झारखंड DGP नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ा सवाल, रिटायरमेंट से एक दिन पहले तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर उठी आपत्ति
Ranchi: झारखंड की DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल न्याय मित्र (Amicus Curiae) की रिपोर्ट ने राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने अपनी रिपोर्ट में सवाल उठाया है कि सेवानिवृत्ति से महज एक दिन पहले तदाशा मिश्रा को DGP नियुक्त कर उन्हें दो साल का कार्यकाल देना सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में दिए गए निर्देशों के अनुरूप है या नहीं। मामले में सुप्रीम कोर्ट की अगली अहम सुनवाई 7 सितंबर 2026 को निर्धारित है।
रिटायरमेंट से एक दिन पहले बनी थीं DGP
तदाशा मिश्रा, जो 1994 बैच की IPS अधिकारी हैं, को झारखंड सरकार ने 30 दिसंबर 2025 को DGP नियुक्त किया था। उनकी सेवानिवृत्ति अगले ही दिन यानी 31 दिसंबर 2025 को होनी थी। Amicus Curiae राजू रामचंद्रन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसलों और बाद के निर्देशों के मुताबिक DGP पद के लिए विचार किए जाने वाले अधिकारी के पास कम से कम छह महीने की शेष सेवा होनी चाहिए। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में नियुक्ति से ठीक पहले इतनी सेवा अवधि उपलब्ध नहीं थी।
दो साल के कार्यकाल पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले में DGP को न्यूनतम दो साल का कार्यकाल दिए जाने की व्यवस्था का उल्लेख है, ताकि पुलिस प्रमुख को स्थिरता और स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिल सके। Amicus की रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि अगर कोई अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति से महज एक दिन पहले DGP नियुक्त होता है और उसे दो साल का कार्यकाल मिल जाता है, तो क्या ऐसी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित सिद्धांतों के अनुरूप मानी जा सकती है।
विवाद का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भूमिका से जुड़ा है। प्रकाश सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक राज्य सरकार को DGP पद के लिए UPSC द्वारा पैनल में शामिल किए गए वरिष्ठ अधिकारियों में से चयन करना होता है। लेकिन झारखंड सरकार ने DGP नियुक्ति के लिए अपने अलग नियम बनाए और उसी व्यवस्था के तहत चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाई। ([The Print][1]) Amicus Curiae ने राज्य के Selection and Appointment of DGP, Jharkhand Rules, 2025 की भी समीक्षा की है। रिपोर्ट में कुछ प्रावधानों पर सवाल और कुछ मामलों में अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की जरूरत बताई गई है।
झारखंड सरकार ने क्या कहा?
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने पक्ष में तदाशा मिश्रा की नियुक्ति को नियमों के अनुरूप बताया है। सरकार के मुताबिक, UPSC की ओर से नियमित DGP नियुक्ति के लिए पैनल उपलब्ध नहीं कराया गया था, जिसके बाद राज्य ने अपनी DGP चयन नियमावली तैयार की। सरकार का कहना है कि तदाशा मिश्रा की नियुक्ति चयन समिति की सिफारिश, वरिष्ठता, पात्रता और सेवा रिकॉर्ड को ध्यान में रखते हुए की गई थी। सरकार ने यह भी कहा है कि नियुक्ति किसी व्यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नहीं की गई।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
झारखंड सरकार ने DGP के चयन और नियुक्ति से संबंधित नए नियम बनाए थे। इन नियमों को लेकर सवाल उठने के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में पहुंचा। बाद में राज्य सरकार ने नियमों में संशोधन किया और इसके बाद तदाशा मिश्रा की नियुक्ति की गई। मामले में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की ओर से भी याचिका दाखिल की गई है, जिसमें राज्य की संशोधित DGP नियुक्ति व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले में निर्धारित दिशा-निर्देशों के खिलाफ बताया गया है।
7 सितंबर की सुनवाई पर नजर
सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 7 सितंबर 2026 को होगी। इससे पहले 2 सितंबर की सुनवाई में झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा था कि उन्हें Amicus Curiae की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके बाद मामले को आगे की सुनवाई के लिए 7 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया। अब सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवालों में तदाशा मिश्रा की नियुक्ति का तरीका, छह महीने की शेष सेवा से जुड़ा नियम, दो साल के कार्यकाल और DGP चयन में UPSC की भूमिका शामिल हैं। हालांकि अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।




