दीपिका पांडेय सिंह की पहल से AI आधारित प्रशासन की शुरुआत, झारखंड में नया प्रयोग
रांची: झारखंड में प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य के ग्रामीण विकास विभाग ने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल की शुरुआत ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य और पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की पहल पर की गई है।
सरकार का मानना है कि प्रशासनिक ढांचे को नई तकनीक से जोड़ने से सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन अधिक तेज और पारदर्शी हो सकेगा। इसी दिशा में झारखंड उन शुरुआती राज्यों में शामिल हो गया है जहां सरकारी कर्मचारियों को संगठित रूप से AI आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
योजनाओं के बेहतर संचालन के लिए नई पहल
ग्रामीण विकास विभाग राज्य की कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन करता है। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण (PMAY-G), झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS), वाटरशेड विकास कार्यक्रम और ग्रामीण सड़क निर्माण योजनाएं शामिल हैं।
इन योजनाओं के संचालन में बड़े पैमाने पर डेटा प्रबंधन, दस्तावेज़ीकरण और रिपोर्टिंग की जरूरत होती है। लंबे समय से यह प्रक्रिया पारंपरिक फाइलों और एक्सेल शीट्स पर आधारित रही है। इससे कई बार निर्णय लेने और रिपोर्ट तैयार करने में देरी होती थी।
इसी समस्या को देखते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने विभागीय कार्यों को तकनीक आधारित बनाने की पहल की।
ग्रामीण AI सपोर्ट सेल का गठन
इस दिशा में सबसे अहम कदम 17 अक्टूबर 2025 को उठाया गया, जब विभाग में ग्रामीण AI सपोर्ट सेल की स्थापना की गई।
इस सेल का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों में AI तकनीक का उपयोग बढ़ाना और कर्मचारियों को नई तकनीक से जोड़ना है। इस पहल को आगे बढ़ाने में The Nudge Institute से जुड़े इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव फेलो विनोद कुमार पांडेय और विभाग के अवर सचिव चंद्र भूषण की अहम भूमिका रही है।
दोनों अधिकारियों ने विभाग में AI आधारित प्रशासनिक व्यवस्था को लागू करने के लिए विस्तृत योजना तैयार की।
अधिकारियों और कर्मचारियों को मिला प्रशिक्षण
AI सपोर्ट सेल बनने के बाद विभाग ने कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया। जनवरी से फरवरी 2026 के बीच छह प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए, जिनमें 40 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया।
इन प्रशिक्षण सत्रों में विभिन्न स्तरों के कर्मचारी शामिल रहे, जिनमें:
- कंप्यूटर ऑपरेटर
- डाटा एंट्री ऑपरेटर
- अनुभाग अधिकारी
- सहायक अधिकारी
- अवर सचिव स्तर के अधिकारी
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि AI तकनीक का लाभ प्रशासनिक तंत्र के हर स्तर तक पहुंचे।
AI टूल्स से आसान होंगे प्रशासनिक काम
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि AI तकनीक के जरिए कई प्रशासनिक कार्य तेजी से किए जा सकते हैं।
AI की मदद से कर्मचारी:
- सरकारी नोटशीट और पत्र तैयार कर सकते हैं
- लंबी फाइलों का सारांश निकाल सकते हैं
- डेटा विश्लेषण कर सकते हैं
- योजनाओं की प्रगति का डैशबोर्ड बना सकते हैं
- रिपोर्ट और प्रेजेंटेशन तैयार कर सकते हैं
इसके साथ ही प्रशिक्षण में डेटा सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया।
इन आधुनिक AI टूल्स का दिया गया प्रशिक्षण
कर्मचारियों को कई आधुनिक AI और डेटा एनालिटिक्स टूल्स का प्रशिक्षण दिया गया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- Claude AI
- Microsoft Copilot
- Power BI
- Perplexity AI
- Gamma
इन टूल्स के उपयोग से विभाग में डेटा आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।
योजनाओं की निगरानी होगी और बेहतर
AI तकनीक लागू होने के बाद विभाग की योजनाओं की निगरानी प्रणाली में भी बड़ा बदलाव आने की संभावना है। विभाग प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण जैसी योजनाओं के लिए लाइव डैशबोर्ड तैयार करने की योजना बना रहा है।इसके अलावा सभी योजनाओं के आंकड़ों को एक मंच पर लाने के लिए Integrated Rural Data Hub विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।
नागरिकों के लिए भी बनेगा AI चैटबॉट
ग्रामीण विकास विभाग भविष्य में नागरिकों के लिए भी AI आधारित सेवाएं शुरू करने की योजना बना रहा है। इसके तहत एक AI चैटबॉट विकसित किया जाएगा, जिसके जरिए ग्रामीण नागरिक योजनाओं से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
यह चैटबॉट लोगों को बताएगा कि वे किसी योजना के पात्र हैं या नहीं, उनका आवेदन किस स्थिति में है और उन्हें आगे क्या करना चाहिए।
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का विजन
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ना समय की जरूरत है। उनके अनुसार यदि अधिकारी और कर्मचारी तकनीक से सशक्त होंगे तो योजनाओं का लाभ लोगों तक अधिक तेजी और पारदर्शिता के के साथ पहुंचेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सफल होती है तो झारखंड की यह पहल भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।








