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आयुष्मान कार्ड से इलाज को लेकर आलम हॉस्पिटल पर आरोप, प्रबंधन बोला- शर्तें पहले बताई थीं

Alam Hospital Ayushman Card dispute

परिजन का आरोप- कार्ड से इलाज की बात कहकर कराया भर्ती, नाजुक स्थिति में कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट देने का दावा

रांची: बरियातू स्थित आलम हॉस्पिटल में आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज को लेकर मरीज के परिजन और अस्पताल प्रबंधन आमने-सामने हैं। बोकारो निवासी जावेद अंसारी ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि आयुष्मान कार्ड से इलाज की सुविधा उपलब्ध होने की बात कहकर उनकी मां को अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन बाद में इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड स्वीकार करने से इनकार कर दिया गया। वहीं, अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों से इनकार करते हुए अपना पक्ष रखा है। प्रबंधन का कहना है कि मरीज के परिजनों को आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज की शर्तों और संभावित उपचार प्रक्रिया के बारे में भर्ती से पहले ही जानकारी दे दी गई थी।

परिजन का आरोप- कार्ड से इलाज की बात कहकर कराया भर्ती
जावेद अंसारी के मुताबिक, वह अपनी मां शरीफून खातून का इलाज कराने के लिए आलम हॉस्पिटल पहुंचे थे। उनका कहना है कि मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने से पहले उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से आयुष्मान कार्ड के माध्यम से इलाज की सुविधा के बारे में जानकारी ली थी। परिजन का दावा है कि उन्हें आयुष्मान कार्ड से इलाज होने की बात बताई गई, जिसके बाद उन्होंने अपनी मां को अस्पताल में भर्ती कराया। जावेद अंसारी का आरोप है कि मरीज को भर्ती करने के बाद ऑपरेशन की जरूरत बताते हुए परिजनों से करीब 1.20 लाख रुपये की मांग की गई। जब उन्होंने आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज कराने की बात कही, तो अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस इलाज को आयुष्मान योजना के तहत कवर किए जाने से इनकार कर दिया गया।

पैसे की व्यवस्था नहीं होने पर ऑपरेशन नहीं करा सके: परिजन
जावेद अंसारी का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और वह ऑपरेशन के लिए मांगी गई राशि की व्यवस्था नहीं कर सके। इसके कारण उनकी मां का ऑपरेशन नहीं हो पाया। परिजन के अनुसार, इसके बाद मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। इसी मामले को लेकर उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज के नाम पर भ्रमित करने का आरोप लगाया है।

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अस्पताल प्रबंधन ने दी सफाई
आलम हॉस्पिटल प्रबंधन ने मरीज के परिजन के आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज की शर्तों की जानकारी पहले ही दे दी गई थी। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, परिजनों को स्पष्ट रूप से बताया गया था कि यदि मरीज की स्थिति में ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ती है, तो आयुष्मान कार्ड के तहत इलाज किया जाएगा। वहीं, यदि मरीज का उपचार ऑपरेशन के बजाय किसी अन्य तरीके से किया जाता है, तो उस उपचार का खर्च आयुष्मान योजना के तहत कवर नहीं होने की स्थिति में परिजनों को स्वयं वहन करना पड़ सकता है।

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नाजुक स्थिति में कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट देने का दावा
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने ऑपरेशन के बजाय कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट देने का निर्णय लिया। प्रबंधन के मुताबिक, आयुष्मान भारत योजना के तहत संबंधित उपचार पैकेज में कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट शामिल नहीं है। इसी वजह से इस उपचार का खर्च आयुष्मान कार्ड के माध्यम से कवर नहीं किया जा सकता। अस्पताल का दावा है कि इलाज की प्रक्रिया और आयुष्मान योजना के तहत कवरेज से जुड़ी जानकारी मरीज के परिजनों को पहले ही समझा दी गई थी।

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क्या है विवाद का मुख्य बिंदु?
इस पूरे मामले में विवाद मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि मरीज को भर्ती करने से पहले आयुष्मान योजना के तहत किस उपचार की मंजूरी और कवरेज के बारे में क्या जानकारी दी गई थी। एक ओर मरीज के परिजन का दावा है कि आयुष्मान कार्ड से इलाज होने की जानकारी मिलने के बाद ही मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया। दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि आयुष्मान कार्ड से इलाज की शर्तों और ऑपरेशन तथा कंजर्वेटिव ट्रीटमेंट के बीच अंतर के बारे में परिजनों को पहले ही जानकारी दी गई थी। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति तय करने के लिए भर्ती के समय दी गई जानकारी, उपचार संबंधी मेडिकल रिकॉर्ड, आयुष्मान योजना के संबंधित पैकेज और अस्पताल की बिलिंग प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी एक पक्ष के आरोप को अंतिम तथ्य के रूप में स्थापित नहीं किया जा सकता।

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