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सावन 2026: झारखंड के 11 प्रमुख शिवालय, जहां उमड़ती है लाखों श्रद्धालुओं की आस्था

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सावन में धार्मिक पर्यटन के लिहाज से झारखंड देश के प्रमुख राज्यों में शामिल है।

बाबा बैद्यनाथ धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है।

बासुकीनाथ, पहाड़ी मंदिर, टांगीनाथ और महादेवसाल प्रमुख आस्था केंद्र हैं।

अंगराबाड़ी, लुगु बाबा धाम और सुरेश्वर महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच लोकप्रिय हैं।

रांची: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। झारखंड भी शिवभक्ति की समृद्ध परंपरा वाला राज्य है, जहां देवघर के विश्वप्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम से लेकर रांची, गुमला, दुमका, खूंटी, बोकारो और पश्चिमी सिंहभूम तक दर्जनों प्राचीन शिवालय श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। सावन में इन मंदिरों में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और “बोल बम” के जयघोष के बीच लाखों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का दर्शन करने पहुंचते हैं।

बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर
झारखंड का सबसे प्रसिद्ध शिवधाम बाबा बैद्यनाथ मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। इसे शक्तिपीठ का भी दर्जा प्राप्त है। सावन के दौरान यहां लगने वाला श्रावणी मेला विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है। लाखों कांवरिये बिहार के सुल्तानगंज से गंगाजल लाकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं।

बासुकीनाथ धाम, दुमका
मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के बाद बासुकीनाथ धाम में पूजा किए बिना यात्रा पूर्ण नहीं होती। सावन में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है और विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

पहाड़ी मंदिर, रांची
रांची शहर के बीचों-बीच स्थित पहाड़ी मंदिर राजधानी की पहचान बन चुका है। 468 सीढ़ियां चढ़कर श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार यहां हजारों भक्त जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर यहां राष्ट्रीय ध्वज फहराने की अनूठी परंपरा भी इसे विशेष बनाती है।

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टांगीनाथ धाम, गुमला
गुमला जिले का टांगीनाथ धाम झारखंड के सबसे प्राचीन शिवस्थलों में माना जाता है। यहां भगवान परशुराम की दिव्य टांगी (फरसा) से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। यह स्थल धार्मिक ही नहीं बल्कि पुरातात्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

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बाबा दानीनाथ मंदिर, दुमका
दुमका जिले के काठीकुंड स्थित बाबा दानीनाथ मंदिर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के लिए प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि और सावन के दौरान यहां विशाल मेले का आयोजन होता है।

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सुरेश्वर महादेव मंदिर, चुटिया (रांची)
रांची के सबसे पुराने शिवालयों में शामिल सुरेश्वर महादेव मंदिर सावन में विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। यहां रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

महादेवसाल मंदिर, पश्चिमी सिंहभूम
चक्रधरपुर-गोइलकेरा क्षेत्र में स्थित महादेवसाल मंदिर कोल्हान क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक आस्था का केंद्र है। सावन और महाशिवरात्रि पर यहां हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का दर्शन करने आते हैं।

लुगु बाबा धाम, बोकारो
बोकारो जिले का लुगु बाबा धाम विशेष रूप से आदिवासी समाज की आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। सावन के दौरान यहां विशेष पूजा और जलाभिषेक का आयोजन किया जाता है।

अंगराबाड़ी (अमरधाम), खूंटी
रांची-खूंटी मार्ग पर स्थित अंगराबाड़ी मंदिर, जिसे अमरधाम भी कहा जाता है, भगवान शिव, माता पार्वती और अन्य देवी-देवताओं का प्रसिद्ध मंदिर है। सावन में यहां सुबह से देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है।

मारसिली पहाड़ शिव मंदिर, नामकुम
रांची के नामकुम स्थित मारसिली पहाड़ शिव मंदिर प्राकृतिक वातावरण के बीच स्थित एक लोकप्रिय धार्मिक स्थल है। सावन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और शिव आराधना के लिए पहुंचते हैं।

इटखोरी (भद्रकाली क्षेत्र) के प्राचीन शिव मंदिर, चतरा
चतरा का **इटखोरी ** मुख्य रूप से मां भद्रकाली मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन यहां स्थित प्राचीन शिव मंदिर भी श्रद्धालुओं की विशेष आस्था का केंद्र हैं। यह क्षेत्र हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म की सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम माना जाता है।

    आस्था, संस्कृति और धार्मिक पर्यटन का संगम
    देवघर से लेकर रांची, दुमका, गुमला, बोकारो, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम और चतरा तक फैले ये शिवालय केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं हैं, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन की पहचान भी हैं। सावन के दौरान इन मंदिरों में लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना करते हैं। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन भी श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं करते हैं।

    झारखंड की यह शिवभक्ति परंपरा पूर्वी भारत में धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है और हर वर्ष सावन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।

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