छठ पर्व पर सुरक्षा के लिए एनडीएमए और जिला प्रशासन ने जारी किए दिशा-निर्देश
श्रद्धालुओं से की सावधानी बरतने की अपील , जन-सुरक्षा हेतु विशेष दिशा-निर्देश जारी
रांची: लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा को लेकर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और झारखंड जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। प्राधिकरण ने दीपावली, छठ पूजा और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़, अग्निकांड, डूबने की घटनाओं और शीतकालीन जोखिमों को ध्यान में रखते हुए विशेष गाइडलाइन जारी की है। प्रशासन ने अपील की है कि श्रद्धालु उत्सव मनाते समय सुरक्षा के सभी नियमों का पालन करें और सावधानी बरतें।
भीड़ प्रबंधन और भगदड़ रोकथाम के उपाय
एनडीएमए की ‘क्राउड मैनेजमेंट गाइडलाइन’ के अनुसार—
- आयोजक पहले से भीड़ की क्षमता तय करें, प्रवेश और निकास मार्ग स्पष्ट रखें।
- सीसीटीवी, ड्रोन और वॉकी-टॉकी से निगरानी करें।
- बच्चों और बुजुर्गों के लिए अलग सुरक्षित क्षेत्र बनाएं।
- नदी तटों और घाटों पर रेलिंग लगाई जाए।
- शराब सेवन, धक्का-मुक्की और भीड़ में फिसलन भरी जगहों से बचें।
अग्निकांड और आतिशबाजी से सुरक्षा
एनडीएमए की ‘फायर सेफ्टी गाइडलाइन’ के अनुसार—
- प्रमाणित पटाखे ही जलाएं, खुले मैदान में घर या वाहन से 50 मीटर दूर।
- फायर एक्सटिंग्विशर, पानी की बाल्टी और धुआं अलार्म तैयार रखें।
- बच्चों को पटाखों से दूर रखें और कॉटन वस्त्र पहनाएं।
- शराब के नशे में आतिशबाजी न करें।
डूबने की रोकथाम और जल सुरक्षा
छठ पर्व के दौरान घाटों पर स्नान या अर्घ्य देते समय सावधानी जरूरी है—
- सभी श्रद्धालु लाइफ जैकेट पहनें, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता दें।
- घाटों पर लाइफ गार्ड और बचाव दल (एनडीआरएफ/स्थानीय टीमें) की तैनाती की जाए।
- खतरनाक घाटों पर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं।
- अंधेरे या तेज धारा में स्नान न करें।
शीतकालीन जोखिम और हीटिंग उपकरणों से सुरक्षा
सर्दी के मौसम में आग या गैस रिसाव की घटनाओं से बचने के लिए
- हीटिंग डिवाइसेज़ को ज्वलनशील वस्तुओं से 1 मीटर दूर रखें।
- कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) डिटेक्टर लगाएं और कमरे में हवा का संचार बनाए रखें।
- बुजुर्गों, बच्चों और बेघर लोगों को गर्म वस्त्र एवं आश्रय उपलब्ध कराएं।
- बंद कमरों में अंगीठी न जलाएं, और सोते समय हीटिंग डिवाइस बंद करें।
प्रशासन की अपील — “सुरक्षा के साथ मनाएं आस्था का पर्व”
जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं और आयोजकों से आग्रह किया है कि वे एनडीएमए के सभी निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा प्रबंधन टीम से तुरंत संपर्क करें।
“सुरक्षा के साथ आस्था का पर्व मनाना ही सच्ची श्रद्धा का प्रतीक है।”
— जिला प्रशासन






