सरला बिरला पब्लिक स्कूल का वार्षिकोत्सव ‘श्रद्धा: विरासत की स्वर्णिम गाथा’ का भव्य आयोजन
रांची: सरला बिरला पब्लिक स्कूल में वार्षिक समारोह ‘श्रद्धा-2026’ का आयोजन अत्यंत भव्यता, सांस्कृतिक गरिमा और भावनात्मक गहराई के साथ किया गया। “विरासत की स्वर्णिम गाथा – सत्य की विजय, धर्म का उदय” विषय पर आधारित इस कार्यक्रम ने भारतीय सभ्यता, शाश्वत मूल्यों और नैतिक चेतना की यात्रा को प्रभावशाली मंचन के माध्यम से प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथियों के आत्मीय स्वागत, मैत्री बंधन और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिससे ज्ञान, सद्बुद्धि और समृद्धि के प्रतीकात्मक संदेश के साथ समारोह की शुरुआत हुई। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सरोजनी लकड़ा, कमांडेंट, झारखंड आर्म्ड पुलिस-02 उपस्थित रहीं। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. प्रो. गोपाल पाठक और डॉ. प्रो. जगनाथन चोकलिंगम की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शैक्षणिक गरिमा को और ऊँचाई दी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत संगीतमय श्रद्धांजलि ‘स्वरांजलि’ से हुई। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने नृत्य, नाट्य, संगीत और सजीव झांकियों के माध्यम से रामायण और महाभारत के आदर्शों, आचार्य चाणक्य की नीति, मौर्य साम्राज्य की भव्यता, सम्राट अशोक के वैचारिक परिवर्तन तथा भगवान बुद्ध के शांति और करुणा के संदेश को मंच पर जीवंत कर दिया। यह प्रस्तुति शौर्य से मोक्ष तक की वैचारिक यात्रा का सशक्त प्रतीक बनी।
कार्यक्रम में भारत की एकता में विविधता और विभिन्न संस्कृतियों के सौहार्दपूर्ण सहअस्तित्व को प्रभावी ढंग से दर्शाया गया। “ऑपरेशन सिंदूर” के मंचन ने कठिन परिस्थितियों में राष्ट्र के अदम्य साहस और संकल्प को रेखांकित किया। समापन प्रस्तुति में आत्मनिर्भर और विकसित भारत की परिकल्पना प्रस्तुत करते हुए यह संदेश दिया गया कि अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ विद्यार्थियों के प्रदर्शन की मुक्त कंठ से सराहना की।
मुख्य अतिथि डॉ. सरोजनी लकड़ा ने विद्यार्थियों के अनुशासन, आत्मविश्वास और मंचीय उत्कृष्टता की प्रशंसा करते हुए मूल्य-आधारित शिक्षा के महत्व पर बल दिया। विशिष्ट अतिथियों ने भी परंपरा और आधुनिकता के संतुलित समन्वय के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु विद्यालय के प्रयासों की सराहना की।
विद्यालय की प्राचार्या मनीषा शर्मा ने कहा कि ‘श्रद्धा-2026’ भारत की सभ्यतागत यात्रा को प्राचीन ज्ञान से लेकर 2047 के विकसित भारत के स्वप्न तक प्रभावी रूप से प्रस्तुत करता है, जिसमें महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए शैक्षणिक, खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में विद्यालय की उपलब्धियों को साझा किया।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ हुआ, जिसने पूरे सभागार को गर्व और राष्ट्रीय एकता की भावना से भर दिया।






