नामकुम जमीन घोटाले में ACB की जांच तेज, रिकॉर्ड रूम से मिले अहम दस्तावेज; पूर्व CO श्वेता वर्मा की तलाश
Ranchi : रांची के नामकुम अंचल में जमीन के रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ और डबल म्यूटेशन के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जांच तेज कर दी है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद दर्ज FIR के सिलसिले में ACB की टीम नामकुम अंचल कार्यालय पहुंची और जमीन से जुड़े रोकड़ रुम और अन्य अभिलेखों की जांच की। जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है। ACB अब यह पता लगाने में जुटी है कि करीब 1.22 एकड़ जमीन का डबल म्यूटेशन किस आधार पर किया गया और रिकॉर्ड में कथित बदलाव किस स्तर पर हुआ। जांच के दायरे में तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी है।
रिकॉर्ड रूम में खंगाले गए पुराने दस्तावेज
ACB की टीम ने नामकुम अंचल कार्यालय में जमीन से संबंधित पंजी और दूसरे राजस्व दस्तावेजों की जांच की। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि संबंधित जमीन की जमाबंदी और म्यूटेशन की प्रक्रिया किस आधार पर पूरी की गई थी।
जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों के आधार पर रिकॉर्ड में कथित बदलाव की पूरी कड़ी को समझने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि प्रक्रिया में कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं।
तीन तत्कालीन अधिकारी आरोपी
इस मामले में तत्कालीन CO श्वेता वर्मा, तत्कालीन अंचल निरीक्षक मनोज कुमार और तत्कालीन अंचल निरीक्षक दीपक कुमार को आरोपी बनाया गया है। ACB ने मामले में केस नंबर 18/26 दर्ज किया है। जांच एजेंसी मामले से जुड़े तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ करने के साथ-साथ दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जुटा रही है।
पूर्व CO श्वेता वर्मा से पूछताछ की तैयारी
ACB तत्कालीन CO श्वेता वर्मा की भूमिका की भी जांच कर रही है। उनसे पूछताछ के लिए एजेंसी की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ है और वह फिलहाल अपने बताए गए ठिकाने पर नहीं मिली हैं। ACB संभावित ठिकानों के बारे में जानकारी जुटा रही है। हालांकि, श्वेता वर्मा की भूमिका और मामले में उनकी जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
1.22 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी का आरोप
मामला धुर्वा थाना क्षेत्र के डुंडू गांव स्थित खाता नंबर 32 के प्लॉट नंबर 776, 820, 821 और 822 से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित जमीन के रिकॉर्ड में कथित छेड़छाड़ कर प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम जमाबंदी कायम की गई। करीब 1.22 एकड़ जमीन के म्यूटेशन और डिमांड खोलने में भी अनियमितता का आरोप लगाया गया है। परिवादी के अनुसार, उनकी मां ने अलग-अलग पंजीकृत विक्रय विलेखों के जरिए कुल 5.93 एकड़ जमीन खरीदी थी। उनकी मृत्यु के बाद परिवार में बंटवारा हुआ और परिवादी ने खुद को संबंधित जमीन का वैध उत्तराधिकारी बताया।
डबल जमाबंदी के नोटिस से शुरू हुआ विवाद
परिवादी के मुताबिक, 17 अगस्त 2016 को उन्हें अंचल कार्यालय से डबल जमाबंदी से संबंधित नोटिस मिला। इसके बाद अंचल कार्यालय में जानकारी लेने पर संबंधित जमीन के एक हिस्से पर प्रथम प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से नई जमाबंदी कायम होने की जानकारी मिली। इसके बाद विवाद राजस्व अधिकारियों के समक्ष पहुंचा और आगे न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई। हाईकोर्ट के आदेश के बाद ACB ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।
कंपनी निदेशक ने आरोपों को बताया गलत
मामले में प्रथम प्रकाश कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक चंद्रप्रकाश धेलिया ने जमीन से जुड़ी किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। उनका कहना है कि कंपनी ने 2009 में वैध दस्तावेजों के आधार पर जमीन खरीदी थी। उनके अनुसार, वर्ष 2010 में जमीन की बाउंड्री कराई गई और इसके बाद रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हुई। उन्होंने दावा किया कि 2011-12 में म्यूटेशन कराया गया और ऑनलाइन लगान भी जमा किया गया, जो 2021 तक चलता रहा।
चंद्रप्रकाश धेलिया के मुताबिक, कोरोना काल के दौरान विपक्षी पक्ष की ओर से एलआरडीसी के यहां मामला दाखिल किया गया था। उनका दावा है कि नोटिस नहीं मिलने के कारण वहां से म्यूटेशन रद्द कर दिया गया। इसके बाद कंपनी ने डीसी कोर्ट में अपील की, जहां सुनवाई के बाद म्यूटेशन कायम रखने का आदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि जमीन से संबंधित मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और कंपनी ACB की जांच में पूरा सहयोग करेगी।
अब ACB के सामने कई सवाल
ACB की जांच में अब मुख्य तौर पर यह पता लगाया जा रहा है कि जमीन की दूसरी जमाबंदी किस आधार पर कायम हुई, म्यूटेशन की प्रक्रिया में किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका थी और रिकॉर्ड में कथित बदलाव कब और कैसे किया गया। जांच एजेंसी दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।






