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नीति आयोग में हेमंत सोरेन की बड़ी मांग: जल जीवन मिशन के 6,000 करोड़ और कोयला कंपनियों का 1.36 लाख करोड़ बकाया दिलाएं

Hemant Soren at NITI Aayog

विकसित भारत 2047 के विजन के साथ झारखंड को मैन्युफैक्चरिंग और नॉलेज इकोनॉमी बनाने का रखा रोडमैप

नई दिल्ली/रांची: नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के विकास का व्यापक विजन प्रस्तुत करते हुए केंद्र सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि झारखंड केवल खनिज संपदा का स्रोत नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत-2047’ का एक मजबूत साझेदार बनना चाहता है। मुख्यमंत्री ने केंद्र से जल जीवन मिशन (JJM) की लंबित 6,000 करोड़ रुपये की राशि जारी करने और कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, सिंचाई, उद्योग और आधारभूत संरचना के विकास के लिए विशेष केंद्रीय सहयोग का आग्रह किया।

झारखंड को बनाना है मैन्युफैक्चरिंग और नॉलेज इकोनॉमी
नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2047 तक झारखंड को केवल खनिज आधारित अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि Manufacturing Hub, Green Economy और Knowledge Economy के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि राज्य ने देश की औद्योगिक प्रगति में कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य खनिजों के जरिए अहम योगदान दिया है, लेकिन इसके साथ विस्थापन और नक्सलवाद जैसी चुनौतियों का भी सामना किया है। अब खनिज संपदा को शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास से जोड़कर समावेशी विकास सुनिश्चित किया जाएगा।

शिक्षा और आंगनबाड़ी पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 38 हजार आंगनबाड़ी केंद्रों में से करीब 15 हजार के पास अपना भवन नहीं है, फिर भी पोषण अभियान और ‘सामार’ योजना के जरिए कुपोषण और स्टंटिंग में उल्लेखनीय कमी लाई गई है। उन्होंने बताया कि सरकार अपने संसाधनों से 5 हजार नए आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण करा रही है और सभी बच्चों को प्रतिदिन अंडा उपलब्ध कराया जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के 80 CM School of Excellence से अब छात्र IIT, मेडिकल और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में चयनित हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र से पीएम श्री स्कूल और केंद्रीय विद्यालयों की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया।

हर साल एक लाख युवाओं को रोजगार से जोड़ रहा झारखंड
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड कौशल विकास के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत अब तक 6.76 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि बिरसा कौशल विकास कार्यक्रम के जरिए अधिकांश प्रखंडों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य हर वर्ष एक लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ रहा है और AI, EV, Robotics जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

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स्वास्थ्य और खेल क्षेत्र के लिए भी मांगा सहयोग
मुख्यमंत्री ने बताया कि पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए राज्य में 1,276 दवा दुकानें संचालित की जा रही हैं। उन्होंने नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति और मेडिकल सीटों में वृद्धि की मांग की। खेल क्षेत्र का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हॉकी, फुटबॉल, तीरंदाजी और एथलेटिक्स में झारखंड राष्ट्रीय पहचान बना चुका है। उन्होंने राज्य में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी तथा हॉकी और फुटबॉल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने के लिए केंद्र से सहयोग मांगा।

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जल, कृषि और सिंचाई पर भी रखा फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 10 लाख से अधिक पोषण वाटिकाएं विकसित की गई हैं और बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत 1.5 लाख एकड़ क्षेत्र में फलदार पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन की लंबित राशि जारी होने से ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं को गति मिलेगी और सिंचाई परियोजनाओं को भी मजबूती मिलेगी।

हेमंत सोरेन के संबोधन की 5 बड़ी बातें

  • झारखंड को 2047 तक Manufacturing Hub और Knowledge Economy बनाने का लक्ष्य।
  • 15 हजार आंगनबाड़ी भवनों की कमी के बावजूद पोषण सुधार में उल्लेखनीय सफलता।
  • 6.76 लाख युवाओं को कौशल प्रशिक्षण, AI और Robotics पर विशेष फोकस।
  • पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सुविधाएं और AI आधारित डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल की तैयारी।
  • केंद्र से 6,000 करोड़ रुपये JJM फंड और 1.36 लाख करोड़ रुपये कोयला बकाया की मांग।

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