सोन नदी जल बंटवारे पर बिहार-झारखंड में बड़ा समझौता, हेमंत सोरेन और सम्राट चौधरी रहे मौजूद
नई दिल्ली में अमित शाह की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर
पलामू-गढ़वा समेत आसपास के इलाकों को सिंचाई और पेयजल में मिलेगा लाभ
नई दिल्ली: बिहार और झारखंड के बीच लंबे समय से चले आ रहे सोन नदी के जल बंटवारे से जुड़े मुद्दे को लेकर बड़ा कदम उठाया गया है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी शामिल हुए। इस समझौते के तहत दोनों राज्यों के बीच सोन नदी के जल आवंटन को लेकर सहमति बनी है। इसके मुताबिक बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2.00 MAF पानी आवंटित किया जाएगा। इस समझौते को दोनों राज्यों के बीच जल संसाधन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
झारखंड के पलामू-गढ़वा को मिलेगा फायदा
समझौते का सबसे बड़ा लाभ झारखंड के पलामू, गढ़वा और आसपास के क्षेत्रों को मिलने की उम्मीद है। इन इलाकों में सिंचाई और पेयजल के लिए सोन नदी के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जल उपलब्धता बढ़ने से क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ कृषि गतिविधियों को भी फायदा हो सकता है। इसके अलावा ग्रामीण और शहरी इलाकों में पेयजल की जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
झारखंड में जल संसाधनों को मिलेगा बढ़ावा
समझौते के बाद झारखंड में जल संसाधनों के सुदृढ़ीकरण की दिशा में नई संभावनाएं पैदा होंगी। खासकर जल संकट और सिंचाई की समस्या से प्रभावित पलामू प्रमंडल के लिए इसे अहम उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। सोन नदी के पानी का निर्धारित हिस्सा मिलने से राज्य में जल प्रबंधन और सिंचाई से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे क्षेत्र के समग्र विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई गई है।
हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री और अमित शाह का जताया आभार
समझौते के मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोन नदी जल बंटवारे से जुड़े विवाद के समाधान की दिशा में हुए प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे झारखंड के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। सोन नदी के पानी का हिस्सा मिलने से राज्य के उन इलाकों को लाभ पहुंचने की उम्मीद है, जहां लंबे समय से सिंचाई और पेयजल की चुनौतियां बनी हुई हैं।
5.75 MAF बिहार और 2 MAF झारखंड को
समझौते की सबसे महत्वपूर्ण बात दोनों राज्यों के बीच जल आवंटन है। इसके तहत:
- बिहार को 5.75 MAF पानी
- झारखंड को 2.00 MAF पानीआवंटित करने पर सहमति बनी है।
यह सहमति सोन नदी के जल संसाधन के उपयोग और दोनों राज्यों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
नई दिल्ली में आयोजित समझौता कार्यक्रम में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, बिहार के उपमुख्यमंत्री, झारखंड के जल संसाधन मंत्री हफीजुल हसन, झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत कुमार और झारखंड भवन, नई दिल्ली के रेजिडेंट कमिश्नर अरवा राजकमल समेत भारत सरकार, झारखंड सरकार और बिहार सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे को लेकर हुए इस समझौते को दोनों राज्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर झारखंड के पलामू और गढ़वा क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में यह MoU अहम भूमिका निभा सकता है।







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