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चुनाव आयोग की सफाई के बाद BJP का पलटवार, आदित्य साहू ने कांग्रेस से मांगी माफी

Aditya Sahu SIR controversy

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले- SIR समेत सभी प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से हुए, संवैधानिक संस्थाओं पर बेबुनियाद आरोप लगाने का लगाया आरोप

रांची: Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच झारखंड भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने कांग्रेस और विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने चुनाव आयोग की 26 सितंबर की बैठक और उसके बाद जारी संयुक्त स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कांग्रेस के आरोपों पर सवाल उठाए। आदित्य साहू ने कहा कि चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि SIR समेत आयोग के प्रमुख फैसले पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए हैं। उन्होंने कांग्रेस से संवैधानिक संस्थाओं पर लगाए गए आरोपों को लेकर माफी मांगने की मांग की।

‘भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों की राजनीति ध्वस्त’
आदित्य साहू ने आरोप लगाया कि कांग्रेस भ्रम और मनगढ़ंत कहानियों के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों की संयुक्त स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद विपक्ष के आरोपों पर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने कांग्रेस पर तीखी राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि पार्टी को संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय तथ्यों का सम्मान करना चाहिए। आदित्य साहू के बयान में कांग्रेस के खिलाफ लगाए गए “लूट, झूठ और फरेब” जैसे आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र पर भी BJP का पलटवार
आदित्य साहू ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर सामने आई राजनीतिक बहस पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह पत्र किसी नीतिगत विषय या SIR से संबंधित नहीं था। चुनाव आयोग ने 26 सितंबर के अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में भी कहा कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति या IT विभाग से संबंधित नहीं था, बल्कि ECI में प्रतिनियुक्त एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था। आयोग ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारी की ओर से जारी कार्य-वितरण आदेश दो चुनाव आयुक्तों के आदेश के बाद लागू नहीं किए गए और IT विभाग की निगरानी से जुड़ी व्यवस्था वापस नहीं ली गई थी।

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SIR के सभी प्रमुख फैसले सर्वसम्मति से लिए गए: ECI
आदित्य साहू ने 26 सितंबर की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू तथा डॉ. विवेक जोशी की बैठक के बाद आयोग की ओर से संयुक्त बयान जारी किया गया। ECI के आधिकारिक बयान के अनुसार, 24 जून 2025 को जारी SIR आदेश और इसके बाद 12 तथा 19 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जारी कार्यक्रम आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से तय किए गए थे। आयोग ने कहा कि 24 जून 2025 के SIR आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के आदेश में बरकरार रखा था।

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सुप्रीम कोर्ट के 27 मई के फैसले का भी दिया हवाला
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी SIR की वैधानिकता को लेकर फैसला दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, Association for Democratic Reforms v. Election Commission of India मामले में 27 मई 2026 को बिहार में SIR की वैधानिकता और चुनाव आयोग की शक्ति से जुड़े सवालों पर फैसला हुआ था। केंद्र सरकार की ओर से जारी आधिकारिक विवरण में कहा गया है कि अदालत ने SIR को चुनाव आयोग के वैधानिक अधिकार क्षेत्र में माना। हालांकि, अदालत के फैसले की पूरी कानूनी व्याख्या को केवल राजनीतिक बयानों के आधार पर नहीं, बल्कि मूल न्यायिक आदेश के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

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‘ECI प्रत्येक वोटर की भागीदारी सुनिश्चित कर रहा’
आदित्य साहू ने चुनाव आयोग की ओर से किए जा रहे जमीनी प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आयोग रैन बसेरों, मजदूरों, गरीब और बेघर लोगों के लिए विशेष कैंप और सहायता की व्यवस्था कर रहा है तथा छूटे हुए मतदाताओं तक पहुंचने के लिए BLO के माध्यम से फॉर्म जुटाए जा रहे हैं। 26 सितंबर के ECI के आधिकारिक निर्णय में भी कहा गया कि रात के आश्रय स्थलों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए जरूरत के अनुसार हेल्प डेस्क और विशेष कैंप लगाए जाएंगे। आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि SIR के दौरान unmapped और logical discrepancy वाले मामलों में BLO संबंधित मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज एकत्र कर उन्हें ECINet पर अपलोड कर सकते हैं।

विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने का आरोप
आदित्य साहू ने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर चुनाव हारने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष कभी EVM, कभी चुनाव आयोग और कभी अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल खड़ा करता है। हालांकि, यह आदित्य साहू का राजनीतिक आरोप है। SIR को लेकर विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची संशोधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी आपत्तियां सार्वजनिक की हैं। ECI ने 23 सितंबर को भी कहा था कि उसके बहु-सदस्यीय ढांचे में लिखित टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आंतरिक जांच-पड़ताल संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं और SIR सहित उसके फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से लिए गए हैं।

‘कांग्रेस को बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए’
आदित्य साहू ने चुनाव आयोग के ताजा बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की। उन्होंने कहा कि आयोग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण के बाद कांग्रेस को संवैधानिक संस्थाओं पर लगाए गए आरोपों पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। SIR को लेकर भाजपा और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक बहस के बीच अब आदित्य साहू का यह बयान झारखंड में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव को आगे बढ़ाता है। फिलहाल चुनाव आयोग अपने फैसलों को सर्वसम्मत बता चुका है, जबकि विपक्षी दल आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर अपने सवाल उठा रहे हैं। इस राजनीतिक विवाद के बीच 26 सितंबर का ECI स्पष्टीकरण अब बहस का एक प्रमुख आधार बन गया है।

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