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जमीन विवाद में फंसा विद्यालय का चाहरदीवारी निर्माण, 23 लाख की योजना तीन माह से ठप

Land Dispute

Hirnapur (Pakur) : पाकुड़ जिले के हिरणपुर प्रखंड अंतर्गत मुर्गाडांगा स्थित मध्य विद्यालय में जमीन विवाद के कारण लाखों रुपये की लागत से हो रहा चाहरदीवारी निर्माण कार्य बीते तीन माह से पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। इस निर्माण कार्य को लेकर न केवल भूमि स्वामित्व पर सवाल उठे हैं, बल्कि कार्य में अनियमितता के आरोप भी सामने आए हैं।

DMFT मद से 23 लाख की योजना, लेकिन काम अधूरा
जानकारी के अनुसार, DMFT (District Mineral Foundation Trust) मद से भवन निर्माण विभाग द्वारा वर्ष 2025 में करीब 23 लाख रुपये की लागत से विद्यालय परिसर में चाहरदीवारी निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। करीब तीन माह पूर्व योजना का कार्य शुरू हुआ, जिसमें अधिकांश हिस्सों में फाउंडेशन की ढलाई तथा कुछ जगहों पर ईंट जोड़ाई का कार्य भी किया गया।

ग्रामीण रैयतों ने रोका निर्माण कार्य
निर्माण के दौरान गांव के ही रैयत गसुम मुर्मू सहित अन्य ग्रामीणों ने यह कहते हुए काम रोक दिया कि चाहरदीवारी का निर्माण निजी जमीन पर किया जा रहा है। विद्यालय के पीछे के हिस्से में भी रैयतों ने विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद से निर्माण कार्य पूरी तरह बंद पड़ा है।

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प्रधानाध्यापक को भी जमीन की स्पष्ट जानकारी नहीं
विद्यालय के प्रधानाध्यापक अमलेंद्र कुमार मंडल ने बताया कि विद्यालय का भवन दान में दी गई जमीन पर स्थित है, लेकिन कुल कितनी जमीन विद्यालय के नाम पर है, इसकी उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं है।

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वहीं संवेदक का कहना है कि ग्रामीणों की सहमति से फाउंडेशन का कार्य शुरू किया गया था, जिसमें स्थानीय लोगों ने भी काम किया था। इसके बावजूद कुछ लोगों द्वारा अब विरोध किया जा रहा है।

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निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल
स्थल पर उपयोग में लाई गई ईंट और बालू की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण सामग्री निम्न स्तर की है, जो जांच का विषय है।

भवन निर्माण विभाग ने जांच का दिया आश्वासन
इस पूरे मामले पर भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता संजय कुमार ने कहा कि उन्हें निर्माण कार्य रुकने और विवाद की जानकारी मिली है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही स्थल का निरीक्षण कर पूरे मामले की जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

तीन माह से अधर में शिक्षा से जुड़ी योजना
जमीन विवाद और प्रशासनिक अस्पष्टता के कारण विद्यालय की सुरक्षा से जुड़ी यह महत्वपूर्ण योजना लंबे समय से अधर में लटकी हुई है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि पहले भूमि विवाद का स्थायी समाधान किया जाए और उसके बाद पारदर्शी तरीके से निर्माण कार्य को पूरा कराया जाए, ताकि बच्चों की सुरक्षा और विद्यालय का विकास सुनिश्चित हो सके।

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