रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ की तलवार! US हाउस में बिल, क्या बढ़ेगा दबाव?

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भारत का नाम बिल में जोड़ने का प्रस्ताव, एक संशोधन में टैरिफ प्रावधान हटाने की मांग

नई दिल्ली ने कहा- ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता

नई दिल्ली: रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर भारत और अमेरिका के बीच एक बार फिर टैरिफ का मुद्दा गरमा गया है। अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े बिल में ऐसे संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं, जिनके तहत भारत समेत रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, यह अभी प्रस्तावित कानून है और भारत पर 100 फीसदी टैरिफ फिलहाल लागू नहीं हुआ है। अमेरिकी सीनेट अगस्त में रूस प्रतिबंध बिल को 86-11 के भारी बहुमत से पारित कर चुकी है। अब हाउस में इसके प्रावधानों और संशोधनों पर चर्चा हो रही है।

भारत को सीधे बिल में जोड़ने का प्रस्ताव
हाउस में पेश एक संशोधन में भारत, चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक रिपब्लिक, यूएई, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिज रिपब्लिक जैसे देशों को उन देशों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव है, जिन पर रूस से ऊर्जा खरीद के कारण अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है। दूसरी तरफ, डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स ने सेक्शन 113 को ही हटाने का प्रस्ताव दिया है। यही सेक्शन अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के प्रमुख ऊर्जा खरीदार देशों के आयात पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देने से जुड़ा है। यानी हाउस में एक तरफ टैरिफ का दायरा स्पष्ट करने का प्रस्ताव है, तो दूसरी तरफ इस टैरिफ प्रावधान को हटाने की कोशिश भी हुई है।

100% टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ
इस पूरे घटनाक्रम में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि **भारत पर 100 फीसदी टैरिफ अभी लागू नहीं हुआ है। प्रस्तावित कानून राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है। लेकिन इसके लिए विधेयक को अमेरिकी संसद की प्रक्रिया पूरी करनी होगी और फिर राष्ट्रपति की कार्रवाई भी आवश्यक होगी। यानी मौजूदा स्थिति को ‘100 फीसदी टैरिफ लागू’ के तौर पर देखना सही नहीं होगा, बल्कि यह फिलहाल संभावित अमेरिकी नीति का हिस्सा है।

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भारत का रुख- ऊर्जा सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता
रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा पर आधारित है। विदेश मंत्रालय ने कहा था कि भारत घटनाक्रम पर करीबी नजर रख रहा है और अमेरिका में संबंधित पक्षों के साथ बातचीत जारी है। भारत ने यह भी कहा कि उसकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात के स्रोतों में विविधता रखी जाती है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इससे पहले 100 फीसदी टैरिफ की संभावना से जुड़े सवाल पर कहा था कि ऐसी बातों पर अटकलों के आधार पर टिप्पणी नहीं की जाती।

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रूस से तेल खरीदना भारत के लिए क्यों अहम?
यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदारों में शामिल हुआ है। रूस से मिलने वाले तेल ने भारतीय रिफाइनरों के लिए कच्चे तेल के आयात का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनाया है। इसी कारण अमेरिका की प्रस्तावित टैरिफ नीति का असर सिर्फ भारत-अमेरिका व्यापार पर नहीं, बल्कि ऊर्जा खरीद और वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। अमेरिका का तर्क है कि रूस की ऊर्जा बिक्री से मिलने वाला राजस्व उसके युद्ध प्रयासों को वित्तीय मदद देता है। प्रस्तावित प्रतिबंध कानून इसी आर्थिक दबाव को बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा है।

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अब आगे क्या होगा?
फिलहाल गेंद अमेरिकी हाउस के पाले में है। वहां बिल और उसके संशोधनों पर आगे की प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा कि 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने वाला प्रावधान अंतिम कानून का हिस्सा बनता है या नहीं। भारत के लिए महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि अंतिम कानून में किन देशों को लक्षित किया जाता है, राष्ट्रपति को कितनी शक्तियां मिलती हैं और इन शक्तियों का वास्तविक इस्तेमाल किस तरह किया जाता है। इस बीच भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता भी इस घटनाक्रम के बीच महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में वॉशिंगटन की संसद और भारत सरकार की ओर से सामने आने वाले बयानों पर नजर रहेगी।

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