छतरपुर में आधी रात सड़क पर उतरे वित्त मंत्री, कोयला लदे वाहनों की खुद की जांच

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अवैध कोयला परिवहन की सूचना पर मंत्री ने करमाकला इलाके में की वाहनों की जांच

पुलिस की मौजूदगी में आगे की कार्रवाई

पलामू: झारखंड के वित्त मंत्री और छतरपुर विधायक राधाकृष्ण किशोर ने सोमवार की देर रात छतरपुर में सड़क पर उतरकर कोयला लदे वाहनों की जांच की। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, मंत्री ने करमाकला पेट्रोल पंप के पास देर रात करीब 11 बजे से रात एक बजे तक वाहनों को रोककर उनके कागजात और लदे कोयले से संबंधित जानकारी की जांच की। मंत्री के सड़क पर उतरने की वजह छतरपुर के रास्ते बिहार की ओर कथित तौर पर अवैध कोयला परिवहन की सूचना बताई जा रही है। इसी सूचना के आधार पर उन्होंने खुद वाहनों की जांच शुरू की। एक स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई के दौरान चार कोयला लदे ट्रकों को अवैध पाए जाने का दावा किया गया, जिसके बाद छतरपुर थाना की पुलिस भी मौके पर पहुंची।

आधी रात को खुद वाहनों की जांच
राधाकृष्ण किशोर ने देर रात सड़क पर खड़े होकर कोयला लदे वाहनों की जांच की। इस दौरान वाहनों के कागजात, लोड और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल की गई। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार की देर रात की कार्रवाई में तीन ऐसे वाहनों को पकड़ा गया, जिनमें ओवरलोडिंग या जरूरी कागजात नहीं होने की बात सामने आई। इससे स्पष्ट है कि अलग-अलग रिपोर्टों में जब्त वाहनों की संख्या अलग बताई गई है। इसलिए अंतिम कार्रवाई, जब्ती और वाहन संख्या से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

पुलिस भी मौके पर पहुंची
मंत्री द्वारा वाहनों की जांच किए जाने के बाद छतरपुर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची। इसके बाद वाहनों को पुलिस की निगरानी में लिया गया और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात सामने आई है। पलामू जिले में अवैध खनन और खनिजों के परिवहन को लेकर प्रशासन पहले भी कार्रवाई करता रहा है। जिला खनन टास्क फोर्स की ओर से जुलाई 2026 में 96 वाहन जब्त किए जाने और 45.03 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूलने की जानकारी भी सामने आई थी।

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पहले भी अवैध खनन के खिलाफ सड़क पर उतरे थे मंत्री
राधाकृष्ण किशोर इससे पहले भी छतरपुर इलाके में अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सक्रिय रहे हैं। जून 2026 में छतरपुर थाना क्षेत्र के देवबंद पहाड़ पर उनके नेतृत्व में अवैध मोरम खनन के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट सामने आई थी। उस कार्रवाई के बाद पुलिस ने मौके से चार हाईवा और एक पोकलेन समेत कई वाहनों को जब्त किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार की ओर अवैध रूप से मोरम भेजे जाने की सूचना पर यह कार्रवाई की गई थी। इस कार्रवाई के बाद पलामू प्रशासन और अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे। हालांकि, ऐसे मामलों में संबंधित आरोपों और प्रशासनिक कार्रवाई को आधिकारिक जांच एवं दस्तावेजों के आधार पर ही अंतिम रूप से देखा जाना चाहिए।

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शशिभूषण मेहता भी उठा चुके हैं अवैध कोयला परिवहन का मुद्दा
पलामू में अवैध और ओवरलोड कोयला परिवहन का मुद्दा हाल के दिनों में राजनीतिक स्तर पर भी सामने आया है। पांकी विधायक डॉ. कुशवाहा शशिभूषण मेहता ने सितंबर में ओवरलोड कोयला लदे हाइवा को लेकर प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी। एक मामले में विधायक के अनुसार, बालूमाथ से पांकी की ओर आ रहे एक हाइवा में वजन कराने पर 64 टन कोयला पाया गया, जबकि उनके अनुसार सामान्य रूप से करीब 20 से 25 टन तक ही लोड होना चाहिए। वाहन को पुलिस के हवाले किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी। इसके बाद विधायक ने एक अन्य मामले में पुलिस अभिरक्षा से कथित तौर पर अवैध कोयला लदे डंपर के भागने का आरोप लगाया और पलामू एसपी से जांच एवं कार्रवाई की मांग की थी। यह आरोप विधायक की ओर से लगाया गया था और इसकी जांच की मांग की गई थी।

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अवैध कोयला परिवहन पर बढ़ी निगरानी
पलामू में खनिजों के अवैध खनन और परिवहन पर प्रशासनिक निगरानी बढ़ाने की बात सामने आती रही है। जिला प्रशासन की खनन टास्क फोर्स अवैध खनन, परिवहन और ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई की समीक्षा करती रही है। वहीं, केंद्र स्तर पर भी अवैध कोयला खनन, चोरी, भंडारण और परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जुलाई 2026 में PIB की एक विज्ञप्ति के मुताबिक CISF ने झारखंड और पश्चिम बंगाल में संयुक्त अभियानों के दौरान 428.34 मीट्रिक टन अवैध कोयला बरामद करने और कई वाहनों को जब्त करने की जानकारी दी थी। छतरपुर में वित्त मंत्री की देर रात की कार्रवाई ने एक बार फिर अवैध कोयला परिवहन को लेकर प्रशासनिक निगरानी और राजनीतिक हस्तक्षेप के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। अब आगे की कार्रवाई में जब्त वाहनों के दस्तावेज, कोयले के स्रोत और परिवहन से जुड़े कागजात की जांच महत्वपूर्ण होगी।

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