विकसित भारत के लिए पिछड़े राज्यों को प्राथमिकता जरूरी: राधाकृष्ण किशोर
नई दिल्ली: भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्य से जुड़े वित्तीय और आर्थिक मुद्दों को उठाया। “विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा के लिए वित्तपोषण” विषय पर यह सम्मेलन 18 और 19 सितंबर को आयोजित किया गया। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री तथा वित्त सचिव शामिल हुए। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में सम्मेलन में विकास के लिए वित्तीय संसाधनों और केंद्र-राज्य नीतिगत समन्वय पर चर्चा हुई।
पिछड़े राज्यों को विशेष सहयोग देने की बात
अपने संबोधन में राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक आंकड़ों में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को विशेष सहयोग और प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति आय, GDP, विनिर्माण उत्पादन और वित्तीय आंकड़ों के साथ-साथ समाज की वास्तविक आर्थिक और सामाजिक स्थिति को भी विकास के आकलन का आधार बनाया जाना चाहिए। वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में आय वितरण की असमानता और गरीबी जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना आवश्यक है।
कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा में निवेश पर जोर
राधाकृष्ण किशोर ने कृषि क्षेत्र में वित्तपोषण बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने सिंचाई, दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की बात कही। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा को भी विकास की प्राथमिकताओं में शामिल करने की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किए बिना देश के समग्र विकास का लक्ष्य हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के सम्मेलन में भी कृषि परिवर्तन के वित्तपोषण को प्रमुख विषयगत सत्रों में शामिल किया गया था। इसके अलावा व्यापक आर्थिक परिदृश्य और ऊर्जा परिवर्तन के वित्तपोषण पर भी चर्चा रखी गई थी।
झारखंड के आर्थिक हितों का मुद्दा उठाया
झारखंड के संदर्भ में वित्त मंत्री ने केंद्र की नीतियों और खनिज क्षेत्र से जुड़े बदलावों को लेकर राज्य के आर्थिक हितों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा नीतियों के कारण झारखंड को करीब 20,000 से 22,000 करोड़ रुपये तक की संभावित आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने खनिज क्षेत्र में हुए संशोधनों और कर नीतियों के कारण राज्य के राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े और आकलन वित्त मंत्री की ओर से सम्मेलन में रखे गए दावों के रूप में सामने आए हैं। वहीं उन्होंने झारखंड की वित्तीय स्थिति से जुड़े कुछ सकारात्मक पहलुओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य नीति आयोग की ‘अचीवर’ श्रेणी में शामिल है, राजस्व संग्रह मजबूत है, राजकोषीय घाटा नियंत्रित है और पूंजीगत व्यय का स्तर भी ऊंचा है।
केंद्र के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार के सामने झारखंड से जुड़े तीन प्रमुख मुद्दे उठाए। पहली मांग के तौर पर उन्होंने खनन पर सेस लगाने के अधिकार को पुनर्बहाल करने की मांग रखी। दूसरी मांग GST से हुई क्षति की भरपाई से संबंधित रही। तीसरी मांग के रूप में उन्होंने जी-राम-जी योजना में केंद्र और राज्य के बीच 90:10 के अनुपात को बहाल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्यों को वित्तीय रूप से मजबूत किए बिना विकसित भारत का लक्ष्य हासिल करना कठिन होगा। उनके अनुसार, राज्यों की आर्थिक क्षमता बढ़ने से विकास योजनाओं को जमीन पर लागू करने में मदद मिलेगी।
सम्मेलन में झारखंड का प्रतिनिधिमंडल
नई दिल्ली में आयोजित सम्मेलन में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के साथ राज्य के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए। प्रतिनिधिमंडल में वित्त सचिव प्रशांत कुमार, अपर सचिव कर्ण सत्यार्थी, संयुक्त सचिव चंद्रभूषण प्रसाद, मंत्री के आप्त सचिव अनिरबान आईच और नरेंद्र कुमार शामिल रहे। दो दिवसीय सम्मेलन का व्यापक उद्देश्य विकसित भारत की दिशा में केंद्र और राज्यों के बीच नीतिगत तालमेल, विकास के लिए वित्तीय संसाधनों की जरूरत और दीर्घकालिक वित्तपोषण की चुनौतियों पर चर्चा करना है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन में निजी वित्तपोषण, GST 2.0 के राज्यों पर प्रभाव, कृषि बाजारों के वित्तपोषण और ऊर्जा परिवर्तन जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जा रहा है।
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