिंग संस्थान चलाता है। यहां JPSC समेत विभिन्न राज्यस्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। वहीं दूसरा आरोपी संतोष कुमार सिंह नौडीहा बाजार प्रखंड में सरकारी शिक्षक के पद पर कार्यरत बताया जा रहा है। दोनों के खिलाफ परीक्षा प्रक्रिया में कथित सांठगांठ और अनियमितता से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच की जा रही है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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वारंट के बाद अब गिरफ्तारी का इंतजार
अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई और तेज हो गई है। दोनों आरोपियों के फरार मिलने के बाद पुलिस अब उनके संभावित ठिकानों और संपर्कों पर नजर रख रही है। साथ ही गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों की निगरानी भी जारी है। अब सबसे बड़ा सवाल है—

आखिर दोनों आरोपी कहां हैं?
क्या वे जांच एजेंसियों से बचने की कोशिश कर रहे हैं? और अगर डिजिटल डिवाइस से मिले सुरागों में कोई बड़ा नेटवर्क सामने आता है, तो क्या जांच का दायरा और बड़े नामों तक पहुंचेगा? JPSC-JSSC परीक्षा विवाद में पहले से ही कई गंभीर आरोपों की जांच चल रही है। ऐसे में पलामू में हुई यह कार्रवाई जांच के अगले चरण के तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

वारंट के बाद भी आरोपी फरार हैं और जांच एजेंसियों के हाथ में डिजिटल सबूत हैं। अब इन सबूतों से क्या खुलासा होता है, इस पर पूरे झारखंड की नजर रहेगी।

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