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JSSC CGL पेपर लीक में बड़ा खुलासा! काठमांडू से दिल्ली तक नेटवर्क, लाखों में नौकरी का सौदा

JSSC CGL Scam

लाखों रुपये में तय होता था सफलता का ‘रेट’, परीक्षा संचालन में एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल

रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा के पेपर लीक और कथित धांधली मामले की जांच कर रही CID जैसे-जैसे अपनी पड़ताल आगे बढ़ा रही है, मामले की परतें खुलती जा रही हैं। जांच में कथित तौर पर एक ऐसे संगठित नेटवर्क का पता चला है, जो अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेकर परीक्षा में सफलता दिलाने का दावा करता था। जांच एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क में प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने से लेकर उत्तर रटवाने और परीक्षा केंद्र के भीतर कथित तौर पर नकल कराने तक के अलग-अलग इंतजाम किए जाते थे। CID की जांच में सामने आई जानकारी के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क के तार झारखंड के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और नेपाल तक जुड़े हुए थे। गिरोह से जुड़े लोगों ने अलग-अलग शहरों में कथित तौर पर सुरक्षित ठिकाने बनाए थे, जहां चयन की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को ले जाकर प्रश्न और उत्तर याद करवाए जाते थे।

लाखों रुपये में तय होता था सफलता का ‘रेट’
जांच में कथित तौर पर यह बात सामने आई है कि सिंडिकेट ने परीक्षा में सफलता दिलाने के लिए अलग-अलग स्तर पर रकम तय कर रखी थी। प्रश्न पत्र उपलब्ध कराने, प्रश्नों के उत्तर पहले से बताने, अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाने और परीक्षा केंद्र पर कथित नकल की व्यवस्था करने के लिए अलग-अलग रकम मांगी जाती थी। यानी पूरा नेटवर्क किसी एक तरीके पर निर्भर नहीं था, बल्कि अभ्यर्थियों की जरूरत और कथित सुविधा के हिसाब से अलग-अलग पैकेज के जरिए काम करता था। CID इस मामले में अब तक दो दर्जन से अधिक दलालों, फर्जी अभ्यर्थियों और कथित एजेंटों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क के आर्थिक लेनदेन, अभ्यर्थियों से संपर्क और परीक्षा प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका को भी खंगाल रही है।

परीक्षा संचालन में एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल
CID की जांच में परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी से जुड़ा एक अहम पहलू भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, JSSC ने परीक्षा संचालन की आधिकारिक जिम्मेदारी वेबेल एजेंसी को दी थी। जांच के अनुसार, आरोप है कि वेबेल ने JSSC की अनुमति के बिना प्रश्न पत्रों की छपाई और उन्हें परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित पहुंचाने का काम ICN India Private Limited को सौंप दिया था। जांच एजेंसी को कथित तौर पर संदेह है कि इसी प्रिंटिंग प्रेस से प्रश्न पत्र बाहर निकला और बाद में सिंडिकेट तक पहुंचा। इसके बाद लीक प्रश्न पत्र को आगे अलग-अलग लोगों और अभ्यर्थियों तक पहुंचाए जाने का आरोप है। हालांकि, इस पूरे मामले में किस व्यक्ति की कितनी भूमिका थी और प्रश्न पत्र लीक होने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग सीधे तौर पर शामिल थे, इसका अंतिम निर्धारण जांच और अदालत की कार्यवाही के बाद ही होगा।

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छह शहरों में बनाए गए थे कथित सेफ हाउस
CID की जांच में मुख्य सेटर के रूप में सामने आए मिथिलेश सिंह और उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों के बारे में भी कई महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। जांच के मुताबिक, सिंडिकेट ने अभ्यर्थियों को एक जगह इकट्ठा करने के लिए कई शहरों में कथित तौर पर सेफ हाउस बनाए थे। इनमें बोकारो के दुग्धा, आसनसोल के नियामतपुर स्थित मैरिज हॉल और होटल, पटना, हजारीबाग और धनबाद जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया है। इन ठिकानों पर कथित तौर पर अभ्यर्थियों को बुलाया जाता था और उन्हें लीक प्रश्न पत्र से जुड़े सवाल-जवाब याद करवाए जाते थे।

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मुजफ्फरपुर से काठमांडू तक पहुंचा नेटवर्क
जांच में नेटवर्क की पहुंच झारखंड से बाहर तक होने का भी दावा किया गया है। CID के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों को मुजफ्फरपुर, दिल्ली और नेपाल की राजधानी काठमांडू तक ले जाने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि इन स्थानों पर भी अभ्यर्थियों को कथित रूप से प्रश्न और उत्तर याद करवाने की व्यवस्था की गई थी। अगर जांच में यह जानकारी पुष्ट होती है तो यह मामला केवल राज्य स्तरीय परीक्षा धांधली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क की तस्वीर सामने आ सकती है।

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पूरक चार्जशीट की तैयारी
JSSC CGL पेपर लीक मामले की जांच अब अंतिम चरण में पहुंचने का दावा किया जा रहा है। CID अगले महीने अदालत में एक और पूरक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। संभावित पूरक चार्जशीट में परीक्षा संचालन से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों, प्रिंटिंग प्रेस से जुड़े कर्मचारियों, सिंडिकेट के कथित दलालों और कथित तौर पर अवैध तरीके से नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों की भूमिका को शामिल किया जा सकता है। जांच एजेंसी इन आरोपों के समर्थन में उपलब्ध दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य, लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों को अदालत के सामने रखने की तैयारी कर रही है।

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जांच के बाद साफ होगी किसकी कितनी भूमिका
JSSC CGL पेपर लीक मामला झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर पहले से उठ रहे सवालों के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लाखों रुपये लेकर नौकरी दिलाने के कथित नेटवर्क, प्रश्न पत्र की सुरक्षा, प्रिंटिंग एजेंसी की भूमिका और परीक्षा केंद्र तक पहुंची कथित गड़बड़ियों की जांच अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। हालांकि, CID जांच में सामने आए आरोपों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। किस आरोपी की भूमिका क्या थी और कौन दोषी है, इसका अंतिम फैसला अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

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