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₹2.20 करोड़ के इनामी नक्सली असीम मंडल का सरेंडर नहीं, गिरफ्तारी! STF ने दबोचा, सामने आई पूरी कहानी

Asim Mandal Arrest

रांची/कोलकाता: ₹2.20 करोड़ के इनामी CPI (Maoist) केंद्रीय समिति सदस्य असीम मंडल उर्फ आकाश को कोलकाता पुलिस की STF ने पूर्व मेदिनीपुर से गिरफ्तार किया है। शुरुआती रिपोर्टों में उसके आत्मसमर्पण की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए गिरफ्तारी की पुष्टि की। झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सुरक्षा एजेंसियों के लिए लंबे समय से चुनौती बने ₹2.20 करोड़ के इनामी माओवादी नेता असीम मंडल उर्फ आकाश को पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार कर लिया गया है। कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने उसे पूर्व मेदिनीपुर जिले के पटाशपुर इलाके के ललाट से पकड़ा है। असीम मंडल को CPI (Maoist) की केंद्रीय समिति का सदस्य और पश्चिम बंगाल स्टेट कमेटी-I का सचिव बताया गया है। उसके सिर पर झारखंड सरकार की ओर से ₹1 करोड़ और ओडिशा सरकार की ओर से ₹1.20 करोड़ का इनाम घोषित था।

सरेंडर या गिरफ्तारी? बदल गई पूरी कहानी
असीम मंडल को लेकर गुरुवार को उस समय तस्वीर बदल गई, जब शुरुआती खबरों में उसके पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने की जानकारी सामने आई। बाद में पश्चिम बंगाल से आई आधिकारिक जानकारी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सोशल मीडिया पोस्ट में इसे गिरफ्तारी बताया गया। मुख्यमंत्री ने अपने एक्स पोस्ट में कोलकाता पुलिस STF के अधिकारियों और जवानों की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि STF ने असीम मंडल को पूर्व मेदिनीपुर के पटाशपुर के ललाट इलाके से गिरफ्तार किया है। हालांकि, समाचार एजेंसी UNI की एक रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि झारखंड पुलिस मुख्यालय की ओर से इसे आत्मसमर्पण बताया गया था। ऐसे में शुरुआती स्तर पर घटना की प्रकृति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए, लेकिन पश्चिम बंगाल पुलिस और मुख्यमंत्री के बयान में गिरफ्तारी की पुष्टि की गई है।

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15 साल से ज्यादा समय से सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दे रहा था
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के मुताबिक असीम मंडल पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से अंतरराज्यीय जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचता रहा था। पुलिस ने तकनीकी खुफिया जानकारी के आधार पर उसकी गतिविधियों और लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद STF ने ऑपरेशन को अंजाम देते हुए पूर्व मेदिनीपुर जिले के पटाशपुर क्षेत्र में उसे गिरफ्तार कर लिया। मुख्यमंत्री ने इस कार्रवाई को पुलिस की तकनीकी क्षमता और ऑपरेशनल दक्षता से जोड़ते हुए STF के अधिकारियों की सराहना की।

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कौन है असीम मंडल उर्फ आकाश?
असीम मंडल को CPI (Maoist) के शीर्ष स्तर के नेताओं में शामिल बताया जाता है। वह संगठन की केंद्रीय समिति का सदस्य होने के साथ-साथ पश्चिम बंगाल स्टेट कमेटी-I का सचिव भी बताया गया है। उसका प्रभाव पश्चिम बंगाल, झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क से जोड़ा जाता रहा है। उसके खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों की लंबे समय से नजर थी और उसके ऊपर घोषित कुल इनाम ₹2.20 करोड़ था।

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तकनीकी खुफिया जानकारी से मिला सुराग
इस गिरफ्तारी में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी तकनीकी खुफिया जानकारी को बताया जा रहा है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अनुसार, STF ने सटीक तकनीकी इनपुट के आधार पर असीम मंडल की लोकेशन का पता लगाया और उसके बाद पटाशपुर के ललाट इलाके में कार्रवाई की। पुलिस के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि असीम मंडल लंबे समय से अलग-अलग अंतरराज्यीय जंगल क्षेत्रों में अपनी लोकेशन बदलकर सुरक्षा एजेंसियों से बचता रहा था।

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‘रेड टेरर’ के नेटवर्क को लेकर सीएम का सख्त बयान
असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में माओवादी नेटवर्क को लेकर सख्त रुख जाहिर किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पश्चिम बंगाल की सीमा के भीतर माओवादी गतिविधियों के नेटवर्क को दोबारा खड़ा करने या उसका विस्तार करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी उग्रवादी विचारधारा को राज्य के लोगों की सुरक्षा और विकास को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और ऐसी कोशिशों के खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गिरफ्तारी के बाद अब जांच का अगला चरण
असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब उसके नेटवर्क, संपर्कों, आवाजाही और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाने की चुनौती होगी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, STF उससे पूछताछ कर सकती है और उसके कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया जा सकता है। खास तौर पर झारखंड-पश्चिम बंगाल-ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को लेकर उसकी पूछताछ को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उससे पूछताछ से क्या जानकारी सामने आती है और उसका असर आगे की जांच पर क्या पड़ता है, यह जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

₹2.20 करोड़ का इनामी और अब STF की गिरफ्त में
असीम मंडल की गिरफ्तारी के साथ ही लंबे समय से फरार एक शीर्ष माओवादी नेता अब सुरक्षा एजेंसियों की हिरासत में है। उसके ऊपर झारखंड और ओडिशा सरकारों की ओर से कुल ₹2.20 करोड़ का इनाम घोषित था। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह है कि जिस असीम मंडल के आत्मसमर्पण की शुरुआती खबर सामने आई थी, उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि अब पश्चिम बंगाल पुलिस STF और मुख्यमंत्री के बयान से हुई है। आगे की पूछताछ और जांच से उसके नेटवर्क तथा संगठन की गतिविधियों से जुड़े और तथ्य सामने आने की उम्मीद है।

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