JSSC महिला पर्यवेक्षिका भर्ती में बड़ा बवाल! 33 चयनित अभ्यर्थियों की डिग्री पर उठे सवाल, नियुक्ति पर लगी रोक
एक ही यूनिवर्सिटी, एक जैसा सेशन, मिलते-जुलते अंक… जांच में सामने आया चौंकाने वाला पैटर्न
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की महिला पर्यवेक्षिका प्रतियोगिता परीक्षा-2023 एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गई है। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब 313 सफल अभ्यर्थियों में से 33 उम्मीदवारों की शैक्षणिक डिग्रियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दस्तावेजों की जांच के दौरान विभाग को कई ऐसी समानताएं मिली हैं, जिसने पूरी चयन प्रक्रिया को संदेह के घेरे में ला दिया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इन 33 अभ्यर्थियों की नियुक्ति फिलहाल रोक दी गई है। अब उनकी डिग्रियों और प्रमाणपत्रों की विस्तृत जांच होगी। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
क्या मिला जांच में, जिससे बढ़ा शक?
विभागीय सत्यापन के दौरान अधिकारियों ने देखा कि संदेह के दायरे में आए सभी 33 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में कई बातें लगभग एक जैसी हैं। जांच में सामने आया कि—
- सभी उम्मीदवारों ने एक ही निजी विश्वविद्यालय से स्नातक किया है।
- सभी की समाजशास्त्र (Sociology) विषय में डिग्री है।
- लगभग सभी का शैक्षणिक सत्र समान है।
- स्नातक परीक्षा में प्राप्त अंक भी काफी हद तक मिलते-जुलते हैं।
- अधिकांश उम्मीदवारों ने इंटरमीडिएट पास करने के छह से सात वर्ष बाद ग्रेजुएशन में दाखिला लिया।
- बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने 12वीं विज्ञान संकाय (Science) से करने के बाद समाजशास्त्र विषय से स्नातक किया।
इन समानताओं के बाद विभाग ने मामले को सामान्य संयोग मानने के बजाय विस्तृत जांच का फैसला लिया है।
444 पदों की भर्ती, लेकिन अब नियुक्ति पर ब्रेक
महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने महिला पर्यवेक्षिका के 444 पदों पर नियुक्ति के लिए JSSC को अधियाचना भेजी थी।
- वर्ष 2023 में आवेदन आमंत्रित किए गए।
- सितंबर 2024 में परीक्षा आयोजित हुई।
- 27 मई 2025 को परिणाम घोषित हुआ।
- 313 अभ्यर्थी सफल हुए।
- 131 पद खाली रह गए।
आयोग ने चयनित अभ्यर्थियों की अनुशंसा विभाग को भेज दी, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के दौरान पूरा मामला उलझ गया।
नियुक्ति क्यों रोकी गई?
महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि किसी भी अभ्यर्थी के खिलाफ अंतिम निर्णय अभी नहीं लिया गया है। फिलहाल केवल दस्तावेजों की सत्यता की जांच की जा रही है। यदि डिग्रियां और प्रमाणपत्र सही पाए जाते हैं तो नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। लेकिन यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अभ्यर्थियों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

अब शिक्षक नियुक्ति भी जांच के घेरे में
महिला पर्यवेक्षिका भर्ती के बाद अब माध्यमिक शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। राज्य में लगभग 1300 माध्यमिक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है। इनमें से करीब 800 अभ्यर्थियों के नाम शिक्षा विभाग को भेजे जा चुके हैं। इसी दौरान शिकायत मिली है कि कंप्यूटर साइंस, एआई एंड कोडिंग, साइबर सिक्योरिटी और डेटा साइंस विषयों में चयनित कुछ अभ्यर्थियों ने निजी विश्वविद्यालयों से संदिग्ध तरीके से डिग्रियां प्राप्त की हैं। शिक्षा विभाग ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच की तैयारी शुरू कर दी है।
भर्ती प्रक्रिया पर फिर उठे सवाल
पिछले कुछ महीनों से झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं। JPSC परीक्षा की जांच पहले से CID कर रही है। अब JSSC की महिला पर्यवेक्षिका भर्ती और शिक्षक नियुक्ति में डिग्रियों पर उठे सवालों ने सरकारी भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ दी है। यदि जांच में दस्तावेजों में गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल 33 अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।






