हजारीबाग में ₹381 करोड़ के जमीन सौदों पर IT की नजर, सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में 6 घंटे चला सर्वे

Hazaribagh Income Tax Survey

हजारीबाग: हजारीबाग स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में गुरुवार को आयकर विभाग की आपराधिक अन्वेषण शाखा, रांची की टीम ने करीब छह घंटे तक सर्वे किया। आयकर अधिकारियों के अनुसार, जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े करीब ₹381 करोड़ के लेनदेन में वित्तीय विसंगतियां सामने आई हैं। टीम ने जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े रिकॉर्ड के साथ-साथ आयकर विभाग को भेजे जाने वाले वित्तीय लेनदेन के विवरणों की भी जांच की। इस कार्रवाई के बाद जमीन के बड़े सौदों और उनकी रिपोर्टिंग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

चार साल से नहीं भेजी गईं कई SFT रिपोर्ट
सर्वे के दौरान आयकर विभाग की टीम को पता चला कि पिछले करीब चार वर्षों से ₹10 लाख से ₹30 लाख तक की जमीन खरीद से जुड़े कई Statement of Financial Transaction यानी SFT आयकर विभाग को नहीं भेजे गए थे। SFT के जरिए बड़े वित्तीय लेनदेन और संपत्ति की खरीद में इस्तेमाल धन की जानकारी आयकर विभाग तक पहुंचती है। इससे विभाग को यह पता लगाने में मदद मिलती है कि बड़े लेनदेन में इस्तेमाल धन का स्रोत क्या है। ऐसे में संबंधित रिपोर्ट उपलब्ध नहीं होने से वित्तीय लेनदेन की निगरानी और संभावित संदिग्ध धन के स्रोत की जांच प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

₹381 करोड़ के लेनदेन की जांच क्यों अहम?
आयकर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सर्वे में सामने आए करीब ₹381 करोड़ के जमीन संबंधी लेनदेन में वित्तीय विसंगतियों की जांच की जा रही है। यह जरूरी नहीं कि सामने आई हर विसंगति टैक्स चोरी या काले धन का प्रमाण हो। हालांकि, जब निर्धारित वित्तीय रिपोर्टिंग नहीं होती है, तो संबंधित लेनदेन की स्वतंत्र जांच और धन के स्रोत का सत्यापन जरूरी हो जाता है। यही वजह है कि आयकर विभाग ने रजिस्ट्री कार्यालय के रिकॉर्ड और विभाग को भेजे जाने वाले वित्तीय आंकड़ों के बीच अंतर की पड़ताल की।

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छह घंटे तक चली कार्रवाई
आयकर विभाग की टीम ने गुरुवार को करीब दोपहर 12 बजे से शाम 6 बजे तक सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में सर्वे किया। कार्रवाई में आयकर विभाग के डिप्टी डायरेक्टर एसएन कोंगाड़ी, आयकर अधिकारी संजीव दास और निरीक्षक राम अयोध्या कुमार शामिल रहे। टीम ने जमीन की खरीद-बिक्री से संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय रिपोर्टिंग से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की।

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DSR ने डेटा अपलोड नहीं होने की बात मानी
सर्वे के दौरान हजारीबाग के DSR यानी जिला सब-रजिस्ट्रार अधिकारी प्रेम कुमार ने भी आयकर विभाग को संबंधित डेटा अपलोड नहीं किए जाने की बात स्वीकार की। उन्होंने आयकर अधिकारियों को भरोसा दिया कि संबंधित डेटा को 20 दिनों के भीतर आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा। अब विभाग की नजर इस बात पर होगी कि निर्धारित समय के भीतर डेटा उपलब्ध कराया जाता है या नहीं और रिकॉर्ड की जांच के बाद कितनी वित्तीय विसंगतियां सामने आती हैं।

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अब आगे क्या करेगी आयकर विभाग की टीम?
सर्वे के बाद आयकर विभाग जमीन से जुड़े पुराने लेनदेन और उनकी रिपोर्टिंग की विस्तृत जांच कर सकता है। खासकर उन मामलों पर नजर होगी, जिनमें निर्धारित SFT रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। अगर जांच में किसी लेनदेन में आय छिपाने, गलत वित्तीय जानकारी देने या टैक्स नियमों के उल्लंघन के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई हो सकती है। फिलहाल ₹381 करोड़ के जमीन लेनदेन में सामने आई विसंगतियों और SFT रिपोर्टिंग की कमी ने हजारीबाग के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय को आयकर विभाग की जांच के केंद्र में ला दिया है।

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