नौकरी वापसी की लड़ाई तेज: धुर्वा में कर्मचारियों का महाजुटान, अब कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे
रांची: झारखंड सरकार के आदेश के बाद सेवा से हटाए गए कर्मचारियों ने अब अपनी नौकरी वापस पाने की लड़ाई को निर्णायक मोड़ देने का फैसला किया है। राजधानी रांची के धुर्वा गोल चक्कर मैदान में राज्यभर से पहुंचे प्रभावित कर्मचारियों का बड़ा महाजुटान हुआ। सुबह 10 बजे से ही अलग-अलग जिलों से कर्मचारी मैदान में पहुंचने लगे और अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई। महाजुटान के दौरान कर्मचारियों ने सभा कर आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि नौकरी वापसी की लड़ाई अब न्यायालय के माध्यम से आगे बढ़ाई जाएगी। इसके लिए प्रभावित कर्मचारियों से वकालतनामा भराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई।
नौकरी वापसी के लिए कानूनी लड़ाई का ऐलान
कर्मचारियों का कहना है कि सरकार के फैसले से हजारों परिवारों के सामने रोजगार और भविष्य का संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में वे पीछे हटने के बजाय कानूनी तरीके से अपनी बात अदालत के सामने रखने की तैयारी कर रहे हैं। महाजुटान में शामिल कर्मचारियों ने कहा कि उन्होंने अपनी योग्यता और प्रक्रिया के जरिए नौकरी हासिल की थी। अब सेवा समाप्त होने के बाद वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायालय का रुख करेंगे।
राज्यभर से पहुंचे कर्मचारी
धुर्वा गोल चक्कर मैदान में हुए इस महाजुटान में झारखंड के अलग-अलग जिलों से प्रभावित कर्मचारी शामिल हुए। अलग-अलग सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों ने एक मंच पर आकर अपनी मांगों को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई। सभा के दौरान कर्मचारियों ने एकजुट रहने का संकल्प भी लिया। उनका कहना था कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या एक जिले की नहीं, बल्कि उन सभी कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ी है, जो सरकार के फैसले से प्रभावित हुए हैं।
आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बनी कमेटी
महाजुटान में आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए कर्मचारियों की एक संयुक्त कमेटी का गठन किया गया। इसके साथ ही जिलावार जिम्मेदारियां भी तय की गईं। आंदोलन के अलग-अलग पहलुओं के लिए अलग-अलग कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। भोजन, टेंट और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर भी टीम बनाई गई है, ताकि आने वाले दिनों में आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सके।
बोले कर्मचारी- नौकरी बहाल होने तक संघर्ष जारी रहेगा
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि वे अपनी नौकरी की बहाली तक संघर्ष जारी रखेंगे। उनका कहना है कि पहले भी उन्होंने संघर्ष और मेहनत के बाद नौकरी हासिल की थी और अब उसे बचाने के लिए भी वे लोकतांत्रिक और कानूनी रास्ते से लड़ाई लड़ेंगे। महाजुटान में मौजूद कर्मचारियों ने कहा कि जब तक उनकी सेवाओं को लेकर कोई समाधान नहीं निकलता, तब तक वे आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। कर्मचारियों ने रोजाना जुटने और आंदोलन को लगातार आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
अब अदालत पर टिकी नजर
धुर्वा में हुए इस महाजुटान के बाद कर्मचारियों की लड़ाई अब सड़क से अदालत तक पहुंचने जा रही है। वकालतनामा भरने की प्रक्रिया और संयुक्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी के बीच अब सभी की नजर न्यायालय में होने वाली सुनवाई पर रहेगी। सरकार के फैसले से प्रभावित कर्मचारियों के लिए यह महाजुटान केवल विरोध का मंच नहीं, बल्कि अपनी नौकरी और भविष्य की लड़ाई को संगठित तरीके से आगे बढ़ाने की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में अदालत का रुख और सरकार की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले की दिशा तय करने में अहम होगी।




