कोडरमा में स्कूल का अर्धनिर्मित भवन ढहा, मिड-डे मील खा रहे बच्चे बाल-बाल बचे
वीरगढ़ा स्कूल में तेज बारिश के दौरान भरभराकर गिरा दो मंजिला भवन का हिस्सा
वीरगढ़ा स्कूल में तेज बारिश के दौरान भरभराकर गिरा दो मंजिला भवन का हिस्सा
koderma: झारखंड के कोडरमा जिले के चंदवारा प्रखंड स्थित बेंदी पंचायत में सोमवार को एक बड़ा हादसा टल गया। नवसृजित प्राथमिक विद्यालय वीरगढ़ा का अर्धनिर्मित दो मंजिला भवन तेज बारिश के दौरान अचानक भरभराकर ढह गया। जिस वक्त भवन का ऊपरी हिस्सा गिरा, उस समय स्कूल में बच्चे मिड-डे मील खा रहे थे। अचानक भवन का हिस्सा गिरने से स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, समय रहते बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया, जिससे सभी बच्चे बाल-बाल बच गए। घटना में किसी बच्चे के घायल होने की सूचना नहीं है।
करीब 16 साल से अधूरा पड़ा था भवन
स्थानीय लोगों के अनुसार, विद्यालय का दो मंजिला भवन करीब वर्ष 2010 में अधूरा बनाया गया था। निर्माण पूरा नहीं होने के कारण भवन का ऊपरी हिस्सा लंबे समय से उसी स्थिति में पड़ा था। सोमवार को क्षेत्र में तेज बारिश हो रही थी। इसी दौरान अचानक अर्धनिर्मित भवन का ऊपरी हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। मलबा विद्यालय परिसर में फैल गया। हादसे के वक्त अगर बच्चे भवन के नीचे या उसके आसपास मौजूद होते, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।
37 बच्चे नामांकित, सिर्फ एक शिक्षक
वीरगढ़ा प्राथमिक विद्यालय में करीब 37 बच्चे नामांकित हैं। स्कूल में फिलहाल केवल एक शिक्षक पिंटू कुमार कार्यरत हैं। शिक्षक पिंटू कुमार के मुताबिक, घटना के समय बच्चे मिड-डे मील खा रहे थे। भवन का हिस्सा गिरते ही बच्चों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। उन्होंने बताया कि सभी बच्चे सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की जानकारी नहीं है।
स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
अर्धनिर्मित भवन का हिस्सा गिरने के बाद स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। अभिभावकों का कहना है कि लंबे समय से अधूरा और कमजोर पड़ा भवन बच्चों के लिए खतरा बना हुआ था। बारिश के दौरान भवन का हिस्सा गिरने की घटना ने अभिभावकों की चिंता और बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते भवन की स्थिति की जांच नहीं की गई, तो भविष्य में इससे बड़ा हादसा हो सकता है।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने प्रशासन से विद्यालय भवन की तत्काल तकनीकी जांच कराने की मांग की है। साथ ही जर्जर और अर्धनिर्मित हिस्से को सुरक्षित कराने की अपील की गई है, ताकि स्कूल आने वाले बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। लोगों का कहना है कि विद्यालय में पढ़ने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए भवन के कमजोर हिस्से को या तो सुरक्षित तरीके से हटाया जाए या उसे पूरी तरह सुरक्षित बनाने की व्यवस्था की जाए। फिलहाल इस घटना में किसी के घायल नहीं होने से एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन स्कूल भवन की स्थिति ने सरकारी भवनों के निर्माण और रखरखाव को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।




