JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते गिरफ्तार, 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी मामले में CID की बड़ी कार्रवाई

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID ने बड़ी कार्रवाई की है। JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को CID ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी से पहले जांच एजेंसी उनसे कई दौर में पूछताछ कर चुकी थी। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, CID ने उनसे चार दौर में करीब 30 घंटे तक पूछताछ की थी। एल. खियांग्ते ने हाल ही में JPSC अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद 14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला और गंभीर हो गया है और जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है।
टीडीपीएल को परीक्षा का जिम्मा देने पर उठे सवाल
जांच में मुख्य आरोपों में से एक यह है कि परीक्षा संचालन का काम टीडीपीएल को नियमों को दरकिनार कर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी को सामान्य निविदा प्रक्रिया के बजाय नामांकन के आधार पर काम दिए जाने को लेकर सवाल उठे हैं। एक रिपोर्ट में टीडीपीएल को ब्लैकलिस्टेड कंपनी बताए जाने का भी उल्लेख है। CID पहले ही मामले में कई स्तरों पर जांच कर रही है। जांच के दौरान दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जाने के साथ टीडीपीएल के रांची और लखनऊ स्थित कार्यालयों को सील किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।

पूछताछ के बाद गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल
एल. खियांग्ते से जांच एजेंसी लगातार पूछताछ कर रही थी। अब उनकी गिरफ्तारी के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि CID को पूछताछ और जांच के दौरान कौन-कौन से तथ्य मिले हैं और किन बिंदुओं के आधार पर गिरफ्तारी की गई। हालांकि, दो करोड़ रुपये रिश्वत दिए जाने और खियांग्ते की कथित मिलीभगत जैसे आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। इन्हें फिलहाल आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
तीन पूर्व JPSC सदस्यों से भी हो चुकी है पूछताछ
इस मामले में जांच का दायरा केवल पूर्व अध्यक्ष तक सीमित नहीं है। CID ने JPSC के तीन पूर्व सदस्यों—डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद—को भी पूछताछ के लिए समन किया था। तीनों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था और CID की पूछताछ का सामना किया। ऐसे में पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी के बाद अब आयोग के कामकाज और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अन्य अधिकारियों की भूमिका पर भी जांच एजेंसी की नजर रहने की संभावना है।
ED की एंट्री से आर्थिक पहलू भी जांच के दायरे में
JPSC विवाद में अब आर्थिक पहलू भी जांच के केंद्र में आ गया है। सरकार ने कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए ED से जांच कराने की बात कही थी। यदि आर्थिक लेन-देन, रिश्वत या मनी ट्रेल से जुड़े ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है। ऐसे में CID की आपराधिक जांच के साथ आर्थिक लेन-देन की जांच भी मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

छात्र आंदोलन के बीच बड़ी कार्रवाई
एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ झारखंड में छात्रों का बड़ा आंदोलन चल रहा है। आंदोलनकारी अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सरकार और छात्रों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद भी कुछ प्रमुख मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है। इसी बीच पूर्व JPSC अध्यक्ष की गिरफ्तारी ने पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एल. खियांग्ते से पूछताछ और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से JPSC परीक्षा विवाद की कौन-कौन सी नई कड़ियां जुड़ती हैं और क्या जांच की आंच अन्य जिम्मेदार लोगों तक भी पहुंचती है।






