लाल किले पर पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम’, आजादी के बाद बदलेगा स्वतंत्रता दिवस समारोह का इतिहास

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15 अगस्त 2026 को दिखेगा नया बदलाव

1950 में ‘जन गण मन’ को मिला राष्ट्रगान का दर्जा

नई दिल्ली: स्वतंत्रता दिवस 2026 का लाल किले का मुख्य समारोह इस बार एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। 15 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से पहले लाल किले पर ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति होगी। आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब लाल किले के मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति को शामिल किया जाएगा।

अब तक ‘वंदे मातरम’ क्यों नहीं था समारोह का हिस्सा?
‘वंदे मातरम’ भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में लंबे समय तक देशभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक रहा है। हालांकि, आजादी के बाद सरकारी समारोहों में इसके इस्तेमाल को लेकर अलग व्यवस्था रही। 1937 में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों** को सार्वजनिक कार्यक्रमों में इस्तेमाल करने का निर्णय लिया गया था। इसके आगे के छंदों में देवी दुर्गा और धार्मिक प्रतीकों के उल्लेख को लेकर उस दौर में विवाद सामने आया था। इसी वजह से सार्वजनिक और आधिकारिक कार्यक्रमों के लिए शुरुआती दो छंदों को ही प्राथमिकता दी गई।

1950 में ‘जन गण मन’ को मिला राष्ट्रगान का दर्जा
1950 में ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान और ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया गया। इसके बाद सरकारी समारोहों के प्रोटोकॉल में राष्ट्रगान को प्रमुख स्थान मिला। स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में भी ‘जन गण मन’ की अपनी निर्धारित भूमिका रही।

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15 अगस्त 2026 को दिखेगा नया बदलाव
अब 15 अगस्त 2026 को लाल किले पर समारोह की शुरुआत के महत्वपूर्ण हिस्से में ‘वंदे मातरम’ को भी आधिकारिक रूप से शामिल किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से पहले इसकी प्रस्तुति होगी। इसके बाद समारोह में परंपरा के अनुसार ‘जन गण मन’ भी शामिल रहेगा। यानी इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान दोनों की मौजूदगी देखने को मिलेगी।

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‘वंदे मातरम’ का ऐतिहासिक महत्व
‘वंदे मातरम’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से गहराई से जुड़ा हुआ है। इसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रीय चेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ का नारा और गीत देश के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलनकारियों के बीच उत्साह और एकजुटता का प्रतीक बना।

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लाल किले से जुड़ेगा नया अध्याय
लाल किला हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस के मुख्य राष्ट्रीय समारोह का केंद्र होता है। प्रधानमंत्री यहीं से देश को संबोधित करते हैं और राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। ऐसे में 15 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री के संबोधन से पहले ‘वंदे मातरम’ की प्रस्तुति को स्वतंत्रता दिवस समारोह के प्रोटोकॉल में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। इस बार लाल किले की प्राचीर से देशभक्ति के इस ऐतिहासिक गीत की गूंज और उसके बाद राष्ट्रगान की प्रस्तुति समारोह को एक अलग स्वरूप देगी।

एक समारोह, दो राष्ट्रीय प्रतीक
15 अगस्त 2026 के समारोह में ‘वंदे मातरम’ और ‘जन गण मन’ दोनों की प्रस्तुति के जरिए भारत की स्वतंत्रता यात्रा और राष्ट्रीय पहचान के दो महत्वपूर्ण प्रतीक एक साथ दिखाई देंगे। लाल किले से इस बार सिर्फ आजादी का उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के नए आधिकारिक समारोहिक अध्याय की शुरुआत भी देखने को मिलेगी।

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