पेपर लीक पर मोदी का मास्टरस्ट्रोक! नंदन नीलेकणि की अगुवाई में बनेगी हाई-पावर्ड टास्क फोर्स, परीक्षा प्रणाली में होंगे बड़े बदलाव
नई दिल्ली: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक को लेकर उठे विवाद और परीक्षा सुधार की मांगों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ा ऐलान किया है। रविवार को सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने बताया कि देश की परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। प्रधानमंत्री का यह संदेश उस समय आया है जब हाल ही में पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के आंदोलन और परीक्षा सुधारों की मांग देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से सीधा संवाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम अपनी तीसरी इंस्टाग्राम रील जारी करते हुए सीधे युवाओं और Gen Z से संवाद किया। वीडियो में उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है।
उन्होंने कहा,
“भारत सरकार छात्रों के भविष्य के लिए लगातार कई कदम उठा रही है। जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, वे जेल में हैं। हमने पहले ही फास्ट-ट्रैक कोर्ट बना दिए हैं। अब हम संसद में एक नया कानून लाने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें पेपर लीक जैसे अपराधों के खिलाफ और कड़े कानूनी प्रावधान होंगे।”
नंदन नीलेकणि की अगुवाई में बनेगी टास्क फोर्स
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि केवल दोषियों पर कार्रवाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार जरूरी हैं।
उन्होंने घोषणा की कि—
“हमारी परीक्षा प्रणाली भरोसेमंद, पारदर्शी और तकनीक आधारित होनी चाहिए। इसे ध्यान में रखते हुए दुनिया के जाने-माने टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का निर्णय लिया गया है।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह टास्क फोर्स परीक्षा सुधारों पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके आधार पर सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
क्या होगा टास्क फोर्स का काम?
सरकार के अनुसार प्रस्तावित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का उद्देश्य देश की परीक्षा प्रणाली को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना है। समिति निम्नलिखित बिंदुओं पर काम करेगी—
- प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के सुझाव।
- पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए तकनीकी समाधान।
- परीक्षा प्रक्रिया में आधुनिक डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बेहतर उपयोग की रूपरेखा।
- प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, वितरण और निगरानी प्रणाली को मजबूत करने के उपाय।
- परीक्षा संचालन के लिए दीर्घकालिक सुधारों की सिफारिश।
सरकार का कहना है कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर भविष्य की परीक्षाओं में व्यापक सुधार लागू किए जाएंगे।
समिति में कौन-कौन होंगे शामिल?
सरकार द्वारा प्रस्तावित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें—
- नंदन नीलेकणि – प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ एवं टास्क फोर्स प्रमुख।
- एस. सोमनाथ – इसरो के पूर्व अध्यक्ष।
- तपन डेका – पूर्व आईबी निदेशक।
- वी. कामकोटि – आईआईटी मद्रास (चेन्नई) के निदेशक।
- अनिता करवाल – पूर्व शिक्षा सचिव।
- अमृत लाल मीणा – प्रशासनिक एवं लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ।
सरकार का मानना है कि तकनीक, सुरक्षा, शिक्षा और प्रशासन के अनुभवी विशेषज्ञों के साथ यह समिति परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार का रोडमैप तैयार करेगी।
परीक्षा सुधारों पर सरकार का फोकस
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल पेपर लीक रोकना नहीं, बल्कि छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा मजबूत करना भी है। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित निगरानी, कड़े कानूनी प्रावधान और प्रशासनिक सुधारों के जरिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी, जिसमें निष्पक्षता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
छात्रों की नजर अब सरकार के अगले कदम पर
पेपर लीक की घटनाओं के बाद देशभर में परीक्षा सुधार की मांग लगातार उठती रही है। ऐसे में नंदन नीलेकणि की अगुवाई में हाई-पावर्ड टास्क फोर्स की घोषणा को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की नजर इस बात पर रहेगी कि समिति कितनी जल्दी अपनी रिपोर्ट देती है और सरकार उसकी सिफारिशों को किस तरह लागू करती है।






