सरला बिरला पब्लिक स्कूल में उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया हिंदी दिवस

Sarala Birla Public School Hindi Diwas

हिंदी—हमारी पहचान, हमारी शान’ विषय पर रंगारंग कार्यक्रम

फादर कामिल बुल्के के हिंदी प्रेम की कहानी ने मोहा मन

रांची: सरला बिरला पब्लिक स्कूल में हिंदी दिवस के अवसर पर ‘हिंदी—हमारी पहचान, हमारी शान’ विषय पर भावपूर्ण और विविधतापूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति आत्मीयता, गौरव और सम्मान की भावना को मजबूत करना तथा उन्हें हिंदी की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना रहा। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना और समूह गीत के साथ हुई। इसके बाद स्वागत भाषण के माध्यम से हिंदी दिवस के महत्व, हिंदी की व्यापकता और भारतीय जनजीवन में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

बेल्जियम से भारत आए फादर कामिल बुल्के की कहानी ने खींचा ध्यान
कार्यक्रम की विशेष प्रस्तुतियों में ‘दूर देश का राही, हिंदी का अनुरागी’ ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इसमें यूरोप के बेल्जियम से भारत आए फादर डॉ. कामिल बुल्के के हिंदी प्रेम, हिंदी सेवा और भारतीय संस्कृति के प्रति उनके गहरे अनुराग को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों ने उनकी जीवन-यात्रा के माध्यम से बताया कि हिंदी के प्रति उनका लगाव कितना गहरा था। रामचरितमानस से प्रभावित होकर उन्होंने रामकथा के गहन अध्ययन और शोध को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। प्रस्तुति के जरिए यह संदेश दिया गया कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, साहित्य और भावनाओं से जुड़ने का माध्यम भी है। फादर कामिल बुल्के का जीवन इस बात का प्रेरक उदाहरण है कि हिंदी का आकर्षण भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर भी लोगों को भारतीय संस्कृति से जोड़ सकता है।

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हिंदी के अलग-अलग रंगों को प्रस्तुतियों में किया गया जीवंत
इसके बाद विद्यार्थियों ने ‘हिंदी: हृदय की भाषा’, ‘हिंदी की सुरभि’, ‘कौन बनेगा हिंदी का ज्ञानी’, ‘सभ्यता की सरिता, हिंदी की धारा’ और ‘हिंदी—मेरी नजर में’ जैसी प्रस्तुतियां दीं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदी की मिठास, उसकी साहित्यिक समृद्धि और भारतीय संस्कृति के साथ उसके गहरे संबंध को रचनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया गया। क्विज और अन्य प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को मनोरंजक बनाने के साथ विद्यार्थियों के हिंदी ज्ञान को भी सामने रखा।

Adiwasi Mahotsav

प्राचार्या ने हिंदी के निरंतर प्रयोग का दिया संदेश
विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती मनीषा शर्मा ने अपने आशीर्वचन में हिंदी भाषा के प्रति सम्मान और इसके निरंतर प्रयोग का संदेश दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के महत्व को समझने और दैनिक जीवन में इसके प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन किया गया। इसके बाद ‘आज की प्रतिज्ञा’ के साथ हिंदी दिवस समारोह का समापन हुआ।पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में हिंदी भाषा के प्रति सम्मान, रचनात्मकता और सांस्कृतिक जुड़ाव की झलक देखने को मिली। विद्यालय का यह आयोजन हिंदी को केवल पाठ्यक्रम की भाषा के रूप में नहीं, बल्कि पहचान, संस्कृति और अभिव्यक्ति की भाषा के रूप में स्थापित करने का संदेश देता नजर आया।

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