खरगे के ‘शुद्धिकरण’ आरोप पर राज्यसभा में गरमाई सियासत
नई दिल्ली: उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद मंच के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर संसद के उच्च सदन में तीखी बहस देखने को मिली। खरगे ने राज्यसभा में इस घटना को अपने दलित होने से जोड़ते हुए इसे अपमानजनक बताया और कहा कि ऐसी सोच लोकतांत्रिक तथा संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। मामले पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने घटना पर खेद जताते हुए कहा कि यदि इस तरह की घटना हुई है तो उसकी जांच कराई जाएगी। हालांकि, उन्होंने खरगे द्वारा लगाए गए आरोपों को बिना जांच के भाजपा से जोड़ने पर आपत्ति जताई।
खरगे ने राज्यसभा में उठाया हल्द्वानी का मुद्दा
राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान खरगे ने हल्द्वानी में हुई जनसभा का जिक्र करते हुए कहा कि वह लंबे समय से संसद का हिस्सा हैं और उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को महत्व दिया है। खरगे के अनुसार, उन्होंने हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित किया था। उनके मुताबिक भाषण के दौरान उन्होंने किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की, बल्कि आम जनता से जुड़े मुद्दों और समस्याओं पर अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यक्रम से लौटने के बाद मंच पर हवन कराया गया और कथित तौर पर उसका ‘शुद्धिकरण’ किया गया।
‘मैं अपनी जाति को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाता’
खरगे ने सदन में कहा कि वह अपने दलित होने को सामान्यतः राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाते, लेकिन यदि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में उनके जाने के बाद मंच को कथित रूप से शुद्ध करने की कोशिश की जाती है तो यह केवल व्यक्तिगत अपमान का विषय नहीं रह जाता। उन्होंने छुआछूत और सामाजिक भेदभाव जैसी मानसिकता को संविधान की भावना के विपरीत बताया। खरगे ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी व्यक्ति की जाति के आधार पर उसके प्रति भेदभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई।
जेपी नड्डा ने कहा- भाजपा ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती
खरगे के आरोपों पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रतिक्रिया दी। नड्डा ने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस तरह की सामाजिक भेदभाव वाली गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में इस प्रकार की घटना हुई है तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और तथ्यों का पता लगाया जाएगा। हालांकि, नड्डा ने यह स्पष्ट किया कि बिना जांच के सीधे तौर पर भाजपा कार्यकर्ताओं या पार्टी को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले यह पता लगाया जाना चाहिए कि मंच पर वास्तव में क्या हुआ और इसके पीछे कौन लोग थे।
चेयरमैन बोले- खरगे का अपमान पूरे सदन का अपमान
मामले पर राज्यसभा के चेयरमैन ने भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि सदन के वरिष्ठ सदस्य और विपक्ष के नेता खरगे का अपमान होता है तो यह केवल एक व्यक्ति का विषय नहीं है, बल्कि पूरे सदन की गरिमा से जुड़ा मामला है। इस टिप्पणी के बाद खरगे ने कहा कि घटना को केवल व्यक्तिगत अपमान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, ऐसी घटनाएं संविधान में निहित समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों पर भी सवाल खड़े करती हैं।
सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी नोकझोंक
मुद्दे को लेकर राज्यसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच तीखी बहस हुई। कांग्रेस ने इसे सामाजिक भेदभाव और दलित सम्मान से जोड़कर गंभीर मामला बताया, जबकि भाजपा ने घटना की निष्पक्ष जांच की बात कही और बिना प्रमाण पार्टी को जिम्मेदार ठहराने पर आपत्ति जताई। इस पूरे विवाद में फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि हल्द्वानी में जनसभा के बाद मंच पर वास्तव में क्या हुआ था और कथित शुद्धिकरण की घटना के पीछे कौन लोग थे।
‘शुद्धिकरण’ विवाद ने फिर उठाए सामाजिक समानता के सवाल
हल्द्वानी की यह घटना अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर सामाजिक समानता और संवैधानिक मूल्यों की बहस का मुद्दा बन गई है। खरगे ने इसे जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए संविधान की भावना का सवाल उठाया है, जबकि भाजपा ने घटना की जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय करने की बात कही है।
ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले की राजनीतिक गूंज और बढ़ने की संभावना है। यदि जांच में खरगे के आरोपों की पुष्टि होती है तो मामला सामाजिक भेदभाव के गंभीर आरोपों तक पहुंच सकता है। वहीं, यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है तो राजनीतिक स्तर पर लगाए गए आरोपों को लेकर भी बहस तेज हो सकती है।






