झारखंड में 16 अक्टूबर से बालू का वैध उठाव शुरू, कीमतों में ₹5 हजार तक गिरावट की उम्मीद

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रांची: झारखंड में बालू की किल्लत और ऊंची कीमतों से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की रोक की अवधि खत्म होने के बाद 16 अक्टूबर 2026 से राज्य में बालू घाटों से वैध उठाव शुरू हो सकेगा। इसके साथ ही बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ने और कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद जताई जा रही है। जानकारों के मुताबिक, वैध तरीके से बालू की निकासी शुरू होने के बाद मौजूदा ऊंची कीमतों पर दबाव पड़ेगा। अनुमान है कि अलग-अलग श्रेणी और क्षेत्र के अनुसार बालू की कीमत में करीब 5,000 रुपये तक की कमी आ सकती है। इससे अवैध कारोबार और कालाबाजारी पर भी लगाम लगने की उम्मीद है।

NGT की रोक के दौरान आसमान पर पहुंचे बालू के दाम
बालू घाटों से वैध उठाव पर रोक के बावजूद निर्माण कार्यों के लिए बालू की मांग बनी रही। इसी का फायदा उठाकर रांची समेत कई इलाकों में कथित तौर पर बालू की कालाबाजारी और ऊंचे दामों पर बिक्री जारी रही। मौजूदा बाजार दर के मुताबिक, 700 सीएफटी का एक हाइवा बालू करीब 35 से 40 हजार रुपये में बिक रहा है। वहीं, करीब 180 सीएफटी टर्बो ट्रक बालू की कीमत 9,000 रुपये और 80 से 90 सीएफटी बालू की कीमत करीब 5,000 रुपये तक बताई जा रही है। वैध घाटों से निकासी शुरू होने के बाद बाजार में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। इससे अवैध स्रोतों पर निर्भरता कम हो सकती है और कीमतों में भी राहत मिल सकती है।

पहले चरण में सिर्फ 14 घाटों से होगी वैध निकासी
NGT की रोक हटने के बाद राज्य के सभी बालू घाट एक साथ चालू नहीं होंगे। पहले चरण में केवल 14 घाटों से वैध रूप से बालू का उठाव शुरू हो सकेगा। राज्य सरकार की कोशिश थी कि 15 अक्टूबर तक ज्यादा से ज्यादा घाटों को जरूरी अनुमति, CTO (Consent to Operate), CTE (Consent to Establish) और लीज डीड की प्रक्रिया पूरी कराकर संचालन योग्य बना दिया जाए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार कई संचालक CTO की प्रक्रिया में ही फंसे रहे। कुल 40 घाटों को CTO मिल चुका है, लेकिन इनमें से फिलहाल सिर्फ 14 घाटों का लीज डीड पूरा हो पाया है। इसलिए शुरुआत में इन्हीं 14 घाटों से वैध बालू निकासी संभव होगी।

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रांची में सिर्फ एक घाट से शुरू होगी निकासी
राजधानी रांची में कुल 19 बालू घाटों की नीलामी हो चुकी है। लेकिन इनमें से फिलहाल केवल एक घाट का लीज डीड पूरा हो पाया है। दूसरे घाट की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है। इसका मतलब यह है कि NGT की रोक हटने के बाद भी रांची में तत्काल सभी नीलाम किए गए घाटों से बालू उठाव शुरू नहीं हो सकेगा।

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इन जिलों के घाटों की प्रक्रिया पूरी
उपलब्ध जानकारी के अनुसार:

  • दुमका: 3 घाट
  • जमशेदपुर: 2 घाट
  • गोड्डा: 3 घाट
  • रामगढ़: 3 घाट
  • हजारीबाग: 2 घाट
  • रांची: फिलहाल 1 घाट
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इन घाटों से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद वैध बालू उठाव शुरू किया जा सकता है।

444 में से 290 बालू घाटों की नीलामी पूरी
झारखंड में कुल 444 चिन्हित बालू घाट हैं। इनमें से अब तक 290 घाटों की नीलामी पूरी होने की जानकारी है। इनमें करीब 40 घाट ऐसे हैं, जहां ग्राम सभा समेत अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के साथ पर्यावरणीय स्वीकृति भी मिल चुकी है। हालांकि, घाटों के वास्तविक संचालन के लिए लीज डीड और अन्य वैधानिक प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी है। राज्य के रांची, खूंटी, गिरिडीह, जामताड़ा, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और धनबाद समेत कई जिलों में नीलामी प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।

सरकार को 473 करोड़ रुपये से ज्यादा राजस्व की उम्मीद
यदि नीलाम किए गए सभी 290 बालू घाटों का लीज डीड पूरा हो जाता है, तो राज्य सरकार को एकमुश्त करीब 473.31 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने की संभावना बताई गई है। इससे न केवल सरकार को राजस्व मिलेगा, बल्कि वैध खनन और आपूर्ति व्यवस्था मजबूत होने से निर्माण क्षेत्र को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

कालाबाजारी पर कितना लगेगा अंकुश?
बालू की वैध आपूर्ति शुरू होने का सबसे बड़ा असर इसकी उपलब्धता पर पड़ सकता है। अभी तक सीमित वैध आपूर्ति और लगातार मांग के कारण बाजार में कीमतें काफी ऊंची बनी हुई हैं। यदि ज्यादा संख्या में बालू घाट संचालन में आते हैं और नियमित तरीके से बाजार तक बालू पहुंचता है, तो अवैध आपूर्ति करने वालों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, शुरुआती चरण में केवल 14 घाटों से निकासी शुरू होने के कारण कीमतों में तत्काल कितनी गिरावट आएगी, यह आपूर्ति की वास्तविक मात्रा पर निर्भर करेगा। फिलहाल लोगों की नजर इस बात पर है कि 16 अक्टूबर से वैध उठाव शुरू होने के बाद बाजार में बालू की उपलब्धता कितनी बढ़ती है और हाइवा व टर्बो ट्रक की कीमतों में कितनी राहत मिलती है।

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