चमोली टनल हादसे पर CM सोरेन चिंतित, बोले- विकास जरूरी लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं
झारखंड सरकार ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर















रांची/चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में निर्माणाधीन हाइड्रो प्रोजेक्ट की सुरंग में हुए हादसे ने झारखंड की भी चिंता बढ़ा दी है। परियोजना में झारखंड के कई श्रमिकों के काम करने की जानकारी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्माणाधीन सुरंगों में बार-बार हादसे होना और श्रमिकों के फंसने की खबरें बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास के साथ प्रकृति और पर्यावरण का भी ध्यान रखना होगा।
प्रकृति के अंधाधुंध दोहन पर CM ने जताई चिंता
हेमंत सोरेन ने कहा कि प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के गंभीर परिणाम लगातार सामने आ रहे हैं। इस तरह की घटनाएं हमें पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन को लेकर और अधिक सतर्क करती हैं। उन्होंने कहा कि विकास की प्रक्रिया में प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसके साथ पर्यावरणीय संतुलन और श्रमिकों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
















3.5 किमी लंबी टनल में 1.8 किमी अंदर हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार गुरुवार शाम करीब 7 बजे हाइड्रो प्रोजेक्ट की टनल के अंदर एक कैविटी से अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी बाहर आ गया। इसके बाद टनल में काम कर रहे मजदूर फंस गए। बताया जा रहा है कि 3.5 किलोमीटर लंबी टनल में करीब 1.8 किलोमीटर अंदर यह घटना हुई। सूत्रों के अनुसार टनल के अंदर ग्रेविटी पर पैकिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान तेज आवाज के साथ धमाका हुआ और पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा सुरंग के भीतर भर गया। हालांकि, हादसे के कारणों को लेकर आधिकारिक जांच के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।







SDRF-NDRF ने संभाला मोर्चा
घटना की जानकारी मिलते ही SDRF, NDRF, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया।टनल के अंदर फंसे श्रमिकों तक पहुंचने और मलबा हटाने का काम चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जारी है। राहत टीमों की प्राथमिकता फंसे हुए श्रमिकों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है।
हादसे में 7 मौतों की सूचना, 18 घायल
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसे में अब तक 7 मजदूरों की मौत की सूचना है, जबकि 18 मजदूर घायल बताए जा रहे हैं। वहीं कुछ श्रमिकों के अभी भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। हादसे में झारखंड के श्रमिकों के भी प्रभावित होने की खबर ने राज्य सरकार और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि झारखंड के कितने श्रमिक सुरंग के अंदर फंसे हैं, इसकी आधिकारिक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है।
झारखंड सरकार ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के उन लोगों से अपील की है, जिनके परिजन या परिचित इस परियोजना में काम करने गए हैं। उन्होंने कहा कि वे राज्य सरकार के कंट्रोल रूम से संपर्क कर श्रमिकों से जुड़ी जानकारी साझा करें।
टोल फ्री हेल्पलाइन
1800-3456-526
WhatsApp हेल्पलाइन
- 9470132591
- 9431336472
- 9431336427
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और झारखंड के हर श्रमिक की सुरक्षित वापसी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
परिजनों में बढ़ी बेचैनी
हादसे की खबर सामने आने के बाद झारखंड में उन परिवारों की चिंता बढ़ गई है, जिनके सदस्य उत्तराखंड की इस परियोजना में काम कर रहे हैं। परिजन अपने लोगों की स्थिति जानने के लिए लगातार जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर भरोसा न करें और श्रमिकों से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी के लिए जारी किए गए सरकारी कंट्रोल रूम से संपर्क करें।
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर बड़ा सवाल
चमोली हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े निर्माण और हाइड्रो प्रोजेक्ट्स के दौरान पर्यावरणीय सुरक्षा, प्राकृतिक भूगोल और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का संदेश साफ है—विकास जरूरी है, लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं। अब सबसे बड़ी प्राथमिकता टनल में फंसे हर श्रमिक को सुरक्षित बाहर निकालना है। साथ ही हादसे की वजह और सुरक्षा मानकों की भी विस्तृत जांच जरूरी होगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।






