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झारखंड में 5 खदानों का लीज रद्द, फिर होगी नीलामी; फॉरेस्ट क्लीयरेंस बना बड़ी वजह

Jharkhand Mines Lease Cancelled

8-10 साल पहले नीलाम हुए दो गोल्ड, एक आयरन ओर और दो ग्रेफाइट ब्लॉक में शुरू नहीं हो सका उत्पादन

सरकार ने दोबारा नीलामी की तैयारी शुरू की

रांची: झारखंड सरकार ने करीब आठ से 10 साल पहले नीलाम की गई पांच खदानों के लीज आवंटन को रद्द कर दिया है। इनमें दो सोना खदान, एक लौह अयस्क खदान और दो ग्रेफाइट खदान शामिल हैं। इन खदानों में लंबे समय से उत्पादन शुरू नहीं हो सका था। बताया गया है कि फॉरेस्ट क्लीयरेंस समेत कई जरूरी मंजूरियां नहीं मिलने के कारण खनन परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पाईं। अब राज्य सरकार इन पांचों खदानों की दोबारा नीलामी कराने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संबंधित विभाग को दोबारा नीलामी की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है। इन खदानों की पहली नीलामी इस्पात मंत्रालय के अधीन संचालित MSTC के ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के माध्यम से हुई थी। अब लीज आवंटन रद्द किए जाने की अधिसूचना भी इसी प्लेटफॉर्म पर जारी की गई है। खान विभाग के संयुक्त सचिव जियाउल अंसारी की ओर से लीज रद्द करने संबंधी अधिसूचना जारी की गई है।

परासी गोल्ड माइंस का लीज भी हुआ रद्द
इन खदानों में पश्चिमी सिंहभूम और अन्य क्षेत्रों के खनिज ब्लॉक शामिल हैं। परासी सोना खदान करीब 69.240 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली हुई है। इस खदान की नीलामी 1 नवंबर 2017 को हुई थी और इसे रुंगटा माइंस लिमिटेड ने हासिल किया था। कंपनी को निर्धारित समय के भीतर खदान से उत्पादन शुरू करना था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 2 जनवरी 2021 तक उत्पादन शुरू करने की समय सीमा तय की गई थी। हालांकि निर्धारित समय बीतने के बाद भी यहां खनन उत्पादन शुरू नहीं हो सका। इसकी प्रमुख वजह फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं मिलना बताई गई। लंबे समय तक परियोजना आगे नहीं बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने अब इस खदान का लीज आवंटन रद्द कर दिया है।

बड़ा पहाड़डीहा गोल्ड ब्लॉक में भी नहीं शुरू हुआ खनन
पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित बड़ा पहाड़डीहा गोल्ड ब्लॉक भी सरकार की ओर से रद्द किए गए खनन पट्टों में शामिल है। यह ब्लॉक करीब 272.651 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है। इसकी नीलामी 26 अक्टूबर 2016 को हुई थी। इसे मैथन इस्पात लिमिटेड ने हासिल किया था। लेकिन निर्धारित समय के भीतर यहां भी खनन कार्य शुरू नहीं हो पाया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, परियोजना के लिए जरूरी फॉरेस्ट क्लीयरेंस और अन्य मंजूरियां नहीं मिलने के कारण खनन गतिविधियां शुरू नहीं हो सकीं। अब राज्य सरकार ने इस ब्लॉक का लीज आवंटन भी रद्द कर दिया है।

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सारंडा में भनगांव आयरन ओर ब्लॉक भी रद्द
रद्द किए गए पांच ब्लॉकों में भनगांव आयरन ओर ब्लॉक भी शामिल है। यह पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी क्षेत्र में स्थित है और सारंडा वन प्रभाग के अंतर्गत आता है। वर्ष 2018 में झारखंड सरकार की ई-नीलामी के जरिए इस ब्लॉक का आवंटन साउथ-वेस्ट माइनिंग लिमिटेड को किया गया था। यह कंपनी JSW समूह से जुड़ी खनन कंपनी बताई जाती है। इस ब्लॉक में भी फॉरेस्ट क्लीयरेंस और अन्य जरूरी NOC नहीं मिलने के कारण खनन उत्पादन शुरू नहीं हो पाया। लंबे समय तक परियोजना के लंबित रहने के बाद अब राज्य सरकार ने इसका लीज आवंटन भी रद्द कर दिया है।

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दो ग्रेफाइट खदानें भी सूची में
सरकार की ओर से रद्द किए गए पांच लीज आवंटनों में दो ग्रेफाइट खदानें भी शामिल हैं। इन खदानों में भी आवश्यक मंजूरियों और क्लीयरेंस के अभाव में उत्पादन शुरू नहीं होने की बात सामने आई है। राज्य सरकार अब इन खदानों को नए सिरे से नीलाम करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए संबंधित विभाग को प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है। इस कदम के बाद उम्मीद है कि लंबे समय से लंबित पड़े खनिज ब्लॉकों को नए सिरे से आवंटित कर खनन गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सकेगा।

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कंपनियों का अलग दावा, ट्रिब्यूनल जाने की तैयारी
राज्य सरकार के फैसले के बाद संबंधित कंपनियों की ओर से इस कार्रवाई को लेकर अलग रुख सामने आया है। कंपनियों के प्रतिनिधियों का कहना है कि खदानों में उत्पादन शुरू होने में देरी के लिए कंपनियां जिम्मेदार नहीं थीं। उनका दावा है कि सरकारी स्तर पर जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने, विभिन्न NOC और फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिलने में देरी के कारण परियोजनाएं शुरू नहीं हो सकीं। संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों ने सरकार के लीज रद्द करने के फैसले को माइनिंग ट्रिब्यूनल में चुनौती देने की बात कही है। इससे आने वाले समय में सरकार और संबंधित कंपनियों के बीच कानूनी विवाद की स्थिति भी बन सकती है।

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अब दोबारा होगी पांचों खदानों की नीलामी
राज्य सरकार की ओर से फिलहाल पांचों खदानों का लीज आवंटन रद्द कर दिया गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद संबंधित विभाग इन खदानों को दोबारा नीलाम करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा। इस फैसले से एक तरफ लंबे समय से उत्पादन शुरू नहीं कर पाने वाली खदानों के भविष्य को लेकर नई प्रक्रिया शुरू होगी, वहीं दूसरी तरफ पूर्व आवंटियों की संभावित कानूनी चुनौती के कारण मामला आगे भी चर्चा में रह सकता है। अब देखने वाली बात होगी कि दोबारा नीलामी की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और इन खदानों को नए सिरे से किस कंपनी को आवंटित किया जाता है।

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