झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 को मिली कैबिनेट की स्वीकृति, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार
Minister Sudivy Sonuराज्य में उच्च शिक्षा को लेकर बड़ा फैसला, झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 को मंत्रिमंडल की मंजूरी
रांची, 26 जुलाई 2025: झारखंड राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए राज्य मंत्रिमंडल ने झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 को अपनी स्वीकृति दे दी है। यह विधेयक राज्य के विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को ज्यादा संगठित, पारदर्शी और रोजगारोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से लाया गया है।
क्या है झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025?
यह विधेयक राज्य में संचालित विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक प्रबंधन, वित्तीय नियंत्रण, पाठ्यक्रम गुणवत्ता, अकादमिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने का एक सशक्त कानूनी ढांचा उपलब्ध कराएगा। इसका उद्देश्य शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित रखने के बजाय कौशल और रोजगार से जोड़ना है।
डॉ. तनुज खत्री की सक्रिय भागीदारी
झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सदस्य और शिक्षाविद् डॉ. तनुज खत्री ने इस विधेयक को ऐतिहासिक बताते हुए शिक्षा मंत्री श्री सुदिव्य कुमार सोनू से मुलाकात की। उन्होंने विधेयक को उच्च शिक्षा में ‘गेम चेंजर’ करार देते हुए खासकर वोकेशनल कोर्स को लेकर गंभीर मुद्दा उठाया।
“राज्य के विश्वविद्यालयों में चल रहे वोकेशनल कोर्स सेल्फ-फाइनेंस मोड पर हैं। इन्हें नियमित कोर्स की तरह संस्थागत मान्यता दी जानी चाहिए ताकि छात्रों को भविष्य में किसी तरह की परेशानी न हो।”
– डॉ. तनुज खत्री
शिक्षा मंत्री श्री सोनू ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है और आगामी सत्र से बदलाव के संकेत दिए।
छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया
रांची विश्वविद्यालय छात्र मोर्चा के अध्यक्ष अमन तिवारी और सचिव असद फ़राज़ ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा, “वर्षों से छात्र समुदाय इस प्रकार के बदलाव की प्रतीक्षा कर रहा था। अब उम्मीद है कि झारखंड शिक्षा में अग्रणी राज्य के रूप में उभरेगा।”
विधेयक के प्रमुख लाभ:
- विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी
- पाठ्यक्रमों में समयानुकूल परिवर्तन होंगे
- वोकेशनल और तकनीकी शिक्षा को मिलेगा प्रोत्साहन
- रोजगार अवसरों में वृद्धि
- नवाचार और अनुसंधान को मिलेगा बढ़ावा
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगे की राह
झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस सहित कई दलों ने इस विधेयक को समर्थन दिया है और विधानसभा में इसे सर्वसम्मति से पारित करने की उम्मीद जताई है।
डॉ. तनुज खत्री ने कहा, “यदि विधेयक को प्रभावशाली तरीके से लागू किया गया, तो आने वाले वर्षों में झारखंड शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल राज्य बन सकता है।”
झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 केवल एक नीति दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह झारखंड की शैक्षणिक पुनर्रचना का प्रतीक है। इससे राज्य के विश्वविद्यालयों में न केवल प्रणालीगत सुधार होगा, बल्कि युवाओं को रोजगार, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने का भी अवसर मिलेगा।
यदि सरकार इसे ज़मीनी स्तर पर ईमानदारी से लागू करती है, तो यह झारखंड को शिक्षा के क्षेत्र में नए युग की ओर अग्रसर करेगा।








