खनन सेस पर बड़ा फैसला? CM हेमंत सोरेन आज मंत्रियों के साथ करेंगे अहम बैठक

Mining Cess Jharkhand

शाम 4:30 बजे प्रोजेक्ट बिल्डिंग में होगी बैठक, खनिज से होने वाली आय

केंद्र के नए विधेयक और ओवरलोडिंग से राज्य को हो रहे नुकसान पर बनेगी रणनीति

रांची: झारखंड में खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकार और राज्य के राजस्व को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच जारी खींचतान के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सोमवार को मंत्रियों के साथ अहम बैठक करेंगे। बैठक शाम 4:30 बजे प्रोजेक्ट बिल्डिंग में प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि बैठक में खनन सेस समेत राज्य से जुड़े कई ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी। बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब खनिजों पर सेस लगाने के राज्य के अधिकार को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज है। राज्य सरकार का तर्क है कि खनिज संपदा से होने वाली आय झारखंड के विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

खनन सेस के मुद्दे पर केंद्र के फैसले से बढ़ी चिंता
राज्य सरकार के अनुसार, खनिजों पर लगाए गए सेस से झारखंड को सालाना करीब 13 हजार करोड़ रुपये की आमदनी होती है। ऐसे में सेस से जुड़े अधिकारों में बदलाव को राज्य के राजस्व के लिहाज से बड़ा मुद्दा माना जा रहा है। राज्य सरकार की चिंता सिर्फ नए सेस को लेकर नहीं है। केंद्र की ओर से पारित विधेयक में पहले लगाए गए सेस की वसूली पर भी रोक का प्रावधान होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में राज्य सरकार के सामने यह सवाल है कि भविष्य में खनिज संसाधनों से राजस्व जुटाने की उसकी क्षमता पर इसका कितना असर पड़ेगा।

ccl.psd
Cambrian public school
RKDF University
Sarla Birla school

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मिला था सेस लगाने का अधिकार
खनिजों पर सेस लगाने के अधिकार को लेकर झारखंड सरकार और केंद्र के बीच लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। वर्षों तक चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के खनिजों पर सेस लगाने के अधिकार को लेकर फैसला दिया था। इसके बाद झारखंड सरकार ने खनिजों पर सेस लगाकर उसकी वसूली शुरू की। अब केंद्र के नए विधायी कदम के बाद राज्य सरकार इस पूरे मामले को लेकर अपनी आगे की रणनीति पर विचार कर रही है। सोमवार की बैठक में इस कानूनी और आर्थिक स्थिति के साथ-साथ राज्य के राजस्व हितों की रक्षा के लिए उठाए जाने वाले संभावित कदमों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

Vedanta iron steel
dipika pandey sing
15 Aug 2026 poat Ads Ramgarh
रमेश सिंह
Dulari Son

ओवरलोडिंग से हर साल ₹1,500 करोड़ नुकसान का दावा
खनन सेस के अलावा बैठक में खनिज परिवहन में कथित ओवरलोडिंग का मुद्दा भी अहम हो सकता है। राज्य सरकार की ओर से केंद्रीय लोक उपक्रमों द्वारा की जा रही कोयला ढुलाई और खनिज विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध चालानों का विश्लेषण किया गया है। सरकार के मुताबिक, विश्लेषण में सामने आया कि केंद्रीय लोक उपक्रमों द्वारा कोयले की ढुलाई में ओवरलोडिंग के कारण झारखंड को हर साल कम से कम 1,500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। राज्य के खान विभाग ने ओवरलोडिंग के मामलों में कानून के तहत निर्धारित दंड की राशि वसूलने के लिए परिवहन विभाग से कार्रवाई का अनुरोध किया है।

munadi live whattsapp banne.jpg

खनिज संपदा और राज्य के राजस्व पर सरकार की नजर
झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है। कोयला, लौह अयस्क समेत कई खनिज राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में खनिजों से मिलने वाले राजस्व और राज्य के अधिकार का मुद्दा सरकार के लिए राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री की मंत्रियों के साथ होने वाली बैठक में इस बात पर भी चर्चा हो सकती है कि खनिज संसाधनों से राज्य को मिलने वाले राजस्व को कैसे सुरक्षित रखा जाए और कथित राजस्व नुकसान को रोकने के लिए कौन-कौन से प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।

resizone elanza

Telegram channel

केंद्र-राज्य विवाद के बीच अहम मानी जा रही बैठक
खनिजों पर सेस के अधिकार को लेकर केंद्र और झारखंड सरकार के बीच पहले से ही राजनीतिक बयानबाजी होती रही है। अब केंद्र के नए विधायी कदम के बाद राज्य सरकार के सामने आगे की रणनीति तय करने की चुनौती है। ऐसे में सोमवार की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, बैठक में कौन-कौन से अंतिम फैसले लिए जाएंगे, इसकी आधिकारिक जानकारी बैठक के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल मुख्यमंत्री की बैठक में तीन मुद्दे खास नजर में हैं—खनन सेस से होने वाला राजस्व, खनिज परिवहन में कथित ओवरलोडिंग से होने वाला नुकसान और राज्य के खनिज अधिकारों को लेकर आगे की कानूनी एवं राजनीतिक रणनीति।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *