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कोइरी-कुर्मी एकजुट होकर अधिकार और सम्मान के लिए लड़ेंगे, रांची में होगा बड़ा सम्मेलन

कोइरी कुर्मी महासभा

पूर्व सांसद रामटहल चौधरी और पूर्व विधायक जय प्रकाश वर्मा के संयुक्त नेतृत्व में आंदोलन की तैयारी

रांची: झारखंड में कोइरी और कुर्मी समुदाय के अधिकारों और सम्मान की लड़ाई को लेकर एक नई रणनीति बन रही है। सोमवार को कोइरी-कुर्मी महासभा, झारखंड प्रदेश की महत्वपूर्ण बैठक विधानसभा अतिथि भवन में आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता पूर्व विधायक प्रो. जय प्रकाश वर्मा ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य समुदाय की एकता, उपेक्षा के खिलाफ आवाज बुलंद करना और आने वाले दिनों में संगठित आंदोलन की रूपरेखा तय करना रहा।

बैठक में उठी उपेक्षा और हक छिनने की बात
बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि कोइरी और कुर्मी समुदाय कृषक समाज से जुड़े मेहनतकश लोग हैं, जिनका स्वभाव, संस्कृति और जीवनशैली काफी हद तक समान है। बावजूद इसके, वर्षों से इन समुदायों के साथ उपेक्षा होती रही है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि इनके हक और अधिकार लगातार छीने जा रहे हैं, और राजनीतिक-सामाजिक दोनों स्तरों पर इन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है।

“हमारे समुदाय ने हमेशा समाज और राज्य के विकास में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन बदले में हमें हमारा उचित सम्मान और अधिकार नहीं मिला। अब समय आ गया है कि हम एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें।”: प्रो. जय प्रकाश वर्मा, पूर्व विधायक

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सम्मेलन का ऐलान
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि रांची में एक भव्य सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन का नेतृत्व झारखंड के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रामटहल चौधरी एवं पूर्व विधायक प्रो. जय प्रकाश वर्मा संयुक्त रूप से करेंगे। सम्मेलन में झारखंड के विभिन्न जिलों से कोइरी और कुर्मी समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल होंगे।

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इस सम्मेलन का उद्देश्य न केवल समुदाय को संगठित करना है, बल्कि सरकार और प्रशासन को यह संदेश देना भी है कि कोइरी-कुर्मी समाज अब चुप नहीं बैठेगा।

कृषक समाज की मजबूती पर जोर
बैठक में उपस्थित नेताओं ने कहा कि कोइरी और कुर्मी समाज मूलतः किसान और खेती-किसानी से जुड़े लोग हैं, जिन्होंने झारखंड की अर्थव्यवस्था और खाद्यान्न सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। फिर भी, सरकारी योजनाओं में इनके हितों की अनदेखी की जाती है।

“कृषक समाज को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। हम अब इस मानसिकता को तोड़ेंगे और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे।”: उपेंद्र कुशवाहा

बैठक में मौजूद प्रमुख लोग
बैठक में विजय महतो, लालचंद महतो, उपेंद्र नारायण सिंह, संजय कुशवाहा, उपेंद्र कुशवाहा, प्रो. विवेकानंद कुशवाहा, अशोक सिन्हा, महावीर कुर्मी, मनोज कुशवाहा, महेश्वर चौधरी, अजय दांगी सहित कई अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने अपने विचार रखे और संगठन की मजबूती के लिए ज़मीनी स्तर पर अभियान चलाने का संकल्प लिया।

आगे की रणनीति
बैठक में यह भी तय किया गया कि सम्मेलन से पहले प्रत्येक जिले में जन-जागरण अभियान चलाया जाएगा, जिसमें कोइरी और कुर्मी समाज के लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जाएगा। गांव-गांव और प्रखंड स्तर पर छोटी-छोटी बैठकें की जाएंगी, ताकि हर व्यक्ति तक यह संदेश पहुंचे कि उनका भविष्य उनकी एकता में है।

सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कोइरी और कुर्मी समाज एकजुट होकर आंदोलन करता है, तो झारखंड की राजनीति में इसका बड़ा असर पड़ सकता है। दोनों समुदायों की संयुक्त जनसंख्या कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

“यह सिर्फ सामाजिक आंदोलन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। हम अपने हक और सम्मान के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेंगे।”: रामटहल चौधरी पूर्व सांसद

रांची में हुई कोइरी-कुर्मी महासभा की यह बैठक झारखंड के सामाजिक समीकरणों में एक नई हलचल लेकर आई है। आने वाले समय में होने वाला सम्मेलन इस आंदोलन की दिशा तय करेगा। एकता, संघर्ष और सम्मान — यही तीन स्तंभ इस अभियान की नींव होंगे।

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