स्वतंत्रता दिवस पर विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो का संदेश, बोले- लोकतंत्र सिर्फ चुनाव नहीं, संविधान की सर्वोच्चता भी जरूरी

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रांची: 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झारखंड विधानसभा परिसर में विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस मौके पर उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास, लोकतंत्र की मजबूती, संविधान की सर्वोच्चता और समावेशी विकास को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आजादी केवल विदेशी शासन से मुक्ति का नाम नहीं, बल्कि हर नागरिक को सम्मान के साथ जीवन जीने और अपने भविष्य को तय करने का अधिकार देने की जिम्मेदारी भी है। अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष ने महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और नेताजी सुभाष चंद्र बोस सहित देश के तमाम स्वतंत्रता सेनानियों को याद किया। उन्होंने झारखंड के वीर सपूतों बाबा तिलका मांझी, सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो और भगवान बिरसा मुंडा के संघर्ष और बलिदान को भी नमन किया।

आजादी किसी एक व्यक्ति के संघर्ष का परिणाम नहीं
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता किसी एक व्यक्ति, संस्था या क्षेत्र के संघर्ष का परिणाम नहीं थी। देश के अलग-अलग हिस्सों में स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने-अपने स्तर पर संघर्ष किया और बलिदान दिया। इन सामूहिक प्रयासों ने आजादी की राह तैयार की। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को राजनीतिक स्वतंत्रता हासिल होने के साथ ही राष्ट्र निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी भी देश के सामने आई। स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होगा, जब समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर, सम्मान और न्याय उपलब्ध हो।

लोकतंत्र सिर्फ चुनाव और मतदान तक सीमित नहीं
विधानसभा अध्यक्ष ने लोकतंत्र की व्यापक भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को केवल चुनाव और मतदान तक सीमित नहीं किया जा सकता। उनके मुताबिक लोकतंत्र के लिए संविधान की सर्वोच्चता, लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा, कानून का शासन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, असहमति का सम्मान और नागरिकों के प्रति जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने विधानसभा को जनता की आकांक्षाओं, समस्याओं, अपेक्षाओं और असहमति को संवैधानिक रूप से सामने रखने का महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि सरकार और विपक्ष की राजनीतिक भूमिकाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन संविधान और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के प्रति दोनों की प्रतिबद्धता समान होनी चाहिए।

विकास के साथ सामाजिक समता भी जरूरी
रबींद्र नाथ महतो ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक समानता के बावजूद सामाजिक और आर्थिक असमानता लोकतंत्र के सामने बड़ी चुनौती बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि समानता का अर्थ सभी नागरिकों को समान संवैधानिक अधिकार देना है, जबकि समता का मतलब उन वर्गों और समुदायों को आगे बढ़ने के लिए जरूरी अवसर और सहयोग देना भी है, जो लंबे समय से पीछे रह गए हैं। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। केवल आर्थिक विकास के आंकड़े पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि विकास का असर आम लोगों के जीवन में दिखाई देना चाहिए।

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शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य को बताया प्राथमिकता
अपने संबोधन में उन्होंने भारत के अगले विकास चरण की चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि तेज आर्थिक विकास को अधिक समावेशी और न्यायपूर्ण विकास में बदलना समय की जरूरत है। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य और पोषण, युवाओं के लिए रोजगार, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और उत्पादक कृषि को मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने छोटे उद्यमों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि युवाओं को केवल रोजगार तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनाने की दिशा में भी नीतियां तैयार करनी होंगी। वहीं महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना भी राज्य और देश के समग्र विकास के लिए जरूरी है।

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झारखंड की खनिज संपदा का लाभ स्थानीय लोगों को मिले
झारखंड के संदर्भ में विधानसभा अध्यक्ष ने खनिज और प्राकृतिक संसाधनों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य की खनिज संपदा से पैदा होने वाली आर्थिक शक्ति का लाभ स्थानीय समाज और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से संथाल क्षेत्र के विकास को लेकर कहा कि विकास को केवल सड़क और भवन निर्माण तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। क्षेत्र के लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, कौशल विकास और स्थानीय रोजगार के अवसर मिलना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने कृषि और वनोपज को उचित बाजार एवं मूल्य उपलब्ध कराने तथा महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर पैदा करने पर भी जोर दिया।

संथाल क्षेत्र के समग्र विकास पर जोर
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों का विकास स्थानीय जरूरतों और संसाधनों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने कृषि, वनोपज, स्थानीय उद्योग और पारंपरिक कौशल को मजबूत करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय लोगों को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक अवसर मिलते हैं, तो पलायन जैसी समस्याओं को भी कम किया जा सकता है।

संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का आह्वान
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर विधानसभा अध्यक्ष का संबोधन लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और झारखंड के समावेशी विकास पर केंद्रित रहा। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए कहा कि उनके सपनों का भारत और झारखंड बनाने की जिम्मेदारी आज की पीढ़ी की है। उन्होंने नागरिकों से संविधान में निहित मूल्यों को मजबूत करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि **विकास तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

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