JSSC-CGL विवाद: प्रोजेक्ट भवन के बाहर पूरी रात डटे चयनित अभ्यर्थी, सेवा सुरक्षा की मांग पर अड़े
रांची: JSSC-CGL परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के विरोध में चयनित अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। अपनी सेवा सुरक्षा और नियुक्ति बरकरार रखने की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने गुरुवार की पूरी रात प्रोजेक्ट भवन के बाहर सड़क पर बिताई। दिनभर प्रदर्शन के बाद भी अभ्यर्थी मौके से नहीं हटे और खुले आसमान के नीचे सचिवालय के मुख्य द्वार के सामने डटे रहे। अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी नियुक्ति रद्द करने का फैसला उनके भविष्य पर सीधा असर डाल रहा है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार की ओर से उनकी सेवाओं को लेकर लिखित और स्पष्ट आश्वासन नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
खुले आसमान के नीचे गुजारी रात
दिनभर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने के बाद रात होने पर भी अभ्यर्थियों ने धरना समाप्त नहीं किया। बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थी प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार के बाहर सड़क पर ही रुके रहे। कई प्रदर्शनकारी वहीं सोते नजर आए। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अपनी मांग को सरकार तक मजबूती से पहुंचाने के लिए दिन-रात सचिवालय के बाहर मौजूद रहेंगे।
नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर सवाल
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद नियुक्ति पाई और वर्तमान में अलग-अलग सरकारी विभागों में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनका सवाल है कि यदि किसी परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितता की जांच हो रही है, तो उसका असर सभी चयनित अभ्यर्थियों पर एक साथ क्यों डाला जा रहा है। अभ्यर्थियों की मांग है कि दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई हो, लेकिन निर्दोष चयनित कर्मियों की सेवा प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
लिखित आश्वासन की मांग
अभ्यर्थियों ने कहा कि केवल मौखिक आश्वासन से उनकी चिंता दूर नहीं होगी। उन्हें सरकार की ओर से स्पष्ट लिखित आदेश चाहिए, जिसमें उनकी सेवा सुरक्षा को लेकर स्थिति साफ हो। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, कई अभ्यर्थी नौकरी मिलने के बाद अन्य अवसर छोड़कर सरकारी सेवा में शामिल हुए हैं। कुछ कर्मचारी लंबे समय से अपने-अपने विभागों में काम भी कर रहे हैं। ऐसे में अचानक नियुक्ति समाप्त होने की स्थिति उनके सामने गंभीर आर्थिक और पारिवारिक संकट पैदा कर सकती है।



शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रखने का दावा
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और वे अपनी मांग लोकतांत्रिक तरीके से सरकार के सामने रख रहे हैं। उनका कहना है कि वे किसी तरह की अव्यवस्था नहीं चाहते, बल्कि सरकार से संवाद और समाधान की उम्मीद कर रहे हैं। अभ्यर्थियों ने दोहराया कि जब तक नियुक्ति रद्द करने के फैसले पर पुनर्विचार नहीं होता और उनकी सेवा सुरक्षा को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक धरना जारी रहेगा। फिलहाल प्रोजेक्ट भवन के बाहर JSSC-CGL चयनित अभ्यर्थियों का धरना सरकार के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है—परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी की जिम्मेदारी तय करते हुए क्या चयनित और कार्यरत अभ्यर्थियों के हितों की भी अलग से सुरक्षा की जाएगी? अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम और अभ्यर्थियों के साथ होने वाली बातचीत पर टिकी है।


