होर्मुज संकट से भारत पर खतरा: LPG और पेट्रोल-डीजल महंगे होने की आशंका
भारत के 90% LPG आयात का रास्ता होर्मुज से गुजरता है, लंबा संकट बढ़ा सकता है दबाव
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अनिश्चितता बढ़ गई है। इसका सीधा असर भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है, तो भारत की एलपीजी, कच्चे तेल और एलएनजी आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा मार्गों में से एक है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा कच्चा तेल, एलपीजी और एलएनजी इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे देशों पर काफी हद तक निर्भर है। इन देशों से आने वाली अधिकांश गैस और तेल खेप होर्मुज मार्ग से होकर गुजरती है।
LPG सप्लाई पर सबसे पहले पड़ सकता है असर
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार भारत के कुल एलपीजी आयात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से आता है। यदि जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है या परिवहन लागत बढ़ती है, तो एलपीजी की उपलब्धता और कीमत दोनों पर असर पड़ सकता है। हालांकि भारत के पास रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक आपूर्ति प्रबंधन की व्यवस्था मौजूद है, लेकिन लंबे समय तक संकट रहने की स्थिति में दबाव बढ़ सकता है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर भी नजर
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। यदि वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका असर भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तत्काल किसी बड़े संकट की स्थिति नहीं है, लेकिन हालात लंबे समय तक बिगड़ते हैं तो ईंधन बाजार पर असर देखने को मिल सकता है।
सरकार और तेल कंपनियां कर रहीं निगरानी
केंद्र सरकार और तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। ऊर्जा मंत्रालय पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि देश के पास पर्याप्त तेल और गैस भंडार मौजूद हैं तथा आपूर्ति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक योजनाएं तैयार हैं। फिलहाल आम उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन वैश्विक घटनाक्रम पर भारत की नजर बनी हुई है।




