झारखंड कोषागार घोटाला: IPS अधिकारी भी रडार पर, 14 जिलों में फैला शक
दरोगा-सिपाही से बढ़कर अब बड़े अधिकारियों तक पहुंची जांच, CID की कार्रवाई तेज
रांची : झारखंड में सामने आए कोषागार घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके नए और चौंकाने वाले पहलू सामने आ रहे हैं। अब तक यह मामला दरोगा और सिपाही स्तर तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन जांच की रफ्तार बढ़ते ही अब कई आईपीएस अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। सूत्रों के अनुसार, राज्य के करीब 14 जिलों के एसपी स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े स्तर पर कार्रवाई हो सकती है।
14 जिलों तक फैला घोटाले का दायरा
बोकारो ट्रेजरी से घोटाले का खुलासा होने के बाद जब जांच शुरू हुई, तो शुरुआती तौर पर मामला सीमित नजर आ रहा था। लेकिन जैसे-जैसे दस्तावेज खंगाले गए, यह घोटाला 30 करोड़ रुपये से अधिक का हो गया। इसके बाद सरकार ने सभी कोषागारों की जांच का आदेश दिया। जांच शुरू होते ही यह मामला केवल बोकारो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब 14 जिलों तक फैल गया है। इन जिलों में सिपाही से लेकर आईपीएस अधिकारी तक पर गलत तरीके से पैसे निकालने का संदेह जताया जा रहा है।
एसपी के नाम पर खाते खोलकर हुआ भुगतान
जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि कई जिलों में एसपी के पदनाम से बैंक खाते खोले गए थे। इन खातों में सीधे कोषागार से भुगतान किया जाता था। नियम के अनुसार, जिस व्यक्ति के नाम से बिल बनाया जाता है, भुगतान उसी के खाते में होना चाहिए। लेकिन इस मामले में नियमों को दरकिनार कर सीधे एसपी के खाते में पैसे ट्रांसफर किए गए।
इसके बाद इन पैसों का भुगतान एसपी द्वारा अपने स्तर से किया जाता था, जिससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
2016-17 में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी
जांच में यह भी सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन करते हुए भुगतान किए गए। जमशेदपुर में करीब 38 लाख रुपये के संदिग्ध भुगतान की जानकारी सामने आई है। वहीं अन्य जिलों में भी करोड़ों रुपये के लेनदेन की आशंका जताई जा रही है। अब एजी और वित्त विभाग की टीम इस पूरे मामले की तह तक जाने में जुटी हुई है।
CID की जांच और गिरफ्तारी
इस घोटाले की जांच सीआईडी द्वारा की जा रही है। जांच के दौरान बोकारो से लेकर हजारीबाग तक कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं। सीआईडी ने इस मामले में एक जवान को गिरफ्तार कर जेल भेजा है, लेकिन अब जांच का दायरा बढ़ने के बाद और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की कोशिश
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि बोकारो में पुलिस विभाग के कुछ सिस्टम से जुड़े रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई है। रिकॉर्ड और बैंक डेटा को बदलने या हटाने की कोशिश की गई, जिससे जांच प्रभावित हो सके। इससे यह सवाल उठने लगा है कि इस घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसमें कितने बड़े अधिकारी शामिल हो सकते हैं।
हजारीबाग में CID की कार्रवाई
इधर हजारीबाग में भी सीआईडी की टीम सक्रिय हो गई है। टीम ने लोहसिंघना थाना पहुंचकर अब तक की जांच से जुड़े दस्तावेज जब्त किए और अधिकारियों से पूछताछ की। बताया जा रहा है कि इस केस की जांच के लिए गठित विशेष SIT आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे कर सकती है।
अब तक निचले स्तर तक सीमित कार्रवाई
अब तक इस मामले में केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी हुई है। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे बड़े अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घोटाला जितना दिख रहा है, उससे कहीं अधिक बड़ा हो सकता है और आने वाले समय में कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
झारखंड का कोषागार घोटाला अब एक बड़े प्रशासनिक और वित्तीय घोटाले के रूप में सामने आ रहा है। जांच की दिशा यह संकेत दे रही है कि इसमें केवल छोटे कर्मचारी ही नहीं, बल्कि उच्च पदस्थ अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। अब सभी की नजर सीआईडी जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है, जो इस घोटाले की पूरी तस्वीर सामने ला सकती है।






