पाकिस्तान में पेट्रोल 1000 रुपये तक पहुंचने की चेतावनी, मंत्री बोले- सप्लाई टूटी तो बढ़ेगा संकट

Pakistan petrol price Rs 1,000

पाकिस्तान में महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका

इस्लामाबाद: ईरान युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों को लेकर चिंता और गहरा गई है। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने चेतावनी दी है कि अगर देश में ईंधन की सप्लाई बाधित होती है तो पेट्रोल की कीमत 1,000 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। हालांकि, उन्होंने इसे मौजूदा कीमत का पूर्वानुमान नहीं बताया, बल्कि संभावित ईंधन संकट की स्थिति में बनने वाली परिस्थिति के तौर पर रखा है। मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण काफी बढ़ चुकी है।

22 सितंबर से पेट्रोल 393.75 रुपये लीटर
पाकिस्तान सरकार ने 22 सितंबर 2026 से पेट्रोल की कीमत में 4.61 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इसके बाद पेट्रोल की कीमत 389.14 रुपये से बढ़कर 393.75 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं हाई-स्पीड डीजल की कीमत 1.96 रुपये घटकर 422.08 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। इससे पहले 19 सितंबर से 21 सितंबर के बीच पेट्रोल 389.14 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध था। यानी कुछ ही दिनों में कीमत में एक बार फिर बदलाव हुआ है।

‘सप्लाई बाधित हुई तो 1,000 रुपये तक जा सकता है पेट्रोल’
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने 20 सितंबर को लाहौर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर ईंधन की सप्लाई में गंभीर व्यवधान पैदा होता है तो पेट्रोल की कीमत 1,000 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल देश में ईंधन की कमी नहीं है। उनका बयान संभावित सप्लाई संकट की स्थिति को लेकर चेतावनी के तौर पर सामने आया है। मंत्री के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है और पाकिस्तान ने इस बढ़ोतरी का एक हिस्सा घरेलू बाजार में ट्रांसफर किया है।

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ईरान संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना बड़ा कारण
पाकिस्तान में ईंधन कीमतों पर दबाव का एक बड़ा कारण मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल आपूर्ति को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता है। होर्मुज दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से तेल और गैस की अंतरराष्ट्रीय सप्लाई, शिपिंग लागत और बीमा खर्च प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। पाकिस्तान अपनी घरेलू जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और परिवहन लागत में बढ़ोतरी का असर सीधे घरेलू ईंधन बाजार पर पड़ता है।

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पहले भी पेट्रोल 458 रुपये से ऊपर जा चुका
पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत हाल के महीनों में काफी ऊपर जा चुकी है। डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, 3 अप्रैल को पेट्रोल 458.41 रुपये प्रति लीटर के स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहा। हालिया घटनाक्रम में पाकिस्तान सरकार ने ईंधन की बढ़ती कीमतों से प्रभावित कुछ वर्गों को राहत देने के लिए सब्सिडी योजना भी शुरू की है। इसके तहत मोटरसाइकिल, रिक्शा और 800cc तक के वाहनों के पात्र उपयोगकर्ताओं को पेट्रोल पर प्रति लीटर राहत दी जा रही है।

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सरकार ने राहत योजना भी शुरू की
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने बढ़ती ईंधन कीमतों के असर को कम करने के लिए विशेष Fuel Relief Scheme शुरू की है। योजना के तहत पात्र दोपहिया और तिपहिया वाहन चालकों तथा 800cc तक के वाहनों के लिए सीमित मात्रा में पेट्रोल पर 100 रुपये प्रति लीटर की राहत का प्रावधान किया गया है। सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य महंगे पेट्रोल के कारण निम्न और मध्यम आय वर्ग पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है।

1,000 रुपये का आंकड़ा क्यों अहम है?
मौजूदा 393.75 रुपये प्रति लीटर से 1,000 रुपये तक पहुंचने का मतलब कीमत में करीब 155 फीसदी की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगा। लेकिन यह गणना केवल मंत्री द्वारा बताई गई संभावित संकट स्थिति को समझाने के लिए है। इसे पेट्रोल की निश्चित या घोषित भविष्य की कीमत नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक कीमत अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की दर, पाकिस्तान की मुद्रा, आयात लागत, टैक्स और लेवी, शिपिंग तथा घरेलू मूल्य निर्धारण व्यवस्था सहित कई कारकों पर निर्भर करेगी।

पाकिस्तान में महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका
ईंधन की कीमत बढ़ने का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता। परिवहन लागत बढ़ने के साथ खाद्य पदार्थों, सार्वजनिक परिवहन, माल ढुलाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव पड़ सकता है। पाकिस्तान पहले से ही महंगाई और ऊर्जा लागत के दबाव से जूझ रहा है। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें और बढ़ती हैं या आपूर्ति बाधित होती है, तो सरकार के सामने उपभोक्ताओं को राहत देने और अपने वित्तीय बोझ को नियंत्रित करने के बीच संतुलन की चुनौती बढ़ सकती है। फिलहाल पाकिस्तान सरकार का कहना है कि देश में तत्काल ईंधन की कमी नहीं है। लेकिन पेट्रोलियम मंत्री की 1,000 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचने की चेतावनी ने संभावित सप्लाई संकट और मध्य पूर्व के संघर्ष के आर्थिक प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

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