राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के CEO पद के लिए पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने किया आवेदन, 18 जुलाई को होंगे इंटरव्यू
रांची/अयोध्या: उत्तर प्रदेश कैडर के चर्चित पूर्व आईपीएस अधिकारी और झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार के बड़े भाई अमिताभ ठाकुर ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद के लिए आवेदन किया है। ट्रस्ट द्वारा आवेदन आमंत्रित किए जाने के बाद उन्होंने अपना आवेदन भेजा है। इस पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया ऐसे समय शुरू हुई है जब राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
ट्रस्ट ने मांगे हैं आवेदन, 18 जुलाई को होगा इंटरव्यू
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से CEO पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। ट्रस्ट के अनुसार, पात्र अभ्यर्थियों के साक्षात्कार 18 जुलाई को शाम 4 बजे आयोजित किए जाएंगे। CEO पद के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद कई नामों की चर्चा है, जिनमें पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर भी शामिल हैं।
तीन दशक के प्रशासनिक अनुभव का दिया हवाला
अपने आवेदन में अमिताभ ठाकुर ने भारतीय पुलिस सेवा और लोक प्रशासन में करीब तीन दशक के अनुभव का उल्लेख किया है। उन्होंने सुरक्षा प्रबंधन, सतर्कता, विधिक एवं प्रशासनिक मामलों, कार्मिक प्रशासन और संस्थागत समन्वय जैसे क्षेत्रों में अपने कार्य अनुभव को प्रमुखता से रखा है। उन्होंने आवेदन में यह भी कहा है कि वे हिंदू सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े रहे हैं और भगवान श्रीराम के मर्यादा, न्याय, कर्तव्यनिष्ठा और लोककल्याण के आदर्शों के प्रति गहरा सम्मान रखते हैं।
कौन हैं अमिताभ ठाकुर?
अमिताभ ठाकुर उत्तर प्रदेश कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। वर्तमान में वह आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान वे कई चर्चित मामलों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहे।
कई विवादों में भी रहे चर्चा में
वर्ष 2015 में अमिताभ ठाकुर ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने उन्हें फोन पर धमकी दी थी। उन्होंने कथित बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सार्वजनिक की थी, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना। इसी दौरान एक महिला ने अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर पर नौकरी का झांसा देकर दुष्कर्म कराने का आरोप लगाया था। बाद की पुलिस जांच में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्हें क्लीन चिट दी गई और शिकायतकर्ता के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।
अनिवार्य सेवानिवृत्ति और कानूनी लड़ाई
वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने उन्हें “जनहित” का हवाला देते हुए अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दे दी थी। अमिताभ ठाकुर ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध बताया था, जबकि सरकार ने इसे विभागीय जांचों के आधार पर लिया गया निर्णय बताया। उनके खिलाफ लंबित विभागीय मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2026 में छह महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।
CEO पद को लेकर बढ़ी चर्चा
राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट में CEO पद के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होने के बाद इस नियुक्ति पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रस्ट की चयन समिति किस उम्मीदवार को इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुनती है।






