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SIR विवाद पर JMM का आंदोलन, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 28 सितंबर को प्रदर्शन

JMM Agitation September 28

JMM महासचिव विनोद पांडेय का दावा- दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार लिखित आपत्ति जताई

पार्टी राष्ट्रपति से कार्रवाई की मांग करेगी

रांची: चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय के अनुसार, 28 सितंबर को झारखंड के सभी जिला मुख्यालयों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया जाएगा। JMM ने इसके साथ ही राष्ट्रपति के नाम मांग पत्र सौंपकर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें पद से हटाने की मांग रखने की बात कही है।

28 सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन
JMM के अनुसार, 28 सितंबर को पार्टी की सभी जिला समितियां अपने-अपने जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम आयोजित करेंगी। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया जाएगा। पार्टी ने बताया कि कार्यक्रम में केंद्रीय समिति के पदाधिकारी और सदस्य, सांसद, विधायक, विभिन्न स्तर के पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता तथा अलग-अलग वर्ग संगठनों के सदस्य शामिल होंगे। पार्टी की ओर से राष्ट्रपति के नाम मांग भी रखी जाएगी, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग शामिल होगी।

14 लिखित आपत्तियों का मुद्दा उठाया
JMM महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं। मीडिया रिपोर्टों में भी दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कम से कम 14 लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। विनोद पांडेय ने इसी आधार पर चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं।

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SIR और वोटर लिस्ट को लेकर JMM के आरोप
JMM का आरोप है कि चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद मतदाता सूची के Special Intensive Revision से जुड़े फैसले लिए गए और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने सहित कुछ प्रक्रियाओं में बदलाव किए गए। पार्टी ने इसे चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। हालांकि, इन आरोपों को JMM के राजनीतिक दावे के रूप में देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR सहित उसके अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं। आयोग से जुड़े सूत्रों ने यह भी कहा कि आंतरिक प्रक्रिया में अलग-अलग टिप्पणियां या सुझाव सामने आना संभव है और इससे अंतिम निर्णय की स्थिति अलग से तय होती है।

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JMM ने राष्ट्रपति से कार्रवाई की मांग का ऐलान किया
विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि चुनाव आयोग देश की संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज को लेकर उठ रहे सवालों पर स्पष्टता जरूरी है। JMM ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन करने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि 28 सितंबर के कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति के नाम मांग पत्र सौंपा जाएगा। JMM की यह मांग फिलहाल एक राजनीतिक दल की मांग है। मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के तहत होती है।

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चुनाव आयोग की मौजूदा संरचना
चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वर्तमान में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त, जबकि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी चुनाव आयुक्त हैं। चुनाव आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक प्राधिकरण है, जो देश में चुनावों के संचालन और मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की देखरेख करता है। इसी वजह से आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर सामने आए सवालों ने राजनीतिक बहस को तेज किया है।

28 सितंबर के आंदोलन पर नजर
JMM के ऐलान के बाद अब 28 सितंबर को राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर होने वाले कार्यक्रम पर नजर रहेगी। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ उसकी मांगों को लेकर किया जा रहा है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से अंतिम निर्णयों को तीनों आयुक्तों की मंजूरी से लिए जाने की बात कही गई है। ऐसे में 28 सितंबर का आंदोलन झारखंड में SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रही राजनीतिक बहस का अगला बड़ा घटनाक्रम होगा।

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